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Kalash One Image शिव पूजा में रखे ध्यान Kalash One Image
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Kalash One Image शिव पूजा में विशेष Kalash One Image
Kalash One Image Shiv puja me vishesh Kalash One Image


भगवान भोलेनाथ बहुत ही भोले है जो अपने भक्तो की थोड़ी सी भी सच्ची भक्ति से प्रसन्न हो जाते है । शास्त्रों में कई वस्तुएं / पदार्थ ऐसे कहे गए है जिन्हे भगवान शंकर पर नहीं चढ़ाने चाहिए।
यहाँ पर हम कुछ विशेष बातो को बता रहे है जिनका शिव पूजा में अवश्य ही ध्यान रखना चाहिए।
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om-logo भगवान शिव को हल्दी नहीं चढ़ानी चाहिए इसका कारण यह है शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है और हल्दी स्त्रियोचित वस्तु है। स्त्रियोचित यानी स्त्रियों संबंधित। इसी वजह से शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ाई जाती है।

om-logo वैसे तो शँख को हिन्दु धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है परन्तु भगवान शिव को शंख से जल चढ़ाना वर्जित कहा गया है और इनकी पूजा में शँख को बजाया भी नहीं जाता है ।

om-logo अपने सुहाग की दीर्घायु / अच्छे स्वास्थ्य के लिए विवाहित स्त्रियां अपने माथे पर सिंदूर लगाती है, और सौभाग्य के लिए गौरी माँ को सिंदूर अर्पित करती है लेकिन भगवान शिव पर सिंदूर /कुमकुम नहीं चढ़ाया जाता है।

om-logo शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव का केतकी के फूल को श्राप है कि उनकी पूजा / उनके शिवलिंग पर कभी केतकी के फूल को अर्पित नहीं किया जाएगा। इसीलिए शिवलिंग पर कभी भी केतकी के फूल नहीं चढ़ाये जाते है अर्थात भगवान शिव को केतकी के फूल अर्पित करना अशुभ माना जाता है।

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om-logo भगवान शिव को पूजा में सफ़ेद फूल चढ़ाये जाते है ।

om-logo भगवान शिव की पूजा में शिवलिंग पर लोहे / स्टील के बर्तन से जल नहीं चढ़ाना चाहिए उनको सदैव ताम्बे अथवा अष्ट धातु के बर्तन / लोटे से ही जल चढ़ाना चाहिए।

om-logo कभी भी शिवलिंग पर ताम्बे के बर्तन से दूध नहीं चढ़ाना चाहिए ।


om-logo भगवान शिव की पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए इनकी मात्र आधी परिक्रमा करने का ही शास्त्रों में विधान है । भगवान शिव की परिक्रमा करते समय अभिषेक की धार को लाँघना नहीं चाहिए ।

om-logoशिवपुराण के अनुसार तुलसी का पूर्व जन्म में नाम वृंदा था और मजबूत पतिधर्म की वजह से उसके पति अत्याचारी असुर जालंधर को कोई भी देव हरा नहीं सकता था। भगवान विष्णु तुलसी के पतिव्रत को खंडित करने के लिए जालंधर के वेष में तुलसी के पास पहुंच गए, जिससे तुलसी का पतिधर्म टूट गया एवं भगवान भोलेनाथ ने असुर जालंधर का संहार कर दिया।

तब वृंदा ने भगवान विष्णु को श्राप दे दिया लेकिन माँ लक्ष्मी और समस्त देवताओं की प्रार्थना के कारण उन्हें श्राप से मुक्त भी कर दिया तब भगवान विष्णु ने वृंदा को तुलसी के रूप में प्रतिष्ठित किया और यह कहा की उनकी पूजा बिना तुलसी के पूर्ण नहीं होगी लेकिन तुलसी ने भगवान शिव के द्वारा अपने पति असुर जालंधर का वध करने के कारण भगवान शिव को अपने दिव्य, अलौकिक गुणों वाले पत्तों से वंचित कर दिया इसी लिए भगवान शिव पर तुलसी कभी भी नहीं चढ़ाई जाती है ।



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No Tips !!!!


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