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वाराणसी धाम | Varanasi dham


varanasi-dham

हिन्दु धर्म में वाराणसी/बनारस का अत्यन्त पवित्र स्थान है यह भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित है। वाराणसी का प्राचीन नाम काशी है जो विश्व के प्राचीनतम नगरों में माना जाता है। यह भगवान शिव-पार्वती की नगरी है तथा वाराणसी का हिन्दु धर्म ग्रन्थों, पुराणों में बहुत ही उल्लेख हुआ है। इस नगर में हिन्दुओं की पवित्र पावन गंगा नदी बहती है तथा इसके घाट पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। हिन्दुओं के 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक भगवान भोलेनाथ का विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मन्दिर यही पर स्थित है वैसे तो यहां पर पूरे वर्ष ही शिव भक्तों का तांता लगा रहता है परन्तु महाशिव रात्रि एवं पूरे सावन भर बनारस में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ता है तथा वाराणसी का कोना-कोना हर-हर महादेव, बम-बम भोले के नाद से गूँजने लगता है।

वाराणसी विश्व में ज्योतिष, संस्कृत, योग और आर्युवेद के अध्ययन का प्रमुख केन्द्र है। वाराणसी में चार विश्वविद्यालय स्थित है इसमें B.H.U. अर्थात बनारस हिन्दु विश्व विद्यालय का नाम पूरे देश में प्रसिद्ध है। वाराणसी अपनी विशिष्ट साड़ियों एवं ज़री के काम के लिये भी जग प्रसिद्ध है। वाराणसी की सभ्यता अति प्राचीन है, प्राचीन समय से भारतीय शास्त्रीय संगीत का जाना-माना घराना बनारस से ही है। भारत के विश्व प्रसिद्ध अनेकों दार्शनिक, कवि, लेखक, साहित्यकार, संगीतकार, बनारस से ही निकले है। इसमें प्रसिद्ध शहनाईवादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ, प्रसिद्ध बांसुरीवादक पंड़ित हरि प्रसाद चैरसिया तथा विख्यात गायिका गिरजा देवी आदि प्रमुख है। हिन्दु धर्म के प्रसिद्ध ग्रन्थ रामचरित्र मानस की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने यहीं से की थी।

वाराणसी के बारे में कहते है कि माँ अन्नपूर्णा के आशीर्वाद से शहर की सीमा रेखा के अन्दर कोई भी व्यक्ति भूखा नही सो सकता है। यहां पर मृत्यूजंय महादेव मन्दिर, काल भैरवी