Home Hindi पंचांग बुधवार का पंचांग | Budhwar Ka Panchang

बुधवार का पंचांग | Budhwar Ka Panchang


बुधवार का पंचांग

Panchang, पंचाग, ( Panchang 2020, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang )

पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi) 2:- वार (Day) 3:- नक्षत्र (Nakshatra) 4:- योग (Yog) 5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए बुधवार का पंचांग (Budhwar Ka Panchang)।



बुधवार का पंचांग (Budhwar Ka Panchang)
बुधवार 27 मई 2020 का पंचाग ( Panchang )

गणेश गायत्री मंत्र :
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

* दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है। बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। इस दिन गणेशजी की पूजा अर्चना से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

*विक्रम संवत् 2077 संवत्सर कीलक तदुपरि सौम्य
*शक संवत – 1941
*अयन – उत्तरायण
*ऋतु –  ग्रीष्म  ऋतु
*मास – ज्येष्ठ  माह
*पक्ष – शुक्ल पक्ष

  • तिथि (Tithi)- पञ्चमी – 28 मई 24:32 तक तदुपरांत षष्ठी
  • तिथि का स्वामी – पञ्चमी  तिथि के स्वामी सर्पदेव(नाग ) जी है तथा षष्ठी तिथि के स्वामी कार्तिकेय जी है

पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता हैं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन नाग देव की पूजा करने से भय तथा कालसर्प दोष दूर होता है। पंचमी को नाग देवता का पूजन करने से घर में किसी की भी सांप काटने से मृत्यु नहीं होती है और  अगर सांप काटने से किसी की मृत्यु हो भी गयी हो तो उसे मुक्ति मिलती है, जातक को निर्भयता प्राप्त होती है । पंचमी तिथि को पूर्णा भी कहते है। इस तिथि में कोई भी नया कार्य शुरू करने से उसमे सफलता मिलने की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है वह कार्य बहुत लम्बे समय तक चलते है । लेकिन पौष माह की पंचमी को कोई भी नया कार्य नहीं करना चाहिए  । शास्त्रों में पंचमी तिथि को कटहल, बिल्ब, और खटाई खाने को मना किया गया है । 

  • नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- पुनर्वसु नक्षत्र के देवता आदिती (देवमाता ) है । तदुपरांत पुष्य नक्षत्र के देवता वृहस्पति है ।
  • प्रथम करण : – बव  – 12:53 तक
  • द्वितीय करण : -बालव – 19:44 तक
  • गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है । इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा/हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
  • राहुकाल (Rahukaal) : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः
  • सूर्यास्त – सायं
  • विशेष – पंचमी को बिल्व  का सेवन नही करना चाहिए ।  
  • पर्व त्यौहार-
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

pandit-ji
आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )

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Published By : Memory Museum
Updated On : 2020-04-28 10:21:55 PM

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2 COMMENTS

  1. क्या पंचांग जानने की सुविधा अग्रिम (पहली शाम को) संभव हो सकती है जिस से अगले दिन की दिनचर्या आपके सुझाव अनुसार शुरू करने के लिए आवश्यक सामग्री पहले से जुटाई का सके।
    वैसे भी ज्यादातर लोगों को नौकरी पेशे के लिए सुबह सवेरे ही घर से निकलना होता है, अतः यदि उन्हें अग्रिम जानकारी होगी तो वे कुछ क्रिया कलाप करके प्रस्थान करेंगे। यदि उन्हें पंचांग मिलेगा ही दोपहर में तो शायद ही कुछ संभव होगा।

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