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पित्र पक्ष में किन बातों का रखें ध्यान

Pitra Paksh Me kin Baton Ka Rkhen Dhyan

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पित्र पक्ष में किन बातों का रखें ध्यान


Pitra Paksh Me kin Baton ka Rkhen Dhyan


ड्रॉइंग रूम

श्राद्ध Shradh में ब्राह्मण भोजन गजछाया के ( मध्यान का समय ) दौरान किया जाये तो अति उत्तम है ! गजछाया दिन में 12 बजे से 2 बजे के मध्य रहती है । सुबह अथवा 12 बजे से पहले किया गया श्राद्ध पितरों तक कतई नही पहॅंचता है। यह सिर्फ रस्म अदायगी मात्र ही है ।

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hand logo पितृ पक्ष Pitra Paksh में श्राद्ध Shradh, ब्राह्मण भोजन Brahman Bhojan में कुश के आसान का ही प्रयोग करना चाहिए। अतिरिक्त रेशमी, कंबल, ऊन, लकड़ी, तृण, पर्ण, के आसन का भी प्रयोग कर सकते है लेकिन कुश के आसान को पितरों के निमित कर्म करने के लिए सर्वश्रेष्ठ कहा गया है।

hand logo ब्राह्मण को भोजन कराते समय उनसे किसी भी प्रकार की बात या भोजन की प्रशंसा नहीं करनी चाहिए , क्योंकि मान्यताओं के अनुसार हमारे पितृ तब तक ही भोजन स्वीकार करते है जब तक ब्राह्मण देवता मौन रहकर भोजन करते है ।

hand logo यदि श्राद्ध करते समय कोई याचक आ जाये तो उसे कतई भगाना नहीं चाहिए वरन उसे भी आदर पूर्वक श्राद्ध का खाना दे देना चाहिए । कहते है की यदि श्राद्ध कर्म के समय किसी याचक को निराश भेज दिया तो श्राद्ध का फल नहीं मिलता है ।

hand logo श्राद्ध में ब्राह्मण को दान देते समय हाथ में काले तिल, जौ, कुश और पानी को लेकर ही ब्राह्मण को दान सामग्री देनी चाहिए, ताकि दान का सम्पूर्ण फल आपके पितरों के पास पहुँच सके अन्यथा पितरों को दान का पूर्ण फल नहीं मिलता है राक्षस उसमें अपना हिस्सा ले जाते है।

hand logo शास्त्रों के अनुसार कोई भी पूजा बिना पितरों के आशीर्वाद के सफल नहीं होती है ।

hand logo पितृ पक्ष pitra Paksh में तर्पण करते समय श्राद्ध कर्ता के पिता को वसु स्वरूप, दादा को रूद्र स्वरूप और परदादा को आदित्य स्वरूप सम्बोधन करते है । इसी तरह माता को गायत्री रूपा, दादी को रूपा और परदादी को सरस्वती रूपा माना जाता है ।

hand logo ननिहाल पक्ष में नाना को अग्नि स्वरूप, परनाना को वरुण स्वरूप और वृद्ध परनाना को प्रजापति स्वरूप सम्बोधित किया जाता है। इसी तरह नानी को गंगा रूपा , परनानी को यमुना रूपा और वृद्ध परनानी को सरस्वती रूपा माना जाता है ।

hand logo श्राद्ध में प्रतिदिन इस मन्त्र का उच्चारण अवश्य ही करें । इससे पितरों को परम संतुष्टि मिलती है और वह प्रसन्न होकर हमें अपना आशीर्वाद प्रदान करते है ।

hand logo पितरों का अमोघ मंत्र : " ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधादेव्यै स्वाहा॥ "

hand logo श्राद्ध पक्ष में नित्य एक माला "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मन्त्र का जाप अवश्य ही करें ।

hand logo अगर श्राद्ध के दिन श्राद्ध करने वाले का जन्म दिवस हो तो उसे उस दिन श्राद्ध नहीं करना चाहिए ।

hand logo पूरे पितृ पक्ष Pitra paksh में या कम कम श्राद्ध वाले दिन और पितृ अमवस्या Pitra Amavasya के दिन भगवत गीता के सातवें अध्याय का पाठ अवश्य ही करना चाहिए और उसका फल अपने पितरों को अर्पित कर देना चाहिए ।

hand logo श्राद्ध Shradh में सफ़ेद सुगन्धित पुष्पों का उपयोग करना चाहिए , सफ़ेद ना हो तो हलके पीले फूल भी ले सकते है । लाल , काले, नीले फूलो का प्रयोग नहीं करना चाहिए ।

hand logo श्राद्ध करते समय पूजा के समय गंध रहित धूप , अगरबत्ती प्रयोग करे सुगन्धित का नहीं ।

hand logo श्राद्ध Shradh कर्ता को श्राद्ध करते समय तीन बार यहाँ पर बताये हुए मन्त्र का जाप करना चाहिए । यह दिव्य मन्त्र आयु, आरोग्य, धन-समृद्धि और पितरों का आशीर्वाद प्रदान करने वाला है और इस अमृत मन्त्र की रचना स्वयं ब्रह्मा जी ने की थी ।

ब्रह्मा जी का अमोघ मंत्र : "देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिश्च एव च।
                                         नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव भवन्त्युत ।। "
                                                                                   (वायु पुराण) ।।


श्राद्ध कर्म करने से पूर्व दीपक जलाते है और श्राद्ध समाप्त होने के पश्चात जलते हुए दीपक को पलटकर बुझा दिया जाता है ।



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Published By : Memory Museum
Updated On : 2018-09-15 17:10:00 PM
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