Memory Alexa Hindi

पितरों का श्राद्ध कर्म

Pitron Ka Shardh

पसीने की बदबू के उपाय

क्या आपको अपने पूर्वजों के प्रति अपने कर्तव्यो का ज्ञान हैं और उनके प्रति आदर, श्रद्धा एवं कृतज्ञता का भाव वयक्त करना चाहते हैं, उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते है ? अब, विश्व में पहली बार एक साइट के माध्यम से उनके नाम और यादों को हमेशा के लिये अमर बनाइये। अपने जीवन में निश्चित बदलाव का अनुभव कीजिए


पितरों का श्राद्ध कर्म

Pitron Ka Shradh Karm

Pitra Dosh Hindi Image

पितरों का श्राद्ध कर्म


Pitron Ka Shradh Karm

hand logo हिन्दू धर्म शास्त्र में कहा गया भी गया है कि जो मनुष्य श्राद्ध Shradh करता है वह पित्तरों के आशीर्वाद से आयु, पुत्र, यश, बल, वैभव, सुख तथा धन-धान्य प्राप्त करता है। इसीलिये हिन्दू लोग अश्विन माह के कृष्ण पक्ष में प्रतिदिन नियमपूर्वक स्नान करके पित्तरों का तर्पण Pitron Ka Tarpan करते है तथा जो दिन उनके पिता की मृत्यु का होता है उस दिन अपनी शक्ति के अनुसार दान एवं ब्राहमणों को भोजन कराते है। पहले समय में इस देश में श्राद्ध कर्म Shradh Karm का बहुत प्रचार था लोग अपने कर्त्तव्य पालन के लिये सुध-बुध भूल जाते थे, लोग सम्पूर्ण पितृ पक्ष Pitra Paksh में दाढ़ी, बाल नहीं बनाते थे, तेल नहीं लगाते थे, किसी प्रकार का नशा नहीं करते थे तथा पित्तरों को पुण्य प्रदान करने के लिये सत्कर्म, दान, पुण्य, पूजा-अर्चना में लगे रहते थे।

Tags : पितृ, Pitra, पितृ पक्ष, Pitru paksha, श्राद्ध, Shradh, श्राद्ध पक्ष, Shradh Paksha, पितरों का श्राद्ध, Pitron Ka Shardh, तर्पण, Tarpan, तर्पण विधि, Tarpan Vidhi पितरों का तर्पण, Pitron ka Tarpan, तर्पण का महत्व Tarpan Ka Mahtva, हमारे पितृ, Hamare Pitra, पितृ पूजा, पितर देवता, Pitra Devta, पितृ विसर्जन, Pitra Visarjan, पितृ विसर्जन अमावस्या, Pitra Visarjan Amavasya 2017, पित्र दोष निवारण पूजा, Pitra Dosh Nivaran Puja, पितरों को कैसे प्रसन्न करें, Pitro Ko Kaise Prasan Kare, पितरों का आशीर्वाद कैसे प्राप्त करें, Pitron Ka Ashirwad Kaise Prapt Kare

hand logo पित्तरों का पिण्डदान करने का सबसे बड़ा स्थान गया माना गया है। यह मान्यता है कि गया में पिण्डदान Pind Daan करने से फिर प्रतिवर्ष पिण्डदान की आवश्यकता नहीं रहती है। कहते है कि भगवान श्रीराम ने भी गया आकर फाल्गू नदी के किनारे अपने पिता राजा दशरथ का पिण्डदान किया था।

hand logo इसे "तीर्थों का प्राण" तथा "पाँचवा धाम" भी कहते है। माता के श्राद्ध के लिए काठियावाड़ में 'सिद्धपुर' को अत्यन्त फलदायक माना गया है। इस स्थान को 'मातृगया' के नाम से भी जाना जाता है। गया में पिता का श्राद्ध करने से पितृऋण से तथा सिद्धपुर में माता का श्राद्ध करने से मातृऋण से सदा-सर्वदा के लिए मुक्ति प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त गंगासागर तथा महाराष्ट्र में त्र्यम्बकेश्वर, हरियाणा में पिहोवा, उत्तर प्रदेश में गडगंगा, उत्तराखंड में हरिद्वार भी पितृ दोष Pitradosh के निवारण के लिए श्राद्धकर्म Shardh Karm को करने हेतु उपयुक्त स्थल हैं। इन स्थलों में जाकर वे श्रद्धालु भी पितृ पक्ष Pitra Paksh के श्राद्ध आरंभ कर सकते हैं, जिन्होंने पहले कभी भी श्राद्घ न किया हो।

hand logo श्राद्ध श्रद्धा शब्द से बना है। श्रद्धापूर्वक किये गये कर्म को श्राद्ध Shradh कहते है। पित्तरों का श्राद्ध Pitron Ka Shradh करने से कुछ लाभ है अथवा नहीं इसका उत्तर है कि लाभ है अवश्य है और यह लाभ श्राद्ध करने वाले को अत्यधिक तथा पित्तरों को उसका सूक्ष्म अंश मिलता है जिससे वह अत्यधिक शक्ति, प्रसन्नता एवं सन्तोष का अनुभव करते हैं क्योंकि इस संसार में प्रत्येक जीव या आत्मा किसी ना किसी रूप में विद्यमान अवश्य रहती है। श्राद्ध Shradh के समय पित्तरों के द्वारा जो हमारे ऊपर उपकार हुये है उनका स्मरण करके उनके प्रति अपनी श्रद्धा एवं भावना जरूर व्यक्त करनी चाहिये।

hand logo यह मान्यता है कि पित्तर पक्ष Pitar Paksh में जिस दिन हमारे पित्तरों का श्राद्ध Pitron Ka Shradh होता है वह स्वयं भी वहाँ सूक्ष्म रूप में उपस्थित रहते हैं तथा ब्राहमणों के साथ वायु रूप में भोजन करते है। महाभारत में एक प्रसंग है कि जब भीष्म जी अपने पिता महाराज शान्तनु का पिण्डदान करने लगे तो उनके सम्मुख साक्षात शान्तनु जी के दाहिने हाथ ने प्रकट होकर पिण्ड ग्रहण किया।

hand logo रामायण के अनुसार जब मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम वन में अपने पिता का श्राद्ध Shradh कर रहे थे तब सीता जी ने श्राद्ध Shradh की समस्त सामग्रियां स्वयं अपने हाथ से तैयार की लेकिन जब ब्राहमणों को भोजन करने के लिये आमंत्रित किया गया तो वह कुटी में जल्दी से जा छुपी। बाद में जब भगवान राम ने सीता जी से उनकी परेशानी एवं छुपने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा मैंने उन ब्राहमणों में आपके पिता महाराज दशरथ जी के दर्शन किये है, उनके सम्मुख मैं सदैव आभूषणों से सुशोभित रही हूँ वह कैसे मुझे इन कपड़ों में बिना आभूषणों, पसीने मैल से सना हुआ देख पाते।

hand logo इसलिये श्राद्ध Shradh की तिथि में इस बात का भान रहे कि आपके पित्तर किसी ना किसी रूप में स्वयं उपस्थित हैं तथा आपका उनके निमित्त श्रद्धा से किये गये कर्म से वह अवश्य ही संतुष्ट होंगे तथा आपको आशीर्वाद देंगे लेकिन अगर हमने उनके प्रति आभार कृत्तज्ञता एवं श्राद्ध कर्म Shardh Karm नहीं किया तो वह फिर पूरे वर्ष निराशा, बेचैनी, निर्बलता एवं दुख का अनुभव करेंगे। शास्त्रों में भी श्राद्ध कर्म को हर हिन्दू का पुनीत एवं अनिवार्य कर्त्तव्य बताया गया है।



Ad space on memory museum


पितरों का श्राद्ध, पितरों का तर्पण

Pitron Ka Shradh, Pitron Ka Tarpan

पसीने की बदबू के उपाय

दोस्तों क्या आप जानते है की एक साईट ऐसी है जहाँ पर हर पल आप और आपके परिवार को शुभकामनायें और आशीर्वाद प्राप्त होता है ,इस अनोखी साईट के माध्यम से अपने अपने धर्मों के तीर्थों, सिद्ध दुर्लभ यंत्रों और अपने पित्तरों का दिव्य आशीर्वाद लें अपने जीवन में सुख, शांति, सम्रद्धि , मनवांछित सफलता और असीम आत्मबल प्राप्त करें |


पितरों का श्राद्ध, पितरों का तर्पण,

Pitra Dosh Hindi Second Image