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Shukrwar ka panchag, शुक्रवार का पंचांग, 1 मई 2026 का पंचांग,

बैसाख माह की पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा, कूर्मावतार दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

गुरुवार का पंचांग शनिवार का पंचांग

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शुक्रवार का पंचांग, shukrwar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, Panchang 2026 हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang, पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-

    1:- तिथि (Tithi)
    2:- वार (Day)
    3:- नक्षत्र (Nakshatra)
    4:- योग (Yog)
    5:- करण (Karan)


    पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी नित्य पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

    जानिए, Shukravar Ka Panchang, शुक्रवार का पंचांग, आज का पंचांग, aaj ka panchang,

    1 मई 2026 का पंचांग, 1 Mayl  2026 ka Panchang,

  • महालक्ष्मी मन्त्र : ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

  • ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

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आज का पंचांग, aaj ka panchang,

दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।

शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय
“श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।

शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।

  • * विक्रम संवत् – 2083 वर्ष
  • * शक संवत – 1948 वर्ष
    * कलि संवत – 5128 वर्ष
    * कलयुग – 5128 वर्ष
    * अयन – उत्तरायण,
    * ऋतु – ग्रीष्म ऋतु,
    * मास – बैसाख माह
    * पक्ष – शुक्ल पक्ष
    * चंद्र बल – मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर,

शुक्रवार को शुक्र देव की होरा :-

प्रात: 5.41 AM से 6.50 AM तक

दोपहर 01.28 PM से 2.34 PM तक

रात्रि 20.36 PM से 21.41 PM तक

दाहिने हाथ के अंगूठे से नीचे के हिस्से ( शुक्र का स्थान ) और अंगूठे पर थोड़ा सा इत्र लगाकर, ( इत्र ना मिले तो उसके बिना भी कर सकते है) बाएं हाथ के अंगूठे से उस हिस्से को शुक्र की होरा में “ॐ शुक्राये नम:” या

ॐ द्रांम द्रींम द्रौंम स: शुक्राय नम:।’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य )I

यह उपाय आप कोई भी काम करते हुए चुपचाप कर सकते है इसके लिए किसी भी विधि विधान की कोई आवश्यकता नहीं है I

सुख समृद्धि, ऐश्वर्य, बड़ा भवन, विदेश यात्रा, प्रेम, रोमांस, सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए शुक्रवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

शुक्रवार के दिन शुक्र की होरा में शुक्रदेव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शुक ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

शुक्र देव के मन्त्र :-

ॐ शुं शुक्राय नमः।। अथवा

” ॐ द्राम द्रीम द्रौम सः शुक्राय नमः “।।

अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नवरात्री में अवश्य करें ये उपाय  

  • तिथि, (Tithi): पूर्णिमा 22.52 तक तत्पश्चात प्रतिपदा, तिथि, (Tithi) :-,
  • तिथि के स्वामी – पूर्णिमा तिथि के स्वामी चंद्र देव जी और प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी है I

हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है । यह बुद्ध पूर्णिमा / बुध जयंती इसलिए कहलाती हैं क्योंकि इसी दिन बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था, इसी दिन उनको बोधिवृक्ष के नीचे उन्हें बुद्धत्व ज्ञान की प्राप्ति हुई और इसी दिन उन्हें महानिर्वाण भी प्राप्त हुआ था । आज के दिन भगवान श्री विष्णु जी के कूर्मवतार की भी पूजा की जाती है ।

वर्ष 2026 में बुध पूर्णिमा का पर्व आज शुक्रवार 1 मई को मनाया जा रहा है ।

हिंदू धर्म के लोग गौतम बुद्ध को भगवान विष्णु का अवतार मानते हैं, इसलिए यह दिन बौद्ध और हिंदू दोनों धर्मो के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है ।

भगवान गौतम बुद्ध का जन्म बैसाख मास की पूर्णिमा को 563 ईसवी पूर्व लुंबिनी, शाक्य राज्य ( नेपाल) में हुआ था और उनका महानिर्वाण कुशानारा आज के कृषि नगर में हुआ था ।

बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर भगवान बुद्ध की महा निर्वाणस्थली कुशीनगर में स्थित उनके महापरिनिर्वाण विहार पर बहुत बड़ा एक माह का मेला लगता है जिसमे देश विदेश से बड़ी संख्या में हिन्दू और बौद्ध धर्म के मानने वाले यहाँ पर आते है ।

बुद्ध पूर्णिमा को दुनिया के करोड़ो लोग बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं। यह पर्व भारत, चीन, नेपाल, सिंगापुर, वियतनाम, थाइलैंड, जापान, कंबोडिया, मलेशिया, श्रीलंका, म्यांमार, इंडोनेशिया, पाकिस्तान तथा विश्व के कई देशों में जहाँ पर बड़ी संख्या में बौद्ध धर्म को मानने वाले है, मनाया जाता है ।

श्रीलंका व अन्य बहुत से दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में इस दिन को ‘वेसाक’ उत्सव के रूप में मनाते हैं । इस दिन बौद्ध धर्म के मानने वाले अपने अपने घरों में दीपक जलाते हैं और घरों को फूलों से सजाते हैं ।

बुद्ध पूर्णिमा के दिन बोधिवृक्ष की भी पूजा की जाती है। उसकी शाखाओं को फूलो के हार व सुन्दर सुन्दर रंगीन पताकाओं से सजाते हैं ।

बुध पूर्णिमा के दिन कई शुभ योगो का निर्माण हो रहा है । गुरु शुक्र और सूर्य तीनो ग्रह मिलकर इस दिन त्रिग्रही योग का निर्माण भी कर रहे हैं । गुरु और सूर्य की युति से इस दिन गुरु आदित्य योग, गज लक्ष्मी, सर्वतः सिद्धि योग एवं इस दिन शुक्र आदित्य योग भी रहेगा ।

पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल, गुरुवार को रात्रि 9 बजकर 13 मिनट पर प्रारम्भ होगी जिसका समापन शुक्रवार 01 मई, को रात 10 बजकर 52 मिनट पर होगा । इसलिए इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा उदयातिथि के अनुसार 1 मई, शुक्रवार को ही मनाई जाएगी ।

वैशाख पूर्णिमा को भगवान विष्णु के द्वितीय अवतार “कूर्म अवतार” की पूजा की जाती है। श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार जब देवता और असुर अमृत पाने के लिए मंदार पर्वत से समुद्र मंथन कर रहे थे तो उस समय पर्वत को मथते समय कोई आधार नहीं मिला और मंदार पर्वत समुद्र में डूबने लगा।

उस समय भगवान श्री हरी विष्णु जी ने कूर्म अर्थात कछुए का रूप धारण किया और अपनी पीठ पर मंदार पर्वत को संभाल लिया और इसके बाद समुद्र मंथन आगे बढ़ा ।

शास्त्रों के अनुसार वह बैसाख माह की पूर्णिमा का ही दिन था जिस दिन विष्णु जी ने कूर्मावतार लिया था इसीलिए बैसाख पूर्णिमा को विष्णु जी के कूर्म स्वरूप की आराधना भी की जाती है ।

शास्त्रों के अनुसार बैसाख पूर्णिमा के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसी कारण इसे पीपल पूर्णिमा भी कहा जाता है। वैशाख पूर्णिमा के दिन पीपल की आराधना करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है ।

पूर्णिमा तिथि को चन्द्रमा सम्पूर्ण होता है। पूर्णिमा तिथि माँ लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है, इस दिन सुख समृद्धि के लिए माँ लक्ष्मी की विधि पूर्वक उपासना अवश्य करें।

पूर्णिमा तिथि को संध्या के समय में सत्यनारायण भगवान की पूजा तथा कथा की जाती है एवं चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।

पूर्णिमा तिथि के स्वामी चन्द्र देव जी है, पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति को चन्द्र देव की पूजा नियमित रुप से अवश्य ही करनी चाहिए।

पूर्णिमा तिथि के दिन चन्द्र देव जी के मन्त्र

ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:। अथवा

ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:।

का जाप करने से कुंडली में चन्द्रमा के शुभ फल मिलने लगते है ।

इस दिन सफ़ेद वस्त्र पहने और चन्द्रमा की चांदनी में अवश्य बैठें ।

पूर्णिमा के दिन लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा आदि का सेवन नहीं ना करें, इस दिन परिवार में सुख-शांति बनायें रखे इस दिन क्रोध और हिंसा से दूर रहना चाहिए ।

पूर्णिमा के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना निषिद्ध है।

पूर्णिमा के दिन ब्रह्यचर्य का पालन करना चाहिए । पूर्णिमा के दिन गरीब या जरुरतमंद को दान करने से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।

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नक्षत्र ( Nakshatra ) : स्वाति 04.35 AM शनिवार 2 मई तक

नक्षत्र के स्वामी :–           स्वाति नक्षत्र के देवता वायु और सरस्वती जी और स्वामी राहु जी है ।  

स्वाति नक्षत्र, नक्षत्र मंडल में उपस्थित 27 नक्षत्रों में 15वां है। स्वाति नक्षत्र राहु का दूसरा नक्षत्र है। स्वाति नक्षत्र के देवता पवन देव हैं।  स्वाति नक्षत्र का संबंध विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती से भी है।

स्वाति नक्षत्र ‘शुद्धता’,  ‘स्वतंत्रता’ को दर्शाता है ।  यह अत्यंत शुद्ध और पवित्र बारिश की पहली बूंद का भी प्रतीक है ।

स्वाति नक्षत्र के पानी का महत्व ज्यादा होता है। इसकी एक बूंद से पपैया पक्षी अपनी प्यास बुझा लेता है। केले के पत्ते पर जल की बूंद गिरने से कपूर बनता है। इसी जल की बूंद समुद्र में गिरने से मोती बनता है।

इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : अर्जुन तथा स्वाभाव शुभ माना गया है। स्वाति नक्षत्र सितारे का लिंग महिला है।

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवन भर शुक्र एवं राहु ग्रह का प्रभाव बना रहता है।

इस नक्षत्र में जन्मा जातक धार्मिक, लोकप्रिय, बुद्धिमान, चतुर, परिश्रमी, अनुशासित, आध्यात्मिक होता हैं, सामन्यता इन्हे भूमि, भवन और पूर्ण सुख मिलता है।

लेकिन यदि शुक्र ख़राब हो तो जातक क्रोधी, घमंडी, अति कामुक, मदिरा प्रेमी होता है उसको धन और स्त्री का सुख भी नहीं मिलता है ।

स्वाति नक्षत्र में पैदा हुई स्त्री सुन्दर, मिलनसार, धार्मिक, दयालु,  दूसरो को जल्द प्रभावित करने वाली होती हैं। इनका पारिवारिक दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।

स्वाति नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 4 और 6,  भाग्यशाली रंग, गहरा भूरा, काला,  भाग्यशाली दिन  शनिवार, सोमवार और मंगलवार माना जाता है ।

स्वाति नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को वायु देव के  “ॐ वायवे नमः”। मन्त्र माला का जाप अवश्य करना चाहिए, इससे जीवन में श्रेष्ठ सफलता मिलती है  ।

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योग(Yog) :- सिद्धि 21.13 PM तक तत्पश्चात व्यातिपात

योग के स्वामी, स्वभाव :-        सिद्धि योग के स्वामी भगवान गणेश जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ है ।

प्रथम करण : – विष्टि 10.00 AM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-    विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।

द्वितीय करण :- बव 22.52 PM तक तत्पश्चात बालव

करण के स्वामी, स्वभाव :-    बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।

  • दिशाशूल (Dishashool)- शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.15 AM से 4.58 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.31 PM से 15.24 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.55 PM से 19.17 PM तक
  • अमृत काल : 18.56 AM से 20.41 AM तक
  • अग्नि वास : पाताल में 22.52 तक तत्पश्चात पृथ्वी

     जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।
  • शिव वास : शमशान 22.52 PM तक तत्पश्चात माँ गौरी के साथ

    श्मशान में जब भगवान शिव का श्मशान में वास होता हैं, तो रुद्र अभिषेक आदि करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ जी का श्मशान में वास के दौरान अभिषेक करने से मृत्यु समान परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

    दिशा शूल : शास्त्रों के अनुसार शुक्रवार को पश्चिम दिशा में दिशा शूल होता है, यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – शुक्रवार का गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)दिन – 10:30 AM से 12:00 PM तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:41
  • सूर्यास्त – सायं : 18:56
  • विशेष – पूर्णिमा और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना, क्रोध करना, हिंसा करना मना है ।
  • ऐसा करने से दुर्भाग्य आता है, दुःख, कलह और दरिद्रता के योग बनते है ।।
     
  • पर्व त्यौहार बैसाख माह की पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा, कूर्मावतार दिवस

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“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )


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