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om मकर संक्रांति om

omMakar Sankrantiom


Makar Sankranti

omमकर संक्रांति का महत्व om

omMakar Sankranti Ka Mahatva om


हमारे देश में हर साल मकर संक्रांति Makar Sankranti का पर्व सूर्य के उत्तरायण होने की खुशी में बहुत ही उमंग व उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन भगवान सूर्य की पूजा करने का विशेष विधान है।
एक वर्ष में 12 संक्रांतियाँ होती है जिसमें छह संक्रांतियाँ उत्तरायण की और छह दक्षिणायन की कहलाती है।
om हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति Makar Sankranti से देवताओं का दिन आरंभ होता है जो कि आषाढ़ मास तक रहता है। इसी दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर संक्रान्ति Makar Sankranti के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारम्भ होती है। तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाते हैं।


Makar Sankranti Gud
om भगवान सूर्य अपनी गति से प्रत्येक वर्ष मेष से मीन 12 राशियों में 360 अंश की परिक्रमा करते है । वह एक राशि में 30 अंश का भोग करके दूसरी राशि में पहुँच जाते है, अर्थात प्रत्येक राशि में एक माह तक रहते है । शास्त्रों के अनुसार सूर्यदेव जा धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते है तो मकर संक्रांति Makar Sankranti मनाई जाती है । हिन्दु पंचाग के अनुसार जब सूर्यदेव सभी 12 राशियों का परिभ्रमण समाप्त कर लेते है तो एक संवत्सर अर्थात एक वर्ष पूर्ण होता है ।

शास्त्रों में काल गणना के अनुसार

hand logo अहोरात्र का एक दिन
hand logo सात दिन का एक सप्ताह
hand logo दो सप्ताह का एक पक्ष पक्ष दो होते है
hand logo शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष इन दोनों को मिलाकर एक मास
hand logo दो मास की एक ऋतु
hand logo तीन ऋतुओं का एक अयन और दो आयनो को एक वर्ष होता है ।
hand logo आयन दो माने जाते है उत्तरायण और दक्षिणायन , ग्रंथों में उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन के समय को देवताओं की रात्रि कहा गया है ।
hand logo इस प्रकार मकर संक्रांति देवताओं का प्रभात काल माना गया है । इस दिन स्नान, दान, जप, तप, श्राद्ध तथा अनुष्ठान आदि का अत्यधिक महत्व है । पुरानी मान्यता है संक्रांति पर किया गया दान साधारण दान से हजार गुना पुण्य प्रदान करता है ।।

hand logo सूर्यदेव के 14 को उत्तरायण की राशि मकर में प्रवेश करने के साथ ही देवताओं के दिन और पितरों की रात्रि का शुभारंभ हो जाएगा। मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति Makar Sankranti के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं। इस लिहाज से मकर संक्रांति Makar Sankranti पिता और पुत्र के मिलन का भी प्रतीक है।

om भारतीय पर्वों में मकर संक्रांति Makar Sankranti एक ऐसा पर्व है जिसको सूर्य की स्थिति के अनुसार मनाया जाता है मकर संक्रांति Makar Sankranti का योग इस बार शुभ सर्वार्थ सिद्धि योग में बन रहा है और इस दिन भगवान सूर्य का दिन रविवार भी है। ऐसे में इस दिन स्नान-दान करने से सहस्त्रो गुना फल मिलेगा।

om मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाता है लेकिन इस वर्ष 2018 में चूँकि सूर्य धनु राशि से मकर राशि में रात्रि 08 बजे प्रवेश करेगे । अतः मकर संक्रांति का पूर्ण काल 15 जनवरी को सूर्य उदय से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा इसी कारण वर्ष 2018 में मकर संस्कृति 15 जनवरी को मनाई जाएगी ।

om मकर संक्रांति Makar Sankranti में पुण्यकाल का विशेष महत्व है। शास्त्रो के अनुसार यदि सूर्य का मकर राशि में प्रवेश सांयकाल या रात्रि में होता है, तो पुण्यकाल अगले दिन माना जाता है।

om इस दिन से शुभ कार्यो का मुहूर्त समय प्रारम्भ हो जाता है। विवाह, मुण्डन, नवीन व्यापारं, ग्रह प्रवेश के लिये लोगो का शुभ मुहूर्त का इन्तजार समाप्त होता है। इस दिन को देवता छ: माह की निद्रा से जागते है। भगवान सूर्य का मकर राशि में प्रवेश एक नयी शुरुआत का दिन होता है।

om भगवान श्रीकृष्ण ने भी मकर संक्रांति का महत्व Makar Sankranti Ka Mahtva बताते हुये गीता में कहा था की जब सूर्य देवता उत्तरायन में होते है, पृथ्वी प्रकाशमय रेहती है तो उस 6 माह के शुभ काल में इस शरीर का परित्याग करने से जीव का पुनर्जन्म नही होता है लेकिन जब सूर्य दक्षिणायन होता है तब पृथ्वी अंधकारमय होती है और इस अंधकार में शरीर का त्याग करे तो उस जीव को पुनर्जन्म लेना पडता है. ( श्लोक २४-२५)

om भागवत पुराण के अनुसार इसी लिए भीष्म पितामह ने तीरो से अपने शरीर के बिंधे होने के बावजूद भी सूर्य के दक्षिणायन होने के कारण अपनी देह का त्याग नहीं किया था और सूर्य के उत्तरायन होने पर ही पितामह भीष्म ने अपना देह त्याग किया था।

om मकर संक्रांति Makar Sankranti से सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध की ओर आना शुरू हो जाता है। इसलिए इस दिन से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। इस दिन से ही मौसम में गर्माहट भी बढ़नी शरू हो जाती है। चूँकि जैसे जैसे दिन बड़ा होगा सूर्य की रोशनी भी अधिक होगी और राते छोटी होने से अंधकार भी कम होता जाता है, इसीलिए शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति Makar Sankranti पर सूर्य की राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना माना जाता है।

hand logo विष्णु धर्मसूत्र में कहा गया है कि मकर संक्रांति के दिन पितरों की आत्मा की शांति, स्वास्थ्यवर्द्धन तथा सबके कल्याण के लिए तिल के छः प्रयोग अत्यंत पुण्यदायक एवं फल प्रदान करने वाले होते हैं।
hand logo मकर संक्रांति के दिन प्रात: स्नान से पहले तिल का उबटन लगाना,
hand logo जल में तिल डालकर उस तिल के जल से स्नान करना,
hand logo इस दिन भगवान सूर्य देव को जल में तिल ड़ालकर अर्घ्य देना, पितरो को जल में तिल अर्पण करना,
hand logo मकर संक्रांति के दिन स्नान, पूजा के बाद तिल का योग्य ब्राह्मण को दान करना,
hand logo इस दिन यज्ञ में घी मिश्रित तिल की आहुति देना, एवं
hand logo मकर संक्रांति के तिल तिल से बना भोजन करना अथवा तिल के पदार्थो का सेवन करना ।
hand logo इससे उस जातक और उसके परिवार पर पितरो और देवताओं दोनों का ही आशीर्वाद बना रहता है, पापो का नाश होता है, पुण्य संचय होता है, उसके पितृ स्वर्ग में वास करते है और अंत में वह जातक को भी मोक्ष प्राप्त होता है।

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ज्योतिषाचार्य डॉ० अमित कुमार द्धिवेदी
कुण्डली, हस्त रेखा, वास्तु एवं प्रश्न कुण्डली विशेषज्ञ



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