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हे ईश्वर आप अपने भक्तो पर सदैव अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखते हुए उनकी समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करे ।नव संवत 2074 सभी के लिए अत्यंत शुभ हो

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Kalash One Imageहिन्दु नव वर्ष Kalash One Image
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Kalash One Image शास्त्रों के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में जिस दिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा हो, उस दिन से नव संवत्सर आरंभ होता है।

चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा के दिन से भारतीय नववर्ष अर्थात हिन्दु नव संवत्सर Hindi nav samvatsar की शुरुआत मानी जाती है । धार्मिक ग्रंथो में इस दिन को बहुत पुण्यदायक , शुभ एवं महत्वपूर्ण माना गया है ।

Kalash One Image ‘चैत्रे मासि जगद ब्रह्मा ससर्ज प्रथमे अहनि,
शुक्ल पक्षे समग्रेतु तदा सूर्योदये सति’
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Kalash One Image ब्रह्म पुराण में लिखे इस श्लोक के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पास के सूर्योदय पर सृष्टि के रचियता भगवान ब्रह्माजी ने इस सृष्टि की रचना की थी और इसी दिन से नव संवतसर प्रारम्भ होता है ।

Kalash One Image चैत्र नवरात्र की प्रतिपदा, 6 अप्रैल शनिवार के दिन विक्रम संवत 2076 का आरंभ हो जाएगा ।

<Kalash One Image वर्ष 2076 के संवत्सर का नाम परिधावी है, यह श्री शालीवाहन शकसंवत 1941 भी है और इस शक संवत का नाम विकारी है।

Kalash One Image शास्त्रों के अनुसार नए वर्ष के प्रथम दिन के स्वामी को उस वर्ष का स्वामी मानते हैं। चूँकि 2019 में हिन्दू नव वर्ष शनिवार के दिन से प्रारम्भ हो रहा है, अतः नए सम्वत् 2076 के स्वामी शनि देव जी होंगे।

Kalash One Image शास्त्रो में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को एक स्वयं सिद्ध अमृत तिथि माना गया है । यह दिन इतना शुभ माना गया है कि शास्त्रो में उल्लेखित है कि यदि इस दिन किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत की जाए या कोई संकल्प लिया जाए तो उसमें अवश्य ही सफलता मिलती है।

Kalash One Image अप्रैल 5, 2019 से 14:21:48 से प्रतिपदा तिथि आरम्भ

Kalash One Image अप्रैल 6, 2019 को 15:24:55 पर प्रतिपदा तिथि समाप्त

Kalash One Image महाराष्ट्र में हिन्दू नववर्ष या नव-सवंत्सर के आरंभ के दिन को गुड़ी पड़वा के रूप में पूर्ण हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है।

Kalash One Image नव संवतसर का बहुत ही धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी है :---

om-logo चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा के दिन ही लगभग एक अरब 97 करोड़ 39 लाख 49 हजार 117 साल पहले भगवान ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि का सृजन किया था।

om-logo शास्त्रो के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का राज्याभिषेक भी इसी शुभ दिन किया गया था ।

om-logo इसी दिन से माँ दुर्गा के श्रद्धा, भक्ति और शक्ति के नौ दिन के नवरात्रो की शुरुआत होती है।

om-logo चैत्र शुक्लपक्ष की प्रतिपदा अर्थात नव संवत्सर के दिन ही सम्राट विक्रमादित्य ने 2076 साल पहले अपना राज्य स्थापित कर विक्रम संवत की शुरुआत की थी।

om-logo नव संवत्सर के दिन ही विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने भी हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में अपना श्रेष्ठ राज्य स्थापित किया था। इसी दिन से शालिवाहन संवत्सर का प्रारंभ भी माना जाता है ।

om-logo सिंध प्रांत के प्रसिद्घ समाज सुधारक और सिंधीयो के पराम् पूजनीय वरुणावतार संत झूलेलाल इसी दिन अवतरित हुए थे ।

om-logo इस शुभ दिन सिख धर्म के द्वितीय गुरु श्री अंगददेव का जन्म दिवस भी माना जाता है।

om-logo शुभ हिन्दु नव संवत्सर के दिन ही समाज को नयी राह दिखाने के लिए प्रसिद्द समाज सुधारक और विचारक स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की थी।

om-logo 5120 वर्ष पूर्व युगाब्द संवत्सर के प्रथम दिन ही युधिष्ठिर का राज्याभिषेक भी हुआ था।

इस वर्ष 2019 में 6 अप्रैल को भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा , विक्रम संवत 2076 (युगाब्द 5120) का प्रारंभ हो रहा है । भारतीय पंचांग और काल निर्धारण का आधार विक्रम संवत् है। जिसकी शुरुआत मध्य प्रदेश में बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में हुई थी। चूँकि यह कैलेंडर राजा विक्रमादित्य के शासन काल से शुरू हुआ था, इसलिए यह विक्रम संवत् के नाम से प्रसिद्ध हैं। हर साल चैत्र नवरात्र के पहले दिन से हिंदू नव वर्ष की शुरुआत होती है।

हिन्दु धर्म शास्त्रो में नव संवत्सर के दिन वर्षफल को सुनना अत्यन्त शुभ माना जाता है । मान्यता है इस दिन वर्षफल सुनने से भाग्य पूरे वर्ष साथ देता है कार्यो में अवरोध नहीं होते है । नव संवत्सर का आवाहन मन्त्र : -

"ॐ भूर्भुवः स्वः संवत्सर अधिपति आवाहयामि पूजयामि च"॥

आवाहन के पश्चात इस मन्त्र को बोलना चाहिए -------

"यश्चेव शुक्ल प्रतिपदा धीमान श्रुणोति वर्षीय फल पवित्रम भवेद धनाढ्यो बहुसश्य भोगो जाह्यश पीडां तनुजाम , च वार्षिकीम"॥

अर्थात जो भी जातक चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन इस पवित्र वर्ष फल को श्रृद्धा पूर्वक सुनता है वह धन धान्य से युक्त होता है । इसी लिए प्राचीन काल से ही इस दिन ब्राह्मण, ज्योतिषी को बुलाकर नव संवत्सर का फल सुनने की परम्परा चली आ रही है ।



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पं० कृष्णकुमार शास्त्री

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