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पितरों के महादान


Pitron Ke Maha Daan


पितृपक्ष, अमावस्या , बरसी पर दस दान महादान माने गए हैं ।


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hand logo 6. चाँदी का दान : श्राद्ध में चाँदी के दान का बहुत ज्यादा महत्त्व है पुराणों में लिखा है कि पितरों का निवास चन्द्र के ऊपरी भाग में है। शास्त्रों के अनुसार पितरों को चांदी की वस्तुएं अति प्रिय हैं। चांदी, चावल, दूध के दान से से पितर बहुत खुश होते हैं। इन वस्तुओं के दान से न केवल वंश की वृद्धि होती है वरन मनुष्य की सभी इच्छाएँ भी अवश्य ही पूर्ण होती है।

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7. भूमि दान : श्राद्ध पक्ष Shradh Paksh में किसी भी गरीब व्यक्ति को भूमि का दान, व्यक्ति को स्थाई संपत्ति और अतुल वैभव देता है। महाभारत में कहा गया है कि भूलवश बड़े से बड़ा पाप हो जाने पर भूमि दान करने से व्यक्ति को पाप से मुक्ति मिल जाती है। भूमि दान से दानकर्ता को अक्षय पुण्य मिलता है। ऐसा माना जाता है की कि पितरों के निमित्त भूमि दान करने से पितरों को पितर लोक में रहने के लिए उचित स्थान मिलता है। अगर भूमि का दान संभव न हो तो इसके स्थान पर मिट्टी के कुछ टुकड़े उचित दक्षिणा के साथ किसी बर्तन/ थाली में रखकर किसी भी योग्य ब्राह्मण को दान दिया जा सकता है । श्रद्धापूर्वक मिट्टी का दान करने से भी पितर संतुष्ट हो जाते हैं। भूमि दान से यश, मान-सम्मान एवं स्थायी संपत्ति में वृद्धि होती है।

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8.गुड़ का दान: गुड़ के दान से हमारे पितृ अति शीघ्र प्रसन्न होते है । इस दान से व्यक्ति को धन , सुख संपत्ति की प्राप्ति होती है ।




9. गौ दान :गौ दान तो हमेशा से ही सभी दानों में श्रेष्ठ माना जाता है। लेकिन श्राद्ध पक्ष Shradh Paksh में किया गया गौ दान हर सुख और ऐश्वर्य प्रदान करने वाला माना गया है। गरूड़ पुराण में कहा गया है कि मृत्यु के समय जो व्यक्ति गाय की पूंछ पकड़कर गौ दान करते हैं उन्हें मृत्यु के बाद वैतरणी नदी पार करने में कोई भी परेशानी नहीं होती है। वैतरणी नदी यमलोक के रास्ते में पड़ती है जिसमें भयानक जीव-जन्तु निवास करते हैं जो पापी व्यक्ति को घोर पीड़ा देते हैं। इसीलिए पितृ पक्ष Pitra Paksh में गाय का दान करने से पितर बहुत ही प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को हर्दय से आशीर्वाद देते हैं। अगर आप गौ दान करने में असमर्थ हो तो अपनी यथाशक्ति उसके स्थान में धन का दान दे सकते है ।

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10. नमक का दान: पितरों की प्रसन्नता के लिए नमक के दान का बहुत महत्व है। इस दान के पहले ब्राह्मण देवता में अपने पितरों की छवि देखते हुए उन्हें पूर्ण श्रद्धा और स्नेह से भोजन कराएं और उसके बाद उन्हें दान दे कर उनका आशीर्वाद लेकर उनकी संतुष्टि की प्रार्थना करते हुए उनसे अपने जाने अनजाने में किये गए किसी भी अपराध के लिए क्षमा मांगे।

इनके अतिरिक्त आप अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य से अपने पित्तरों के पसंद के फल, बिस्तर, छाता, चप्पल, पंखा, मट्टी का घड़ा आदि का दान भी किसी योग्य ब्राह्मण को कर सकते है। याद रहे पितरों के निमित किया जाने वाला दान केवल ब्राहमण को ही देना चाहिए क्योंकि उन्हें ब्रह्मा का अंश माना जाता है और उन्ही को दी गयी वस्तुओं का ही पुण्य प्राप्त होता है।आप किसी गरीब असहाय की मदद तो कर सकते है वह भी बहुत ही उत्तम है लेकिन पितरों का दान सदैव योग्य ब्राह्मण को ही दें किसी और को नहीं। पितृ पक्ष,अमावस्या और अपने दिवंगत परिजनों की बरसी को ब्राह्मण को अपने पितरों का प्रिय भोजन पूर्ण श्रद्धा और आदर देते हुए अवश्य कराएँ इससे आप और आपके परिवार पर आपके पित्तरों की सदैव कृपा द्रष्टि अवश्य ही बनी रहेगी।

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