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सावन में सोलह श्रंगार

Sawan Me Solah Shringar


सावन में सोलह श्रंगार


5 . मांग टीका – मांग के बीचों बीच पहना जाने वाला यह आभूषण वधू , किसी भी स्त्री की सुन्दरता में चार चाँद लगा देता है। वैसे तो यह चांदी से बना होता है लेकिन अब ये सोने, कुंदन और पोल्की में भी आने लगा है। इसे विवाहित स्त्री करवा चौथ के दिन अवश्य पहनती है ।

6 . नथ – विवाह के अवसर पर दुल्हन को पवित्र अग्नि के चारों ओर सात फेरे लेने के बाद में देवी पार्वती के सम्मान में नाक में नथ पहनाई जाती है। इससे दुल्हन के श्रंगार में चार चाँद लग जाते है। इसे शादी के दिन नाक में बाई तरफ पहना जाता है, जिसका लूप सोने से बना होता है ,बाद में विवाहित स्त्रियां इसे उतार कर सोने या हीरे की पिन पहन लेती है लेकिन करवा चौथ के दिन स्त्रियां अपनी शादी की नथ या लूप वाली नथ ही पहनती है ।

7. हार – सोने, मोती, डायमंड, पोल्की या कुंदन के बने खूबसूरत हार दुल्हन , किसी भी स्त्री के गले को और भी ज्यादा खूबसूरत बना देते हैं। गले में पहना जाने वाला सोने या मोतियों का हार पति के प्रति सुहागन स्त्री के वचन बध्दता का प्रतीक माना जाता है। विवाह की बेदी पर वधू के गले में वर द्वारा पहनाया गया मंगलसूत्र उसके विवाहित होने की निशानी कहलाता है । कहते है जो स्त्री नित्य मंगलसूत्र धारण किये रहती है उसका पति सदैव उससे प्रेम करता है, उसके घर में कलह नहीं होती है ।

8 . कर्ण फूल, झुमका – गले में हार के बाद कानो में झुमके / बालियाँ सभी स्त्रियों को पहनना बहुत ही पसंद है। वहीं, इनके बिना कोई भी दुल्हन पूरी हो ही नही सकती है। सामान्यता कोई भी भारतीय स्त्री बिना कानो में बालियाँ पहने ढूंढने से भी नज़र नहीं आएगी । यह स्त्रियों का अनिवार्य श्रंगार माना जाता है ।

9 . कंगन और चूडिय़ाँ – किसी भी दुल्हन, सौभाग्यवती स्त्री के श्रंगार में कंगन , चूड़ियों का बहुत ही प्रमुख स्थान है । शादी के समय हिन्दु दुल्हनें अपने हाथों में लाल चूड़िया या फिर चूड़ा पहनती है वहीं महाराष्ट्र की दुल्हनें हरी चूड़ियां धारण करती हैं।

हिन्दू परिवारों में सदियों से यह परम्परा चली आ रही है कि सास अपनी बडी बहू को सुखी और सौभाग्यवती बने रहने के आशीर्वाद के साथ मुंह दिखाई की रस्म में वही कंगन देती है, जो पहली बार उसकी सास ने उसके ससुराल आने पर दिए थे। शास्त्रों के अनुसार सुहागिन स्त्रियों की कलाइयां चूडिय़ों से भरी रहनी चाहिए। मान्यता है कि जो पति अपनी पत्नी के हाथों में सोने की चूड़ियाँ धारण कराता है उस परिवार में धन धान्य की कभी भी कमी नहीं होती है ।कलाइयों में कांच, लाख की चूड़ियां भी बहुत खूबसूरत लगती है ।

10 . बाजूबन्द – बाजुओं में पहने जाने वाला कड़े के समान आकृति वाला यह आभूषण सोने या चाँदी का होता है। ये गहना चूड़ी की ही तरह होता है जो बांहो में पूरी तरह कसा रहता है, इसी कारण इसे बाजूबन्द कहा जाता है। इसे मुगल और राजस्थान की स्त्रियों ने पहनना शुरू किया, उसके बाद ये हर तरफ पहने जाने लगा है । वर्तमान समय में बढ़ती महंगाई , सोने के बढ़ते दामो की वजह से बहुत कम ही चलन में रह गया है। बाजूबंद को सम्पन्नता की निशानी माना जाता है।




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पं मुक्ति नारायण पाण्डेय
( कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )


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