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रक्षाबंधन
RakshaBandhan


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रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त
Raksha Bandhan Ka Shubh Muhurt


हिन्दू धर्म में रक्षाबंधन ( Raksha Bandhan ) का पर्व बहन-भाई के पवित्र प्रेम के लिए मनाया जाता है । इस दिन बहने अपने भाइयों की कलाई में रक्षा सूत्र / राखी बांधकर उनके कल्याण, उन्नति की कामना करती है और भाई हर हाल में आजीवन अपनी बहन की रक्षा , उसके सुख-सौभाग्य के लिए वचन देते है ।
मान्यता है कि यह रक्षासूत्र भाइयों को इतनी शक्ति देता है कि वह हर परिस्तिथि का मुकाबला करके विजय प्राप्त कर सके, जानिए 2018 का रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त, Raksha Bandhan ka shubh muhurat ।

शास्त्रों के अनुसार बहनो को अपने भाइयों को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को भद्रा रहित शुभ मुहूर्त में राखी बाँधनी चाहिए इसलिए यह जानना अति आवश्यक है कि किस शुभ मुहूर्त में राखी कब बांधी जाए।

hand-logoअगर किसी व्यक्ति को किसी भी परिस्थितिवश भद्रा-काल में ही रक्षा बंधन का कार्य करना हों, तो भद्रा के मुख को छोड्कर भद्रा के पुच्छ काल में रक्षा - बंधन का कार्य किया जा सकता है ।
शास्त्रों के अनुसार में भद्रा के पुच्छ काल में कार्य करने से कोई भी हानि नहीं होती है कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है, परन्तु भद्रा के पुच्छ काल समय का प्रयोग शुभ कार्यों के लिये विशेष परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए।

hand-logo रक्षाबंधन का पर्व सावन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है । इस बार वर्ष 2018 में सावन माह की पूर्णिमा तिथि 25 अगस्त से ही शुरू हो जाएगी लेकिन रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि में मनाया जाएगा इसलिए इस साल 2018 में रक्षाबंधन का पर्व 26 अगस्त को मनेगा ।

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 2018


राखी बांधने का शुभ मुहूर्त : सुबह 05:59 से शाम 05:25 तक


kalash आखिर क्यों नहीं बाँधी जाती है भद्रा में राखी :-

hand-logo शास्त्रों में भद्रा को अति उत्पाती माना गया है, भद्रा का स्वभाव उग्र कहा गया है। उनके स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ही परम पिता भगवान ब्रह्मा ने उन्हें पंचाग के एक प्रमुख अंग विष्टी करण में स्थान दिया है।
शास्त्रों के अनुसार जब भद्रा किसी पर्व काल में स्पर्श करती है तो जब तक वह रहती है उसे श्रद्धावास माना जाता है। और उस काल में बुद्दिमान व्यक्ति कोई भी शुभ कार्य नहीं करते है ।

hand-logo रावण बहुत ज्ञानी था लेकिन उससे भी एक ग़लती हो गयी थी कहते है कि रावण की बहन स्रूपनखा ने अपने भाई रावण को भद्रा काल में राखी बांधी थी, जिसके कारण परम शक्तिशाली होने पर भी रावण का वंश सहित विनाश हो गया था । इस कारण भद्रा के समय में राखी बांधने को मना किया जाता है।

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