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om सावन माह का मह्त्व om

om Sawan Maah Ka Mahatva om


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om सावन माह का मह्त्व om

omSawan Maah Ka Mahatva om


हिंदू कैलेंडर में सावन का महीना पाँचवे स्थान पर आता है और बहुत पवित्र माना जाता है। सावन मास ( Savan Maas ) भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना है ।

Kalash One Image स्कन्दपुराण के अनुसार सावन माह ( Savan Maah ) में भगवान आशुतोष की पूजा करने, अभिषेक करने, उपवास करने से मनुष्यों के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं, उन्हें पुनर्जन्म से मुक्ति मिलती है, उनके रोग-शोक, दुःख दरिद्र सभी नष्ट हो जाते हैं ।

Kalash One Image माना जाता है कि पिता दक्ष द्वारा अपने पति का अपमान होता देख सती ने आत्मदाह कर लिया था फिर पार्वती के रूप में हिमालय राज के यहाँ जन्म लिया । शास्त्रों के अनुसार पार्वती देवी ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए सावन माह में ही कठोर तप किया था, जिससे प्रसन्न होकर भगवान भोले शंकर ने उन्हें अपना जीवन संगनी बनाया था इसलिए यह माह उन्हें विशेष प्रिय है। विवाह योग्य जातक विशेषकर कन्याएं इस माह योग्य जीवन साथी के लिए भगवान शिव का ब्रत, पूजा, अभिषेक अवश्य करती है ।

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Kalash One Image कहते है कि भगवान शिव सावन के महीने में पृथ्वी पर अवतरित होकर अपनी ससुराल गए थे और वहां पर उनका स्वागत भव्य रूप से अभिषेक द्वारा किया गया था, इसलिए भी यह माह शिवजी को विशेष रूप से प्रिय है। तभी से माना जाता है किभगवान शिव प्रत्येक वर्ष सावन माह में अपनी ससुराल आते हैं और सभी मनुष्यो के लिए भगवान शिव की कृपा पाने का यह स्वर्णिम अवसर होता है।

Kalash One Image एक अन्य कथा के अनुसार, मरकंडू ऋषि के पुत्र मारकण्डेय ने अपनी अकाल मृत्यु से बचने और लंबी आयु के लिए सावन माह में ही घोर तप कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था, जिससे वजह से मृत्यु के देवता यमराज को भी उनके प्राण छोड़ने पड़े थे। अपने भक्त की इस घोर तपस्या के कारण भी सावन माह शंकर जी को विशेष रूप से प्रिय है।

Kalash One Image शास्त्रों के अनुसार भगवान भोलेनाथ अपने भक्तो पर बहुत ही आसानी प्रसन्न हो जाते है, प्रभु भोलेनाथ की जिस पर कृपा हो जाये उसके सभी संकट दूर हो जाते है, उसकी समस्त मनोकामनाएँ अवश्य ही पूर्ण होती है । सावन में भगवान शिवजी को प्रसन्न करने के लिए उनके भक्तो को उनका पूर्ण श्रद्धा से अभिषेक अवश्य ही करना चाहिए ।

Kalash One Image पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी मास में समुद्र मंथन हुआ था। समुद्र मथने में जो विष निकला उसे भगवान शंकर ने ग्रहण कर सृष्टि की रक्षा की और विषपान से महादेव का कंठ नीला हो गया। इसी से उनका नाम नीलकंठ महादेव पड़ा है। विष का पान करने से भगवान शिव के शरीर का तापमान तेज गति से बढ़ने लगा था।

Kalash One Image विष के प्रभाव को दूर करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया, देवराज इन्द्र ने भी अपने तेज से मूसलाधार बारिश कर दी। इस वजह से सावन के महीने में सर्वाधिक वर्षा होती है, जिससे भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। इसलिए श्रावण मास में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से विशेष फल प्राप्त होता है।

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'शिवपुराण' में लिखा भी है कि भगवान भोलेनाथ स्वयं ही जल हैं, इसलिए इसमें कोई भी संशय नहीं है की जल द्वारा शिवजी का अभिषेक उनकी कृपा प्राप्त करने के सर्वोत्तम मार्ग है।

भगवान शिव महादेव है अत: वह सभी देव, दानव, यक्ष, किन्नर, नाग, मनुष्य, द्वारा पूजे जाते हैं ।

Kalash One Image भगवान शिव की पूजा में रुद्राभिषेक का अत्यंत महत्व है। वैसे अन्य सभी माह में रुद्राभिषेक के लिए मुहूर्त देखना पड़ता है लेकिन सावन मास में प्रत्येक दिन 'रुद्राभिषेक' किया जाना बहुत शुभ माना जाता है। विशेषकर सावन के सोमवार और नाग पञ्चमी के दिन रुद्राभिषेक करने से भक्तो पर भगवान नीलकंठ की असीम कृपा बरसती है, उसके सभी मनोरथ अवश्य ही पूर्ण होते है ।

Kalash One Image भगवानशिव के अभिषेक में भोले शंकर के शिवलिंग को जल, गंगाजल, दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, आँवले के रस,गन्ना के रस आदि से स्नान कराया जाता है, तत्पश्चात सफ़ेद चन्दन से तिलक करके, भस्म चढ़ाते है, भगवान को अखण्डित चावल, काले तिल चढ़ाकर रुद्राक्ष की माला पहनाते है।

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Kalash One Image अभिषेक के बाद बेलपत्र, शमी पत्र, दूर्वा, कमल, ऑक, मदार, कनेर, हरसिंगार आदि के फूल चढ़ाकर भगवान शिवजी को प्रसन्न किया जाता है। इसके साथ ही भाँग, धतूरा, नारियल, विभिन्न फल, मिष्ठान और सफ़ेद / पीले वस्त्र भी महादेव को चढ़ाये जाते है ।

om-logo शिवपुराण के अनुसार सावन ( Savan ) में शिवलिंग को गंगा जल मिले जल से स्नान करा कर उनका अभिषेक करने से जातक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।




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