Home Hindi पूर्णिमा के उपाय सूर्य ग्रहण २०२० | सूर्य ग्रहण महत्व

सूर्य ग्रहण २०२० | सूर्य ग्रहण महत्व

सूर्य ग्रहण 2020
Surya Grahan 2020

सूर्य ग्रहण का महत्व
Surya Grahan Ka Mahatva

सूर्य ग्रहण ( Surya grahan ) एक बहुत ही प्रमुख खगोलीय घटना, प्रकृ्ति का एक अद्भुत चमत्कार है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रहण ( Surya grahan ) तब होता है, जब सूर्य आंशिक अथवा पूर्ण रूप से चन्द्रमा द्वारा बाधित हो जाए। अर्थात जब चन्दमा पृथ्वी और सूर्य के बीच यानि घूमते-घूमते चन्द्रमा, सूरज व पृथ्वी तीनो एक ही सीध में होते हैं और इस कारण चन्द्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है इसे सूर्यग्रहण कहा जाता हैं। सूर्यग्रहण अमावस्या के दिन में ही होता है।

वैदिक काल से ही हमारे ऋषि मुनियों को खगोलीय संरचना सूर्य ग्रहण, चन्द्र ग्रहण तथा उनकी पुनरावृत्ति का ज्ञान था । ऋग्वेद के अनुसार अत्रिमुनि के परिवार के पास यह ज्ञान उपलब्ध था। महर्षि अत्रिमुनि ग्रहण के ज्ञान को देने वाले प्रथम आचार्य थे।

वेदांग ज्योतिष से हमारे वैदिक पूर्वजों के इस महान ज्ञान का पता चलता है। प्राचीन काल से ही ग्रह नक्षत्रों की दुनिया की इस घटना का ज्ञान भारतीय मनीषियों के पास था उन्होंने सफलतापूर्वक इसकी गणना करनी शुरू कर दी थी। ग्रहण पर धार्मिक, वैदिक, वैचारिक, वैज्ञानिक विवेचन प्राचीन ज्योतिषीय ग्रन्थों से ही होता चला आया है।

पुराणों की मान्यता के अनुसार राहु चंद्रमा को डसता है तो चंद्र ग्रहण एवं केतु सूर्य को ग्रसता है तो सूर्य ग्रहण होता है ।
ये दोनों ही छाया की संतान हैं जो चंद्रमा और सूर्य की छाया के साथ-साथ चलते हैं। चंद्र ग्रहण के समय कफ की प्रधानता बढ़ती है और मन की शक्ति क्षीण होती है, जबकि सूर्य ग्रहण के समय जठराग्नि, नेत्र तथा पित्त की शक्ति कमज़ोर पड़ती है।

ग्रहण के सम्बन्ध में एक बात और विशेष है कि चन्द्रग्रहण तो अपने संपूर्ण तत्कालीन प्रकाश क्षेत्र में अर्थात जहाँ जहाँ चंद्रमा निकला हो देखा जा सकता है किन्तु सूर्यग्रहण अधिकतम 10 हज़ार किलोमीटर लम्बे और 250 किलोमीटर चौड़े क्षेत्र में ही दिखाई पड़ता है। सम्पूर्ण सूर्यग्रहण की वास्तविक अवधि अधिक से अधिक 11 मिनट ही हो सकती है उससे अधिक नहीं।

खगोल शास्त्रीयों के अनुसार 18 वर्ष 18 दिन की समयावधि में 41 सूर्य ग्रहण ( Surya Grahan ) और 29 चन्द्रग्रहण होते हैं। एक वर्ष में 5 सूर्यग्रहण ( Surya grahan ) तथा 2 चन्द्रग्रहण ( chandra grahan ) तक हो सकते हैं। किन्तु 4 से अधिक ग्रहण बहुत कम ही देखने को मिलते हैं।

एक दिलचस्प बात और है कि चन्द्र ग्रहण ( Chandra Grahan ) से कहीं अधिक सूर्यग्रहण ( surya grahan ) होते हैं। 3 चन्द्रग्रहण पर 4 सूर्यग्रहण का अनुपात आता है।

वर्ष 2020 में कुल 5 ग्रहण आएंगे । जिसमें 3 सूर्य ग्रहण और 2 चंद्र ग्रहण होंगे 2020 में पड़ने वाले सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे लेकिन चंद्र ग्रहण देखे जा सकेंगे ।

सूर्य ग्रहण 2020

पहला सूर्य ग्रहण: वर्ष 2020 में पहला सूर्य ग्रहण 15 फरवरी/16 फरवरी की मध्य रात्रि को पड़ेगा जो आंशिक सूर्य ग्रहण होगा । सूर्य ग्रहण 15 फरवरी की रात 12 बजकर 25 मिनट पर शुरू होगा और सुबह चार बजे इसका मोक्ष होगा ।

जहाँ जहाँ सूर्य ग्रहण पड़ेगा वहां सूतक काल 12 घंटे पहले अर्थात 15 फ़रवरी की सुबह 11:36 से शुरू हो जायेगा । चूँकि भारतीय समय के अनुसार यह सूर्य ग्रहण रात्रि में होगा इसलिए यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा ।

यह सूर्य ग्रहण मुख्यतः दक्षिण / पश्चिम अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत, अटलांटिक, हिंद महासागर, अंटार्कटिका की ज्यादातर हिस्सों में दिखेगा।

दूसरा सूर्य ग्रहण: वर्ष 2020 में दूसरा सूर्य ग्रहण 2 जुलाई को होगा यह सूर्य ग्रहण भी आंशिक सूर्य ग्रहण ही होगा जो मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया में दिखेगा ।

आषाढ़ माह की अमावस्या को पड़ने वाला यह सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार 11 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर 3 जुलाई की सुबह 3 बजकर 20 मिनट तक रहेगा।

सूर्य ग्रहण पुनर्वसु नक्षत्र और हर्षण योग में पड़ेगा। यह ग्रहण कर्क लग्न और मिथुन राशि में पड़ेगा। इसमें सूर्य और चंद्र दोनों मिथुन राशि में रहेंगे और लग्न में बुध और राहु रहेंगे।

इस जुलाई 2020 के महीने में दो-दो ग्रहण लगने वाले हैं, सूर्य ग्रहण के बाद 27 जुलाई को इस सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण होगा।

तीसरा सूर्य ग्रहण

वर्ष 2020 में तीसरा सूर्य ग्रहण 11 अगस्त को पड़ेगा यह सूर्य ग्रहण भी आंशिक होगा जो पूर्वी यूरोप, एशिया, नोर्थ अमेरिका और आर्कटिक में दिखाई पड़ेगा ।

इस बार का सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 1 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर शाम 5 बजे खत्‍म होगा. ग्रहणकाल का सूतक लगभग 12 घंटे पहले लगेगा. हालांकि अंतरराष्‍ट्रीय समय के अनुसार आंश‍िक सूर्य ग्रहण 8 बजकर 2 मिनट से शुरू होकर सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर खत्‍म होगा.

हालाँकि यह ग्रहण ( Grahan ) भारत में दिखाई नहीं देगा। चूँकि यह सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए भारत में इसका सूतक भी मान्य नहीं है क्योंकि मान्यता है कि जिस जगह सूर्यग्रहण दिखता है वहीँ पर सूतक मान्य होता है।

लेकिन सूतक नहीं भी हो तो भी सूर्य ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर अवश्य ही पड़ेगा इसलिए सभी राशि के जातको को कुछ सावधानियाँ और ग्रहण के समय उपाय अवश्य ही करने चाहिए।

यह ग्रहण अफ्रीका महाद्वीप, हिन्द महासागर एंव आस्ट्रेलिया के पूर्वी तटवर्ती भू-भाग, अण्टाकार्टिका में दृश्य होगा।

पं मुक्ति नारायण पाण्डेय
( कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )

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