Home Hindi पवित्र स्थान लक्ष्मी मंदिर | लक्ष्मी मंदिर श्रीपुरम

लक्ष्मी मंदिर | लक्ष्मी मंदिर श्रीपुरम

लक्ष्मी मंदिर श्रीपुरम

  • वेल्लोर में श्रीपुरम स्वर्ण मंदिर को मलईकोडी के रूप में जाना जाता है,यह देवी महालक्ष्‍मी को समपिर्तत है और यह एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक जगह है। पूरे मंदिर की डिजाइन नारायणी अम्मा द्वारा बनायी गई थी। इस मंदिर की मुख्य विशेषता यह है कि मंदिर के अंदर व बाहर दोनों तरफ सोने की कोटिंग है।
  • जिस तरह उत्तर भारत का अमृतसर का स्वर्ण मंदिर बहुत खूबसूरत होने से साथ-साथ विश्व प्रसिद्ध भी है, उसी तरह श्रीपुरम स्वर्ण मंदिर दक्षिण भारत का स्वर्ण मंदिर है, कहते है कि इस मंदिर के निर्माण में विश्व में सबसे ज्यादा सोने का उपयोग किया गया है।
  • सोने से निर्मित इस महालक्ष्मी मंदिर को बनने में 7 वर्षों का समय लगा, और यह लगभग 100 एकड़ जमीन पर बना हुआ है। इस मंदिर के निर्माण में लगभग 15,000 किलो शुद्ध सोने का इस्तेमाल हुआ है। विश्व में किसी भी मंदिर के निर्माण में इतना सोना नहीं लगा है, जितना की इस लक्ष्मी-नारायण मंदिर में लगाया गया। इस सोने के मंदिर में छत से लेकर गुबंद और मूर्तियां सब कुछ सोने से ही बने हैं। रात में जब इस मंदिर में प्रकाश किया जाता है, तब इस सोने के मंदिर की चमक देखने लायक होती है। इस मंदिर को बनाने में 300 करोड़ से भी ज्यादा खर्च हुए हैं और मंदिर को 400 कारीगरों ने सात साल की मेहनत के बाद तैयार किया है। यह मंदिर 24 अगस्त 2007 को दर्शन के लिए खोला गया था।
  • इस खूबसूरत मंदिर को किसी अरबपति या किसी राजनेता ने नहीं वरन बड़े ही साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले युवा सन्यासी ने ये मंदिर बनवाया है।
  • इस पूरे मंदिर को एक तारे की तरह बनाया गया है और अगर इस मंदिर को ऊंचाई से देखें तो ये एक श्री चक्र की तरह दिखता है, मतलब ये कि मंदिर के चारों ओर किसी भी तरफ से 2 किलोमीटर लम्बे इस स्टार पाथ पर चलकर मंदिर के अंदर पहुंचा जा सकता है।
  • भक्तगण इस मंदिर परिसर में दक्षिण से प्रवेश कर घडी की दिशा में घुमते हुए पूर्व दिशा तक आते हैं, जहां से मंदिर के अंदर भगवान श्री लक्ष्मी नारायण के दर्शन करने के बाद फिर पूर्व में आकर दक्षिण से ही बाहर आ जाते हैं। इस मंदिर परिसर के उत्तर में एक छोटा सा तालाब भी है। मंदिर परिसर में देश की सभी प्रमुख नदियों से पानी लाकर ‘सर्व तीर्थम सरोवर’ का निर्माण कराया गया है।
  • इस मंदिर परिसर में लगभग 27 फीट ऊंची एक खूबसूरत दीपमाला भी है। इस दीपमाला को जलाने पर सोने से बना मंदिर, इस तरह चमकने लगता है, की वह दृष्य देखते ही बनता है। इस दीपमाला का धार्मिक महत्व भी है। भक्त गण मंदिर में भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के दर्शन करने के बाद इस दीपमाला के भी दर्शन करना आवश्यक मानते हैं।

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