Home Hindi पूर्णिमा के उपाय राशिनुसार सूर्यग्रहण के उपाय | सूर्यग्रहण का राशिनुसार प्रभाव

राशिनुसार सूर्यग्रहण के उपाय | सूर्यग्रहण का राशिनुसार प्रभाव

राशिानुसार सूर्यग्रहण के उपाय
Rashi Anusar Surya Grahan ke upay

ग्रहण ( Grahan ) शब्द से किसी अवरोध, किसी अनिष्ट, किसी संकट का आभास होता है। इसे सुनकर दिमाग में नकारत्मक छवि बनने लगती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहण ( Grahan ) एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका संसार के सभी प्राणियों, जीव जंतुओं पर बहुत प्रभाव पड़ता है।

ज्योतिष के अनुसार हम मनुष्यों का सारा जीवन 12 राशियों और 27 नक्षत्रो में समाया हुआ है , चूँकि हर राशि और नक्षत्रो का अलग अलग प्रभाव होता है इसलिए ग्रहण ( Grahan ) का भी सभी राशियों पर अलग अलग असर पड़ता है । ग्रहण ( Grahan ) कुछ राशियों के लिए शुभ हो सकता है और कुछ राशियों पर इसका विपरीत असर भी पड़ता है।

मान्यता है कि यदि राशिनुसार अलग अलग उपाय किये जाये तो ग्रहण के शुभ फलो को प्राप्त किया जा सकता है, इसके बुरे प्रभावों को दूर किया जा सकता है ।

साल 2018 में तीन आंशिक सूर्य ग्रहण और दो पूर्ण चंद्र ग्रहण के योग बन रहे हैं। साल 2018 का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण 31 जनवरी को पड़ेगा। इसके बाद 15 फरवरी को आंशिक सूर्य ग्रहण होगा। सूर्य ग्रहण 15 फरवरी की रात 12 बजकर 25 मिनट पर शुरू होगा और सुबह चार बजे इसका मोक्ष होगा ।

वर्ष 2018 में दूसरा सूर्य ग्रहण 13 जुलाई को पड़ेगा। आषाढ़ माह की अमावस्या को पड़ने वाला यह सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार सुबह 7 बजकर 18 मिनट से शुरू होगा, ग्रहण का मध्य काल 8 बजकर 13 मिनट पर और मोक्ष 9 बजकर 43 मिनट पर होगा।

सूर्य ग्रहण पुनर्वसु नक्षत्र और हर्षण योग में पड़ेगा। यह ग्रहण कर्क लग्न और मिथुन राशि में पड़ेगा। इसमें सूर्य और चंद्र दोनों मिथुन राशि में रहेंगे और लग्न में बुध और राहु रहेंगे।

राशिानुसार सूर्यग्रहण के उपाय

इस जुलाई 2018 के महीने में दो-दो ग्रहण लगने वाले हैं, सूर्य ग्रहण के बाद 27 जुलाई को इस सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण होगा और इसके बाद साल 2018 का तीसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 11 अगस्त शनिवार को दोपहर 1 बजकर 32 मिनट पर शुरू होगा और ग्रहण मोक्ष सायं काल 5 बजे होगा । यह सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा । इसलिए भारत में इसका कोई प्रभाव नही होगा ।

यह सूर्य ग्रहण मुख्यता अमरीका और ऑस्ट्रेलिया में नज़र आएगा । इसके कारण ग्रहण के सूतक काल का प्रभाव भारत में नहीं पड़ेगा, लेकिन ग्रहण पर निकलने वाली नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव विभिन्न राशियों पर अवश्य पड़ेगा। मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण से वातावरण अशांत और दूषित होता है। जिसका मनुष्यों, जीव जंतुओ और प्रकृति पर नकारात्मक असर दिखाई पड़ता है।

चूँकि यह ग्रहण आषाढ़ की अमावस्या पर पड़ रहा है और इस अमावस्या के दिन दान और पूर्वजों की शांति के लिए तर्पण और गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इसी कारण चाहे यह सूर्य ग्रहण भारत में नज़र नहीं भी आ रहा है लेकिन इसका महत्त्व और भी अधिक बड़ गया है।

पं मुक्ति नारायण पाण्डेय
( कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )

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