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Nag Panchami नाग पंचमी Nag Panchami


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Nag Panchami Nag Panchami Nag Panchami


27 जुलाई बृहस्पतिवार को नागपंचमी (Nag Panchami) का महत्वपूर्ण पर्व है। पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता (Nag Devta)हैं, कुछ जगह नाग पंचमी 28 जुलाई शुक्रवार को भी मनाई जाएगी । नाग पंचमी (Nag Panchami) का पर्व नागों की पूजा के लिए मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में नागों को देवता मानते हुए उनका पूजन किया जाता है। इस दिन नाग दर्शन का विशेष महत्व है।

साँप सामान्यतया किसी को बिना कारण नहीं काटता है । वह अपने को परेशान करने वाले को या छेड़ने वालों को ही डंसता है। भारत देश एक कृषि प्रधान देश है, हमारे देश की एक बहुत बड़ी जनसँख्या कृषि कार्य में लगी हुई है। सांप हमारे खेतों का रक्षण करता है, वह फसल को नुकसान पहुँचाने वाले जीव-जंतु, चूहे आदि का नाश करके हमारे खेतों की फसल को बचाता है। इसलिए सांपो को क्षेत्रपाल भी कहते हैं। साँप को सुगंध बहुत ही प्रिय है। साँप चंपा के पौधे से लिपटकर रहते है एवं चंदन के वृक्ष उनका निवास स्थान है।

नागपंचमी के दिन धरती को खोदना मना है। इस दिन भगवान शंकर एवं नागों की पूजा में सफेद कमल रखा जाता है।

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नाग पंचमी के दिन (Nag Panchami ke Din) पूजन के लिए सेंवई, चावल आदि ताजा भोजन बनाना चाहिए। लेकिन भारत के कुछ भागों में नागपंचमी (Nag Panchami) से एक दिन भोजन बना कर रख लेते है और नागपंचमी के दिन बासी खाना ही खाया जाता है।
भारत के बहुत से हिस्सो में प्राचीन मान्यताओं के अनुसार लोग नाग पंचमी के दिन (Nag Panchami Ke Din) दीवाल पर गेरू पोतकर उसके ऊपर कच्चे दूध में कोयला घिसकर उससे घर जैसा बनाकर उसमें अनेक नागदेवों की तस्वीर बनाते हैं।
कुछ जगहों पर सोने, चांदी, लकड़ी व मिट्टी की कलम से हल्दी व चंदन की स्याही से या गोबर से घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ पांच फन वाले नागदेवता की तस्वीर को अंकित करके उसे पूजते हैं।


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