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बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 5 अगस्त 2026 का पंचांग,


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पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi) 2:- वार (Day) 3:- नक्षत्र (Nakshatra) 4:- योग (Yog) 5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए बुधवार का पंचांग, Budhvar Ka Panchang, आज का पंचांग, aaj ka panchang,


बुधवार का पंचांग (Budhwar Ka Panchang)


5 अगस्त 2026 का पंचांग, ( Panchang ), 5 August 2026 ka Panchang,

गणेश गायत्री मंत्र :
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।

।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

* दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।

जीवन में कोई भी मनोकामना हो हनुमान जी के जन्मोत्सव के दिन अवश्य ही करें ये उपाय,


मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है, अगर आप भी पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9044862881 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

इस उपाय से शरीर रहेगा निरोगी, शक्ति रहेगी भरपूर, बुढ़ापा पास भी नहीं आएगा, जानिए रोगनाशक दिव्य आहार,

* बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।

बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने तथा रात को सोते समय फिटकरी से दाँत साफ करने से आर्थिक पक्ष मजबूत होता है ।

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*विक्रम संवत् – 2083,
*शक संवत – 1948
*कलि संवत – 5128
*अयन – दक्षिणयायन
*ऋतु – वर्षा ऋतु
*मास – सावन माह
*पक्ष – कृष्ण पक्ष
*चंद्र बल – मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ ,

बुधवार को बुध की होरा :-

प्रात: 5.45 AM से 6.52 AM तक

दोपहर 01.34 PM से 2.41 PM तक

रात्रि 20.55 PM से 21.48 PM तक

बुधवार को बुध की होरा में हाथ की सबसे छोटी उंगली और बुध पर्वत को हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक बुध देव के मन्त्र का जाप करें ।

ज्योतिष, पढ़ाई, लिखाई, सीखने, वाकपटुता, अपना प्रभाव डालने और व्यापार में सफलता के लिए बुध की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

बुधवार के दिन बुध की होरा में बुध देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

अवश्य पढ़ें :- पूरे वर्ष निरोगी काया के लिए सर्दियों में सेवन करें ये आहार,

आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।

आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,

दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

बुध देव के मन्त्र

“ॐ बुं बुधाय नमः” अथवा

“ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।।”

गुरु पूर्णिमा पर इन ऋषियों के नामो का स्मरण करने से समस्त पापो का होगा नाश,

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  • तिथि (Tithi) – सप्तमी तिथि 20.42 PM तक तत्पश्चात अष्टमी तिथि,
  • तिथि के स्वामी – सप्तमी तिथि के स्वामी सूर्य देव जी और अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है,

🌅 सप्तमी के अधिष्ठाता देव भगवान सूर्य हैं।

इस पावन तिथि पर आदित्यहृदय स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ अवश्य करें। ऐसा करने से आत्मबल, स्वास्थ्य, यश एवं सफलता की प्राप्ति होती है।

सप्तमी तिथि अत्यंत शुभ एवं मंगलकारी मानी गई है।

इस दिन जन्म लेने वाले जातक सामान्यतः भाग्यशाली, गुणवान, तेजस्वी, परिश्रमी तथा सम्मानित होते हैं। अपनी योग्यता और प्रतिभा के बल पर वे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं।

🔸 आज का विशेष मंत्र (भगवान सूर्य):

॥ ॐ सूर्याय नमः ॥
इस मंत्र की कम से कम एक माला जप करने से सूर्यदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा आत्मविश्वास, ऊर्जा और सकारात्मकता में वृद्धि होती है।

🌼 सप्तमी का विशेष नाम – “मित्रपदा”

इस दिन काले एवं नीले रंग के वस्त्र धारण करने से बचना चाहिए। इसके स्थान पर लाल, केसरिया, पीले अथवा सफेद रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।

🌺 माँ कालरात्रि (माँ काली) की आराधना

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सप्तमी तिथि पर माँ कालरात्रि की उपासना भी अत्यंत फलदायी मानी गई है। उनकी कृपा से समस्त भय, बाधाएँ एवं संकट दूर होते हैं।

🔸 माँ काली का मंत्र:
॥ ॐ क्रीं काल्यै नमः ॥
इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करने से नकारात्मक शक्तियों, भय एवं संकटों से रक्षा होती है।

सप्तमी तिथि में करने योग्य शुभ कार्य

  • नए कार्य का शुभारंभ
  • नई यात्रा प्रारंभ करना
  • विवाह एवं मांगलिक कार्य
  • नए वस्त्र एवं आभूषण धारण करना
  • नृत्य, संगीत एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
  • चूड़ाकर्म, अन्नप्राशन, उपनयन आदि शुभ संस्कार

🧭 सप्तमी की शुभ दिशा:
वायव्य (उत्तर-पश्चिम)

🚫 आज क्या न करें?

सप्तमी तिथि को ताड़ (Palm) के फल का सेवन नहीं करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार इस दिन ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ने की आशंका मानी गई है।

🙏 भगवान सूर्यदेव एवं माँ कालरात्रि की कृपा से सभी के जीवन में उत्तम स्वास्थ्य, तेज, यश, समृद्धि और सुख-शांति का वास हो।

ॐ सूर्याय नमः। ☀️
ॐ क्रीं काल्यै नमः। 🌺

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नक्षत्र (Nakshatra) – अश्विनी 21.18 PM तक तत्पश्चात भरणी

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-        अश्विनी नक्षत्र के देवता अश्विनीकुमार जी,  नक्षत्र का  स्वामी ग्रह मंगल एवं अधिपति ग्रह केतु जी है ।

अश्विन नक्षत्र 27 नक्षत्रों में से पहला नक्षत्र है और यह नक्षत्र अश्व मुख अर्थात घोड़े के सिर का प्रतीक है। अश्विनी नक्षत्र 3 तारो का समूह है जो अश्विनी नक्षत्र साहस, जीवन, और शक्ति का प्रतीक है।

अश्विनी एक देवता नक्षत्र है जिसे अत्यधिक शुभ माना जाता है। यह नाम अश्विनी-कुमारों से संबंधित है जो हिंदू देवता माने जाते हैं।

अश्विनी नक्षत्र का लिंग पुरुष है। अश्विन नक्षत्र का आराध्य वृक्ष कुचला और स्वभाव शुभ माना गया है । अश्विन नक्षत्र में जन्मे जातक समान्यता धनवान तथा भाग्यवान होते  है।  

इस नक्षत्र में चन्द्र देव जी  के होने के कारण जातक को आभूषण से प्रेम रहता है एवं जातक सुन्दर, सुखी और सौभाग्यशाली होता है।

मान्यता है कि इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक धन, स्त्री,आभूषण तथा पुत्रादि  का पूर्ण सुख प्राप्त करते है।  ऐसे जातक सक्रिय, उत्साही होते है यह अपने फैसलों पर दृढ़ रहते हैं।  

अश्विनी नक्षत्र के जातको के लिए भाग्यशाली संख्या 2, 7 और 9, भाग्यशाली रंग पीला, मैरून, ऑरेंज, गुलाबी, एवं भाग्यशाली दिन मंगलवार तथा गुरुवार होता है ।

आज अश्विनी नक्षत्र के मंत्र “ॐ अश्विनी कुमाराभ्यां नमः” का 108 बार जाप करें इससे अश्विनी नक्षत्र को बल मिलेगा।  

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  • योग (Yog) – शूल 17.29 PM तक तत्पश्चात गण्ड
  • योग के स्वामी, स्वभाव :-     शूल योग के स्वामी सर्प एवं स्वभाव हानिकारक है ।
  • प्रथम करण : – विष्टि 09.26 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-  विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।
  • द्वितीय करण : – बव 20.42 PM तक तत्पश्चात बालव
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-   बव :-   बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।

  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.20 AM से 5.02 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.41 PM से 15.35 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 19.09 PM से 19.30 PM तक
  • अमृत काल : 14.16 PM से 15.50 PM तक

  • अग्निवास : पृथ्वी पर

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।

  • शिव वास : शमशान में 20.42 PM तक तत्पश्चात गौरी माँ के साथ


    शिव वास  :  श्मशान में   जब भगवान शिव का श्मशान में वास होता हैं, तो रुद्र अभिषेक आदि  करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ जी का  श्मशान में वास के दौरान अभिषेक करने से मृत्यु समान  परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

  • जब भगवान शंकर  गौरी मइय्या के साथ होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शंकर जी के देवी गौरी के साथ रहने के समय किये गए  रूद्रअभिषेक से घर कारोबार में सुख-समृद्धि आती है, स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।


    इन उपायों से धन संपत्ति खींची चली आएगी, किसी चीज़ का नहीं रहेगा अभाव
  • दिशाशूल (Dishashool)- बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।

    इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – बुधवार का गुलिक काल 10:30 AM से 12 PM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal) : – बुधवार का राहुकाल दिन 12:00 PM से 1:30 PM तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 5.45 AM
  • सूर्यास्त – सायं 19.09 PM
  • विशेष – सप्तमी को ताड़ का सेवन नहीं करना चाहिए  । इस दिन ताड़ का सेवन करने से रोग लगते है । 



  • मुहूर्त :-
  • पर्व त्यौहार

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हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।

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Suneel Pardal
Panchang & Vastu Consultant


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3 COMMENTS

  1. क्या पंचांग जानने की सुविधा अग्रिम (पहली शाम को) संभव हो सकती है जिस से अगले दिन की दिनचर्या आपके सुझाव अनुसार शुरू करने के लिए आवश्यक सामग्री पहले से जुटाई का सके।
    वैसे भी ज्यादातर लोगों को नौकरी पेशे के लिए सुबह सवेरे ही घर से निकलना होता है, अतः यदि उन्हें अग्रिम जानकारी होगी तो वे कुछ क्रिया कलाप करके प्रस्थान करेंगे। यदि उन्हें पंचांग मिलेगा ही दोपहर में तो शायद ही कुछ संभव होगा।

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