Memory Alexa Hindi
loading...

वायव्यमुखी भवन का वास्तु

Dhan Prapti ke Upay

जानिए कैसा हो वायव्यमुखी भवन का वास्तु जिससे इस तरह के भवन में ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले

वायव्यमुखी का वास्तु
Vayavya mukhi ka vastu

                        ??? ???????

भूखण्ड का वास्तु
Bhukhand ka vastu


जिस भवन / भूखण्ड के वायव्यकोण (पश्चिम उत्तर ) में मार्ग होता है उन्हे वायव्य मुखी भवन कहते है। इसका शुभ अशुभ प्रभाव परिवार की स्त्रियों तथा संतान पर पड़ता है। यह दिशा घर के सदस्यों के मानसिक अवस्था पर अपना असर डालती है । वायव्य कोण का संबंध वायु तत्त्व के साथ होता हैं, इस दिशा का मालिक चन्द्र है यह दिशा काल पुरूष के घुटने एवं हाथो की कोहनी को मानी जाती है। इस भवन पर निर्माण यदि उचित हो तो वह गृह स्वामी को बहुत धनवान बनाता है लेकिन दोषपूर्ण निर्माण होने से उस गृह के निवासी पैसे पैसे को मोहताज हो जाते है। ऐसे भवन का प्रभाव वहां के निवासियों के सम्बन्धो,कार्य क्षेत्र एवं मुकदमे की सफलता असफलता पर पडता है।

 

चूँकि वायव्य क्षेत्र वायु का क्षेत्र है और वायु हर जगह घूमती रहती है कभी भी एक जगह नहीं रहती है इसलिए अगर इस तरह के मकान में वास्तु दोष हो तो भवन के निवासियों का दिमाग बहुत ही अस्थिर हो सकता है। इसीलिए इस भवन में निवास करने वाले जल्दी ही निराशा में भर जाते है, कई बार तो उनकी इस समाज, परिवार से ऐसी विरक्ति होती है कि वह दार्शनिक अथवा सन्यासी तक बन जाते है । वायव्य मुखी भवन में वास्तु दोष होने पर पति पत्नी के बीच बेवजह कलह बनी रहती है, जिगर, पेट और गुर्दो की बीमारी होने की सम्भावना रहती है लेकिन यदि इस दिशा के भवन का वास्तु के सिद्दांतो के अनुसार निर्माण किया जाय तो यह भवन भी अवश्य ही शुभ साबित होते है ।

 

 

om इस भवन में सामने का भाग नैत्रत्य, दक्षिण एवं आग्नेय कोण की अपेक्षा नीचा लेकिन पूर्व, ईशान एवं उत्तर की अपेक्षा ऊँचा हो तो शुभ माना जाता है । लेकिन नीचा होने पर थाना , कोर्ट कचहरी मुकदमे आदि का सामना करना पड़ सकता है ।

 

om वायव्य कोण का भवन सामने से खुला होना चाहिए अर्थात किसी भी तरह से ढका ना हो हो अन्यथा भवन स्वामी की दिमागी स्थिति ख़राब हो सकती है और वह आत्महत्या तक कर सकता है ।

 

om वायव्यमुखी भवन में मुख्य द्वार पश्चिमं वायव्य में बनाना शुभ होता है । वायव्य दिशा में मुख्य द्वार होने पर घर के स्वामी की अपनी प्रथम संतान से अनबन रहती है एवं भवन में चोरी होने का खतरा भी रहता है और उत्तर की तरह होने से घर में कलह बनी रहती है और भवन में निवास करने वाले व्यक्तियों की मन: स्तिथि सदैव अस्थिर रहती है ।


om वायव्य मुखी भवन में सामने का हिस्सा कटा नहीं होना चाहिए ना ही यह कम या ज्यादा होना चाहिए । अगर वायव्य कोण आगे बड़ा हो तो उसे काट कर चौकौर बना लेना चाहिए और अगर नीचा हो तो उसे बराबर करा लें लेकिन ध्यान रहे कि.इसे ईशान से ऊँचा लेकिन आग्नेय , दक्षिण, और नैत्रत्य से नीचा रखना चाहिए और यदि यह कटा हो तो वहाँ पर हनुमान जी की तस्वीर लगाने से दोष का निवारण हो जाता है ।

om वायव्य मुखी भवन में पश्चिम दिशा की अपेक्षा पूर्व में और दक्षिण दिशा की अपेक्षा उत्तर में रिक्त स्थान सदैव ज्यादा रहना चाहिए अत: पूर्व एवं उत्तर की तरफ निर्माण कम से कम होना शुभ रहता है ।

 

वायव्य कोण में गृहस्वामी को कभी भी बैडरूम नहीं बनाना चाहिए अर्थात गृह स्वामी वायव्य दिशा में नही सोये। इस दिशा में मेहमानो का कमरा हो और विवाह योग्य कन्या को इस दिशा में सुलाना उचित रहता है । लेकिन उसका पूरा ध्यान भी रखना चाहिए वरना कन्या प्रेम विवाह कर सकती है अथवा भाग भी सकती है ।

 

om वायव्य दिशा में उत्तर दिशा कि तरफ सेफ्टिक टेंक बनाना लाभदायक रहता है। यह स्थान सेफ्टिक टेंक बनाने के लिए उपर्युक्त होता है।


Published By : Memory Museum
Updated On : 2019-11-24 06:00:55 PM

Ad space on memory museum


अपने उपाय/ टोटके भी लिखे :-----
नाम:     

ई-मेल:   

उपाय:    


  • All Post
  •  
  • Admin Post
1.
sir, Maine apne gao me khet ki jameen par toilet aur bathroom ka ek sath nirman vayavya kon me karba liya hai.
lekin sir mai naye ghar ka nirman usi me bagal sent karna chahata hu to kya ghar banana thik rahega ki nahi.
sir please bataye
Binesh  

2.
Mere flat ka main gate vayavya disha me h...iska koi upay batye
Monika  

No Tips !!!!

दोस्तों यह साईट बिलकुल निशुल्क है। यदि आपको इस साईट से कुछ भी लाभ प्राप्त हुआ हो , आपको इस साईट के कंटेंट पसंद आते हो तो मदद स्वरुप आप इस साईट को प्रति दिन ना केवल खुद ज्यादा से ज्यादा विजिट करे वरन अपने सम्पर्कियों को भी इस साईट के बारे में अवश्य बताएं .....धन्यवाद ।

अब आप भी ज्वाइन करे मेमोरी म्यूजियम