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Kalash One Imageसावन के सोमवार का महत्व, सावन के सोमवार के व्रत की विधि Kalash One Image


सावन का सोमवार


 सावन का सोमवार 



 देवों के देव महादेव भगवान भोलेनाथ को सावन माह अत्‍यंत प्रिय है। श्रावण या सावन माह का आगमन ज्‍येष्‍ठ - आषाढ़ की भीषण गर्मी मुक्ति दिलाने के लिए होता है। वास्तव में मनुष्‍य, पशु-प‍क्षी ही नहीं वरन गंधर्वों, देवों और किन्‍नर भी सावन माह की प्रतीक्षा करते रहते है। 

 शास्त्रों के अनुसार सावन माह में भगवान श्री विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस समय सृष्टि के संचालन का उत्तरदायित्व भगवान शिव स्वयं ग्रहण करते हैं। अत: सावन माह में प्रधान देवता भगवान शिव को माना जाता हैं। 

 सावन मास में सबसे अधिक वर्षा होती है। सावन मास की महिमा बताते हुए भगवान महादेव कहते है कि मेरे तीनों नेत्रों में दाहिने सूर्य, बांये चन्द्र और मध्य में अग्नि नेत्र है। जब सूर्य कर्क राशि में गोचर करता है, तभी सावन माह की शुरुआत होती है।
सूर्य गर्म है जिससे तपिश मिलती है जबकि चंद्रमा ठंडा है जिससे शीतलता प्राप्त होती है। इसलिए सूर्य के कर्क राशि में आने से खूब वर्षा होने लगती है। इससे जगत के कल्याण के लिए विष को ग्रहण करने वाले भगवान भोलेनाथ को ठंडक व शांति मिलती है।
सावन माह प्रजनन की दृष्टि से भी बहुत अनुकूल है। इसलिए भी भगवान शंकर जी को सावन माह बेहद प्रिय हैं।

 पुराणों में सावन माह में प्रतिदिन भगवान भोलेनाथ की उपासना को अक्षय पुण्यकारी बतलाया गया है। मान्यता है कि यदि कोई व्‍यक्ति किसी भी कारण वश  सावन माह में प्रतिदिन पूजा नहीं कर सकता, तो उसे सावन माह के प्रत्‍येक सोमवार को पूजा व व्रत अवश्‍य ही करना चाहिए।
ऐसी मान्यता है कि कुंवारी कन्या या वर यदि सावन माह के प्रत्येक सोमवार का व्रत रखते हैं तो उन्हें योग्य एवं मनवाँछित जीवनसाथी मिलता है। 

 वैसे तो सोमवार का दिन भगवान शंकर को अत्यंत प्रिय है क्योंकि यही दिन भगवान शिव के मस्‍तक पर स्‍थान पाने वाले चन्‍द्र देव का भी है। अत: सोमवार के दिन भगवान शिव की आराधना अवश्‍य करनी चाहिए। सावन के महीने में शंकर जी के पार्थिव अर्थात् शुद्ध‍ मिट्टी द्वारा निर्मित पिण्‍ड़ी अर्थात शिवलिंग का पूजन परम फलदाई है।


  सोमवार के ब्रत की विधि  



 श्रावण मास के सोमवारों के व्रत बहुत शुभदायी और फलदायी होते हैं। इन व्रतों को करने वाले सभी भक्तों से भगवान शिव बहुत प्रसन्न होते हैं। यह व्रत भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए किये जाते हैं। शनि की दशान्तर्दशा,  साढ़ेसाती या किसी भी ग्रह के दुष्प्रभाव से छुटकारा प्राप्त करने के लिए सावन माह में शंकर जी की आराधना से बढ़कर और कोई भी श्रेष्ठ उपाय नहीं है। 

 सोमवार के व्रत में शंकर जी का पूजन करके एक ही समय भोजन किया जाता है। सोमवार के व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करते हुए  'शिव पंचाक्षर मन्त्र' का अधिक से अधिक जप करना चाहिए।

 जो स्त्री पुरुष सावन के सोमवार का ब्रत रखते है उन्हें प्रात: सूर्योदय से पूर्व गंगा अथवा किसी भी पवित्र नदी या सरोवर में स्‍नान करना चाहिए। अथवा घर पर ही नहाते समय जल में गंगाजल, काले तिल डालकर सभी पवित्र नदियों का स्‍मरण करना चाहिए। 
 
 तत्‍पश्‍चात् सफ़ेद अथवा हलके पीले वस्त्र धारण करके किसी ऐसे मंदिर में जाएँ जहां पर शिवलिंग स्‍थापित हो अन्‍यथा घर पर ही शुद्ध चिकनी मिट्टी द्वारा ‘ऊं भवाय नम:’ का जप करते हुए से प‍ार्थिव शिवलिंग का निर्माण करें, ‘ऊं रुद्राय नम:’ से उस शिवलिंग की प्रतिष्‍ठा करें एवं  ‘ऊं नीलकंठाय नम:’ से प्रभु का आह्वान करें। 

 उसके पश्चात शिवलिंग का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और पिसी चीनी ) से स्‍नान करना कर फिर गंगाजल से पुन: स्नान कराएं । स्‍नान के समय श्रीरुद्राष्‍टकम  अथवा शिवतांडवस्‍तोत्रम का पाठ करते रहना चाहिए।

 स्‍नान के बाद ‘ऊं भीमाय नम:’ कहते हुए शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगा कर उन्हें काले तिल, अक्षत, बेलपत्र, शमीपत्र, मदार, भांग, धतूरा, सफ़ेद पुष्प एवं नैवेद्य अर्पित करके वहाँ पर धूप, दीप, जलाएं। फिर रुद्राक्ष की माला से ‘ऊं नम: शिवाय्’ अथवा 'श्री महामृत्‍युंजय मंत्र; का जाप करें। पूजा के बाद शिवलिंग की कपूर से आरती करके अंत में उन्हें लेटकर दंडवत प्रणाम करें । आरती के पश्चात भोग लगाएं और परिवार में बांटने के पश्चात स्वयं ग्रहण करें।

 श्रावण के सोमवार के दिन संध्‍या के समय श्री शिवमहापुराण की कथा सुनने का बहुत महत्‍व कहा है। उसके बाद ब्राह्मण को भोजन करा कर यथायोग्‍य दक्षिणा देकर विदा करें और फिर स्‍वयं भी फलाहार ग्रहण करना चाहिए। 

 सोमवार के व्रत में केवल एक ही बार नमक रहित भोजन करना चाहिए। रात्रि में भूमि पर कुशा की चटाई आदि बिछाकर शयन करें। घर में बनाए हुए पार्थिव शिवलिंग को अगले दिन किसी पवित्र नदी, सरोवर में ‘ऊं ईशानाय नम:’ अथवा ‘ऊं महादेवाय नम:’ का जाप करते हुए विसर्जित कर देना चाहिए। अन्‍त में भगवान शिव से अपने सभीअपराध एवं भूलो के लिए क्षमा मांगनी चाहिए। 
 
शास्त्रों के अनुसार इस तरह से पूर्ण श्रद्धा एवं विधि‍विधान से सावन के सोमवार के व्रतों को रखने से जातक को अत्यंत शुभ फलो की प्राप्ति होती है उसका दुर्भाग्‍य भी सौभाग्‍य में बदल जाता है उसके पूर्वजो को स्वर्ग में स्थान मिलता है।  इस व्रत को करने से दुर्घटना और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।  वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियों समाप्त होती है।

सावन के सोमवार का व्रत अभीष्‍ट सिद्धि, मन:वांछित फलो, उत्तम परिवार एवं सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला है। 


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Published By : MemoryMuseum
Updated On : 2018-08-06 18:44:28




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