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मुग़ल काल में होली

Mugal Kal Me Holi

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Kalash One Image मुग़ल काल में होली Kalash One Image

Kalash One Image Mugal Kaal Me Holi Kalash One Image

 

Kalash One Image भारत में हर युग में होली का बहुत महत्त्व रहा है। मुस्लिम शासको के भारत में आने तक होली का पर्व अत्यंत धूम धाम से मनाया जाता था।

Kalash One Image लेकिन मोहम्मद गौरी द्वारा सन्‌ 1193 में पृथ्वीराज चौहान को हराने के बाद देश में मुस्लिम शासको की सत्ता का शुभारम्भ हो गया । इसके बाद से ही होली का उत्साह ख़त्म होने लगा विशेषकर शहरों से तो हिंदू त्योहारों की रौनक लुप्त होने लगी।
शहरो में तो होली बस नाम की ही थी लेकिन गाँवो में हिंदू अपने इस त्योहार को खुलकर मनाया करते थे। प्रसिद्द मुस्लिम साहित्यकार मलिक मोहम्मद जायसी की किताब में लिखा है की उस समय गांवों में इतना गुलाल उड़ता था कि खेत भी गुलाल के रंग से लाल हो जाते थे।

Kalash One Image लेकिन जब दिल्ली के तख़्त पर अकबर बादशाह बने तो उन्होंने हिंदू त्योहारों से प्रतिबंध हटा दिया। अब सभी लोग हिंदुओं के त्योहारों जैसे होली, दीपावली और दशहरा आदि को उत्साह पूर्वक मनाने लगे। उसमें भी होली को सभी लोग बड़ी धूम धाम से मनाते थे ।

Kalash One Image उस समय भी जैसे ही फाल्गुन का महीना आता था, पूरे माहौल में मस्ती छा जाती थी। लोग ,मस्ती से नाच गा कर होली के फ़ाग गीत गाते थे। बादशाह अकबर भी स्वयं अपने दरबार में ख़ुशी से होली खेलते थे।

Kalash One Image कई इतिहासकारो ने लिखा है की अकबर अपने हिंदू दरबारियों मानसिंह, टोडरमल, तानसेन, भगवंत सिंह आदि के साथ गुलाल अबीर और फूलो के रंगों से तो जम कर होली खेलते ही थे इस अवसर पर आम लोगो के साथ भी रूबरू होते थे। अकबर की हिंदू रानियाँ विशेषकर जोधाबाई भी बादशाह को रंग लगाने के बाद अपनी हिंदू दासियों, महिलाओं के साथ रंगों से होली खेलती थी ।

Kalash One Image इतिहासकार लिखते है कि अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ और बहादुरशाह ज़फर के समय में होली के आगमन से बहुत पहले ही रंगो के इस पर्व की तैयारियाँ प्रारंभ हो जाती थी ।
बादशाह अकबर के समय में होली के अवसर पर महल में सोने चाँदी के बड़े-बड़े बर्तनों में केवड़े और केसर से युक्त टेसू का रंग घोला जाता था और बादशाह सबसे पहले अपनी रानियों के साथ होली खेलते थे। हर तरफ अबीर और गुलाल उड़ता नज़र आता था।

Kalash One Image होली के रंग खेलने के बाद शाम को महल में उम्दा ठंडाई, तरह तरह की मिठाइयों से मेहमानों का स्वागत किया जाता था , उस दिन कव्वालियों, मुशायरे,और नाच -गानों की महफ़िलो से पूरा समां रंगीन हो जाता था ।
बाद मे स्वादिष्ट व्यंजनों की यादगार दावत होती थी।
जहांगीर, शाहजहाँ और बहादुरशाह जफर के समय में भी होली के दिन कुछ इसी प्रकार का माहौल होता था।

Kalash One Image इतिहासकार अलबरूनी ने लिखा है की ,मुगलों के काल में होली बहुत धूमधाम से मनाई जाती थी विशेषकरअकबर का जोधा बाई के साथ तथा जहांगीर का नूरजहां के साथ होली खेलने का अंदाज बहुत ही भव्य बहुत ही शानदार होता था । अलवर संग्रहालय के एक चित्र में जहांगीर को होली खेलते हुए दिखाया गया है।

Kalash One Image जहाँगीर के समय में होली पर महफ़िल-ए-होली का भव्य कार्यक्रम आयोजित होता था। इस अवसर पर राज्य के साधारण नागरिक भी बादशाह के ऊपर रंग डाल सकते थे।

Kalash One Image शाहजहां का होली खेलने का अंदाज बहुत ही जुदा था। इतिहास में लिखा है की कि शाहजहां के समय में होली बहुत जोश ओ खरोश अर्थात धूम धाम से मनाई जाती थी। उस समय होली के कई दिन पहले से ही इस त्योहार कि तैयारी होने लगती थी उस काल में होली को ईद ए-गुलाबी या आब-ए-पासी अर्थात (रंगों की बौछार ) कहा जाता था।

Kalash One Image इस समय होली में गुलाल के साथ साथ गीले रंगो का भी प्रयोग बहुत जोरो से होने लगा था, होली का हुड़दंग होली के कई दिनों पहले से शुरू होकर होली के दिन अपने चरम पर होता था क्या आप क्या खास सभी लोग बहुत जोश से होली खेलकर खुशियाँ मनाते थे ।

Kalash One Image मुगल काल में होली के अवसर पर लाल किले के पीछे यमुना नदी के किनारे आम के बाग में होली के शानदार मेले लगते थे।
मुगल शैली के एक चित्र में औरंगजेब के सेनापति शायस्ता खाँ को भी पूरे जोश के साथ होली खेलते हुए दिखाया गया है। इस चित्र की पृष्ठभूमि में दाहिनी ओर आम के पेड़ हैं जहाँ पर खड़ी महिलाओं के हाथ में पिचकारियाँ हैं और रंग के घड़े भी दिखाई दे रहे हैं।

Kalash One Image अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के बारे में प्रसिद्ध है कि होली पर उनके मंत्री उन्हें रंग लगाने जाया करते थे ।

Kalash One Image होली के इस अवसर पर आम जनता को भी बादशाह के करीब जाने का, उनसे मिलने का अवसर मिलता था।

Kalash One Image 18 वीं शताब्दी में दो प्रमुख चित्रकार निधामन और चतुरमल ने बहादुर शाह जफर के पौत्र मोहम्मद रंगीला के होली खेलते हुए चित्र बनाए थे। यह दुर्लभ चित्र भारतीय इतिहास की धरोहर बन गए है ।

Kalash One Image उस समय के इतिहासकार लिखते है कि मुग़ल काल में औरंगजेब के शासन को छोड़कर लगभग सभी बादशाहो में जम कर होली खेली और इस त्यौहार को बढ़ावा भी दिया ।

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पं मुक्ति नारायण पाण्डेय
( कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )

Published By : Memory Museum
Updated On : 2018-02-24 01:05:55 PM


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