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Diwali Diye नागवंश Diwali Diye
Diwali Diye Nagvansh
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Diwali Diye नागवंश का इतिहास Diwali Diye
Diwali DiyeNagvansh ka Itehas
Diwali Diye

Diwali Diye हिन्दू धर्म में देवताओं की भांति नागो की भी पूजा की जाती है। भगवान विष्णु के ऊपर शेषनाग अपने फैन फैलाये हुए है। हिन्दू धर्म के अलावा जैन, बौद्ध देवताओं के सिर पर भी शेषनाग का छत्र होता है। भारत में नाग नाम की एक प्राचीन प्रजाती भी थी जिसके वंशज आज भी भारत में है।
पुराणों में सर्पमानव के होने का उल्लेख मिलता है। ऐसा माना जाता है की प्राचीन समय में धरती पर लोग आधे मानव और आधे पशु के समान थे। जिस तरह इस देश में सूर्यवंशी, चंद्रवंशी और अग्निवंशी माने गए हैं उसी तरह नागवंशियों की प्रजाति भी रही है। पुराणों में तो नागों के लिए अलग नागलोक को भी बताया गया है।

Diwali Diye कहते है कि महाभारत काल के समय में पूरे भारत वर्ष में नागा जातियों के समूह फैले हुए थे। कैलाश पर्वत के आस पास के इलाकों जैसे असम, मणिपुर, नागालैंड आदि में इनका विशेष प्रभुत्व था। तिब्बती भी अपनी भाषा को 'नागभाषा' कहते हैं। इसलिए बहुत से विद्वान मानते हैं कि नाग जाति हिमालय के उस पार की थी।

Diwali Diye अभिलेखों से पता चलता है कि भारत में लगभग 3000 ईसा पूर्व आर्य काल में नागवंशियों के बहुत से कबीले रहा करते थे, जो सर्पों अर्थात नागदेवता की पूजा करते थे। पुराणों में अग्निपुराण में 80 प्रकार के नाग कुल बताये गए है।
मान्यता है कि नागवंश ऋषि कश्यप से शुरू हुआ था जो कैस्पियन सागर से लेकर कश्मीर तक फैला हुआ था।
महर्षि कश्यप की तेरह पत्नियां थी, लेकिन विनता और कद्रू नामक अपनी दो पत्नियों से वे विशेष प्रेम करते थे।
इनमें कद्रू से 1000 पुत्र जो नाग थे और विनीता से एक पुत्र जो की गरुड़ था उत्पन्न हुए इनमें कद्रू की आठ नाग संताने विशेष प्रसिद्ध हुई।

Diwali Diye 1. अनंत (शेष), 2. वासुकी, 3. तक्षक, 4. कर्कोटक, 5. पद्म, 6. महापद्म, 7. शंख और 8. कुलिक। इसमें अनंतनाग समुदायों का गढ़ कश्मीर का अनंतनाग इलाका था । जिसमें वासुकी, तक्षक, पद्म और महापद्म अधिक प्रसिद्ध हुए।

Diwali Diye शास्त्रों के अनुसार 'शेष नाग' को को नाग वंशावलियों में नागों का प्रथम राजा माना जाता है। शेष नाग को ही 'अनंत' नाग के नाम से भी जाना जाता है। इसी तरह शेष नाग के बाद वासुकी, तक्षक और फिर पिंगला हुए ।
पुराणों में लिखा है कि नाग राज वासुकी का राज्य कैलाश पर्वत के पास ही था और नाग राज तक्षक ने ही तक्षकशिला (तक्षशिला) बसाकर अपने नाम से 'तक्षक' वंश चलाया था।

Diwali Diye भारत में इन्ही उपरोक्त आठों के कुल का ही विस्तार माना जाता है जिनमें - नल, कवर्धा, फणि-नाग, भोगिन, सदाचंद्र, धनधर्मा, भूतनंदि, शिशुनंदि या यशनंदि तनक, तुश्त, ऐरावत, धृतराष्ट्र, अहि, मणिभद्र, अलापत्र, कम्बल, अंशतर, धनंजय, कालिया, सौंफू, दौद्धिया, काली, तखतू, धूमल, फाहल, काना, गुलिका, सरकोटा आदि नाम के नाग वंश हैं।

Diwali Diye आज भी भारत में नाग से संबंधित कई बातें जैसे नाग देवता, नागलोक, नाग मंदिर, नागवंश, ( nagvansh ) नाग कथा, नाग पूजा, नाग मंत्र, नाग देवता का व्रत, नाग कॉमिक्स आदि प्रचलन में है ।
भारत में नाग देवता की पूजा के लिए कई प्राचीन मंदिर भी है। इसमें उज्जैन के महाकालेश्‍वर मंदिर के उपर नागराज का एक मंदिर है जो प्रतिवर्ष सिर्फ और सिर्फ नागपंचमी के दिन ही खुलता है। इसी तरह का एक और रहस्यमयी एवं बहुत मान्यता वाला मंदिर है जो मन्नारसला मंदिर के नाम से प्रसिद्द है।


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