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राशिनुसार रत्न

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राशि के अनुसार भाग्यशाली रत्न धारण करें

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rashi-logo कर्क राशि :- कर्क राशि वालों को मोती धारण करने से बहुत लाभ मिलता है । लेकिन यदि चन्द्रमा शुभ हो तभी मोती धारण करने से लाभ है । मोती कर्क राशि वालो को मन की शांति और धैर्य देता है, इससे स्मरण शक्ति प्रखर होती है। बल, बुद्धि व विद्या बढ़ती है , विवाह में अड़चने दूर होती है ।कर्क राशि वालो को मोती धारण करने से मिठाई, दूध, दही-छाछ, रेस्टोरेन्ट, चाँदी के व्यवसाय, स्टेशनरी में उत्तम लाभ प्राप्त होता है। कर्क राशि वाले यदि मूंगा भी धारण करें तो अत्यंत उत्तम होता है क्योंकि मूंगा कर्क राशि वाले जातको का राजयोग कारक रत्न होता है।

कर्क राशि वालो को कम से कम 4 रत्ती के मोती को चाँदी की अँगूठी में बनवाकर सोमवार के दिन "ऊँ सों सोमाय नमः" मन्त्र का जाप करते हुए दाहिने हाथ की अनामिका उंगली यानी रिंग फिंगर अथवा कनिष्का ऊँगली अर्थात सबसे छोटी में पहनना चाहिए।

rashi-logo मकर और कुंभ :- मकर और कुंभ राशि वाले जातक नीलम रत्न धारण कर सकते हैं, लेकिन इन्हे नीलम धारण करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए । यदि जन्म कुंडली में शनि अच्छा नहीं है तो इन्हे नीलम को धारण नहीं करना चाहिए । नीलम रत्न के बारे में कहा जाता है कि यदि यह रत्न शुभ हो गया तो यह रंक को भी राजा बना सकता है , लेकिन अशुभ होने पर करोड़पति को भी खाक में मिला देता है ।

मकर और कुम्भ राशि वालो को कम से कम 4 रत्ती के नीलम को पंचधातु की अँगूठी में बनवाकर शनिवार के दिन : "ऊँ शं शनैश्चराये नमः " मन्त्र का जाप करते हुए दाहिने हाथ की मध्यमा ऊँगली अर्थात सबसे बीच की उँगली में पहनना चाहिए।

नीलम धारण करने से जातक को धन, सुख समृद्धि, सफलता और प्रसिद्धि मिलती है। मन में अच्छे शुभ विचार आते है। संतान योग्य होती है सन्तान का सुख मिलता है।

rashi-logo धनु व मीन राशि :- धनु व मीन राशि के लिए पुखराज या सुनहला पहनना बहुत लाभदायक होता है। लेकिन यह देख ले कि कुंडली में बृहस्पति अशुभ फल ना दे रहे हो । पुखराज धारण करने से धर्म, बल, बुद्धि, ज्ञान एवं मान-सम्मान में वृद्धि होती है। पुत्र संतान योग्य और आज्ञाकारी होती है । यह राजनिति , न्यायायिक और प्रशासनिक क्षेत्र, अभिनय आदि में शीघ्र सफलता दिलाता है ।

धनु और मीन राशि वालो को कम से कम 5 रत्ती के पुखराज को सोने की अँगूठी में बनवाकर गुरुवार के दिन सुबह : "ऊँ बृं बृहस्पतये नमः" मन्त्र का जाप करते हुए दाहिने हाथ की तर्जनी ऊँगली अर्थात अँगूठे के बगल वाली उँगली में पहनना चाहिए।




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