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नवरात्र क्यों मनाते है

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नवरात्र क्यों मनाते है

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हे माँ जगतजननी आप अपने भक्तो को सद्बुद्दि प्रदान करें जिससे यह सदैव धर्म के मार्ग पर चले, आप इनके जीवन के सभी अनिष्टों को दूर करें ।

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माँ आदि शक्ति की उपासना का पर्व नवरात्री Navratri वर्ष में दो बार चैत्र माह Chetr maah और अश्विन माह ashwin maah में प्रतिपदा से नवमी तक पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ प्राचीन काल से मनाया जा रहा है। नवरात्री Navratri के नौ दिनों में आदिशक्ति के हर रूप की क्रमशः अलग-अलग पूजा की जाती है।
शास्त्रों के अनुसार सर्वप्रथम श्रीरामचंद्रजी ने शरदीय नवरात्रि पूजा Navratri pooja का प्रारंभ समुद्र तट पर किया था और उसके बाद दसवें दिन उन्होंने अपनी सेना के साथ लंका पर विजय के लिए प्रस्थान किया और अंतत: उन्हें विजय प्राप्त हुई थी।
उसी समय से असत्य पर सत्य की, धर्म पर अधर्म की जीत का पर्व विजयदशमी मनाया जाता है । लेकिन क्या आप जानते है कि नवरात्र क्यों मनाये जाते है ? इन दिनों माँ दुर्गा की शक्ति की उपासना क्यों की जाती है ,
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hand-logoनवरात्री Navratri में विषय में दो कथाएं प्रचलन में है :---

hand-logo पहली कथा के अनुसार लंका युद्ध के समय भगवान ब्रह्माजी ने श्रीराम जी से युद्ध में विजय / रावण-वध के लिए चंडी देवी का पूजन करके देवी को प्रसन्न करने के लिए कहा।
देवी के पूजन के बाद हवन में 108 नीलकमल की आवश्यकता थी,अत: उन्होने विधिनुसार पूजन हवन हेतु दुर्लभ 108 नीलकमल की व्यवस्था भी करा दी।
उसी समय लँकापति रावण ने भी युद्ध में विजय और अमरत्व प्राप्त करने के लिए चंडी पाठ को प्रारंभ कर दिया। यह बात इन्द्रदेव ने पवन के माध्यम से भगवान श्रीराम तक पहुँचवा दी।

hand-logo इधर रावण ने श्रीराम जी की पूजा बाधित करने हेतु मायावी तरीक़े से पूजास्थल पर हवन सामग्री में से एक नीलकमल ग़ायब करा दिया। श्रीराम जो को अपना संकल्प टूटता नज़र आया। सभी के मन में ये भय बैठ गया कि कहीं माँ दुर्गा क्रोधित न हो जाएँ।
तभी श्रीराम को यह याद आया कि उन्हें ..'कमल-नयन नवकंज लोचन'.. भी कहा जाता है अर्थात उनके नेत्रों को कमल की उपमा दी जाती है तो उन्होंने या विचार किया कि क्यों न वे अपना एक नेत्र ही माँ की पूजा में समर्पित कर दें।
तब भगवान श्रीराम ने जैसे ही तूणीर से अपने नेत्र को निकालना चाहा तभी माँ दुर्गा प्रकट हो हुईं और उन्होंने पूजा से प्रसन्न होकर प्रभु राम को युद्ध में विजयश्री का आशीर्वाद दिया।

hand-logo वहीँ दूसरी तरफ़ रावण की पूजा के समय रामभक्त हनुमान जी ब्राह्मण बालक का वेश धारण करके रावण की पूजा में पहुँच गए और उन्होंने पूजा कर रहे ब्राह्मणों से एक श्लोक ..जयादेवी..भूर्तिहरिणी.. में हरिणी के स्थान पर करिणी उच्चारित करा दिया। हरिणी का अर्थ है भक्त की पीड़ा हरने वाली और करिणी का अर्थ होता है पीड़ा प्रदान करने वाली।
अपने मन्त्र के गलत उच्चारण से माँ दुर्गा रावण से नाराज़ हो गईं और उन्होंने रावण को श्राप दे दिया। देवी के क्रोध के कारण रावण का समूल सर्वनाश हो गया।

hand-logo शास्त्रों के अनुसार भगवान राम ने माँ की पूजा आराधना नौ दिनों तक की थी इसीलिए तब से नौ दिन तक माँ की उपासना का पर्व नवरात्र मनाया जाता है।

hand-logo नवरात्रि Navratri की द्वितीय कथा के अनुसार :-

hand-logo प्राचीन काल में दैत्यराज महिषासुर को उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवताओं ने उसे अजेय होने का वरदान दे दिया था। उस वरदान के बाद महिषासुर ने उसका दुरुपयोग करके सभी लोको में अत्याचार करना शुरू कर दिया और उसने नरक का विस्तार स्वर्ग के द्वार तक कर दिया और उसके इस कृत्य को देख देवता अचंभित हो गए ।। महिषासुर ने सूर्य, चन्द्र, इन्द्र, अग्नि, वायु, यम, वरुण और अन्य सभी देवतओं के अधिकार भी छीन लिए और स्वयं स्वर्गलोक का मालिक बन बैठा।

hand-logo देवताओं को महिषासुर के भय के कारण स्वर्ग लोक छोड़कर पृथ्वी पर विचरण करना पड़ रहा था। तब महिषासुर के दुस्साहस से क्रोधित होकर सभी देवताओं ने माँ दुर्गा की रचना की। मान्यता है कि देवी दुर्गा की उत्पत्ति में सारे देवताओं का एक समान बल लगाया गया था।
महिषासुर का वध करने हेतु समस्त देवताओं ने अपने अपने अस्त्र-शस्त्र और शक्तियाँ माँ दुर्गा को समर्पित कर दी जिससे माँ आदि शक्ति उत्पन्न हुई ।
देवताओं ऋषियों, और सभी मनुष्यों के कल्याण हेतु माँ ने नौ दिनों तक महिषासुर से संग्राम किया और अन्त में महिषासुर का वध करके माँ दुर्गा महिषासुरमर्दिनी कहलाईं। इसी कारण सत्य की असत्य पर विजय हेतु, नवरात्रों में माँ दुर्गा की, नौ देवियों की, ,माँ शक्ति की आराधना की जाती है और नौंवे दिन नौ कन्‍याओं की पूजा कर उनका आदर-सत्‍कार कर उन्‍हें जिमाया कर उनका आशीर्वाद ग्रहण किया जाता है।

hand-logo नवरात्रि साल में दो बार मनाया जाने वाला इकलौता उत्सव है- एक नवरात्रि गर्मी की शुरुआत पर चैत्र में और दूसरा शीत की शुरुआत पर आश्विन माह में।
मान्यता है जो जातक वर्ष में दो बार पड़ने वाले नवरात्रो का ब्रत रखते है अथवा इन नौ दिनों में शास्त्रों द्वारा बताये गए नियमो का पालन करते है उन पर माँ दुर्गा की कृपा बनी रहती है, उनके सभी कार्य सिद्ध होते है, वह इस लोक में सभी सुखो का भोग करते हुए अंत में स्वर्ग को प्रस्थान करते है ।



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पं मुक्ति नारायण पाण्डेय
( कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )









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