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Kalash One Imageमांगलिक दोष, manglik dosh, Kalash One Image


मांगलिक दोष, manglik dosh,


 मांगलिक दोष, manglik dosh, 



ज्योतिष शास्त्र में मांगलिक दोष को एक बड़ा दोष माना जाता है, मान्यता है कि मांगलिक दोष के कारण जातक के विवाह में अड़चने आती है   इसीलिए  मांगलिक जातक की शादी मांगलिक से ही करना शास्त्र सम्मत माना गया है। 

शास्त्रों  में मंगल ग्रह को पाप ग्रह माना गया है। मंगल को सभी ग्रहो में सेनापति का स्थान प्राप्त है तथा मंगल बहुत ही अनुशासन प्रिय, स्वाभिमानी, और कठोर कहे गए है। मंगल ग्रह को उनकी कठोरता के कारण ही पाप ग्रह माना जाता है। मंगलदेव भूमि पुत्र हैं और यह अपनी माता के परम भक्त हैं। इसी वजह से मंगल ग्रह अपनी माता का सम्मान करने वाले सभी पुत्रों को अच्छे फल प्रदान करते हैं। लेकिन यह भी सही है कि मंगल बुरे लोगो को पाप करने वाले लोगों को बहुत बुरे फल भी प्रदान करते है। 

बहुत से तर्क शास्त्रियों का मानना है की मांगलिक दोष का कोई बुरा प्रभाव नहीं होता है, मांगलिक दोश होता ही नहीं है लेकिन जीवन के सबसे पवित्र सबसे महत्वपूर्ण बंधन दाम्पत्य जीवन के बारे में बिलकुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। 

अगर शास्त्रों में मांगलिक दोष बताया गया है तो उसका निराकण भी है जिससे यह दोष समाप्त हो जाता है बस केवल इस दोष के बारे में जानकारी होनी चाहिए और समय से इसका किसी योग्य पंडित से इसका उपाय अवश्य करवा लेना चाहिए। 


मंगल दोष या मांगलिक दोष को लेकर लोगों में तमाम गलत धारणाएं भी हैं जिससे लोग अक्सर इस दोष के कारण और भी अधिक परेशानी में पड़ जाते है। एक विचारधारा ये भी हे की 28 साल की उम्र के बाद मांगलिक दोष कम हो जाता हे ।


 क्या होता है मांगलिक दोष ? kya hota hai manglik dosh, 



ज्योतिष शास्त्र में मंगल को एक क्रूर ग्रह माना गया है, इसलिए यदि कुंडली में मंगल दोष /मांगलिक दोष हो तो विवाह पर इसके प्रभाव के कारण समस्याएं बढ़ती है। 

 जब कुंडली के लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल हो तो उस कुंडली में मांगलिक दोष होता है। 

 सप्तम भाव से हम दाम्पत्य जीवन का विचार करते हैं। अष्टम भाव से दाम्पत्य जीवन के मांगलीक सुख को देखा जाता है। 

 इनमें से केवल आठवां और बारहवां भाव सामान्‍य तौर पर खराब माना जाता है। 

 मंगल दोष में भी यदि लग्न और अष्टम भाव का मनाग दोष हो तो वह ज्यादा गंभीर माना जाता है। 

 जातक के मांगलिक होने पर विवाह के मामले में अवश्य ही  सावधानी रखनी चाहिए वरना जीवन भर इसके दुष्परिणाम झेलने पड़ सकते है। 

 अगर वर-वधू में से किसी एक की कुंडली मांगलिक है तो उसका उपाय अवश्य ही कराएं अन्यथा दूसरे से सामंजस्य बैठाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। 

 लेकिन यदि  मंगल शुभ, उच्च का या मित्र राशी में बिना किसी क्रूर दृष्टि के या फिर बिना किसी शत्रु गृह के साथ इन घरों में बैठा हो मांगलिक दोष नहीं बनेगा.


  मांगलिक दोष के दुष्प्रभाव :- Manglik dosh ke dushprabhav, 


 मान्यता है कि मांगलिक दोष के दुष्प्रभाव कारण जातक को जीवन में विवाह संबंधी, रक्त संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और उसे भूमि-भवन के सुख में भी अड़चने आती रहती हैं।

 ऐसी भी मान्यता है कि यदि पति-पत्नी में एक मांगलिक है और दूसरा नहीं तो दोनों के बीच में तनाव बना रहता है, हिंसा और अलगाव भी हो सकता है। 

 ऐसी भी मान्यता है कि  मांगलिक दोष के दुष्प्रभाव के कारण यदि वैवाहिक जीवन में एक व्यक्ति मंगली हो और दूसरा नहीं हो तो दूसरे जीवनसाथी की अकाल मृत्यु भी हो सकती है। 

 मांगलिक दोष के दुष्प्रभाव कारण यदि पति-पत्नी में से कोई एक मंगली हो तो दूसरा नहीं तो दूसरे साथी का स्वास्थ्य भी ख़राब रह सकता है। 

 मांगलिक दोष के कारण यदि एक मांगलिक है और दूसरा नहीं तो दाम्पत्य जीवन बुरी तरह से तबाह हो जाता है। 

 मांगलिक दोष के दुष्प्रभाव कारण जातक को जीवन में तमाम अस्थिरताओं एवं दुर्घटनाओं का सामना भी करना पड़ सकता है। 

 मांगलिक दोष के कारण जातक को अपनी संतान से दुख मिलता है, जातक में साहस की कमी रहती है, उसे हमेशा तनाव ही बना रहता है।


 आगे अवश्य ही पढ़िए मांगलिक दोष के उपाय, मांगलिक दोष कैसे दूर करें। 


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Published By : MemoryMuseum
Updated On : 2019-01-06 20:26:56




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