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Kalash One Imageनवरात्री में कन्या पूजन, navratri me kanya pujan Kalash One Image


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 नवरात्री में कन्या पूजन 

 navratri me kanya pujan 


 नवरात्री के पूरे 9 दिन शक्ति के, बहुत ही सिद्द एवं पुण्य प्रदान करने वाला समय माना गया है। मान्यता है कि नवरात्री के पूरे नौ दिन माँ दुर्गा पृथ्वी पर नन्ही कंजको / कन्याओं का रूप धारण करके भ्रमण करती है और अपने सच्चे भक्तो के सभी संकटो को दूर करती है।

 वास्तव में नवरात्री  का पर्व माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने, अपनी समस्त अभिलाषाओं को पूर्ण करने का स्वर्णिम अवसर होता है, माता के भक्तो को यह विशेष अवसर नवरात्री में कन्या पूजन, navratri me kanya pujan के माध्यम से प्राप्त होता है। 

 शास्त्रों के अनुसार बहुत ही सौभाग्यशाली होते है वह लोग जो अपने घर में हर्ष एवं पूरे आदर से नवरात्री में कन्या पूजन, navratri me kanya pujan करते है। जिस घर में नवरात्री के  दिनों में या नवरात्री की अष्टमी अथवा नवमी के दिन कंजको का पूजन, kanjako ka pujan होता है उन्हें जीवन में किसी भी चीज़ का भय नहीं होता है उनके घर कारोबार में माँ अम्बे की असीम कृपा बनी रहती है। 

 देवी पुराण में लिखा है कि, इन्द्र ने एक बार ब्रह्मा जी से देवी दुर्गा को प्रसन्न करने की विधि पूछी तो ब्रह्मा जी ने माँ दुर्गा को प्रसन्न करने की सर्वोत्तम विधि कन्या पूजन  kanya pujanको ही बताया, और कहा कि माँ दुर्गा जप, ध्यान, पूजन और हवन से भी उतनी प्रसन्न नहीं होती जितना सिर्फ कन्या पूजन से हो जाती हैं।

 नवरात्री में कन्या पूजन, navratri me kanya pujan से सभी तरह के वास्तु दोष,विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश होता है। 

 एक मान्यता यह भी चली आ रही है कि माँ दुर्गा के परम भक्त पंडित श्रीधर के कोई संतान नहीं थी। उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए माँ दुर्गा को प्रसन्न करने हेतु नवरात्र के बाद कन्या पूजन, kanya pujanके लिए नौ कन्याओं को पूजन के लिए घर पर बुलवाया। मां दुर्गा भी उन्हीं कन्याओं के बीच बालरूप धारण कर बैठ गई।

 कन्या के रूप में आईं मां अपने भक्त श्रीधर से बोलीं सभी को भंडारे का निमंत्रण दे दो। श्रीधर से बालरूप कन्या की बात मानकर आसपास के गांवों में भंडारे का निमंत्रण दे दिया। इसके बाद देवी माँ की कृपा से उन्हें संतान सुख मिला। 

 नवरात्रि में कन्या पूजन में ध्यान रखे कि कन्याओ की उम्र दो वर्ष से कम और दस वर्ष से ज्यादा भी न हो । 


 नवरात्री में कन्याओं का पूजन कैसे करें 

 Navratri me kanyaon ka pujan kaise karen 


 नवरात्रे की अष्टमी या नवमी के दिन जिस दिन आप कन्या खिलाएं / पूजन करें उस दिन  दस साल से कम उम्र की नौ कन्याओं और एक लडके को पूर्ण श्रद्धा एवं प्रेम से भोजन करा कर यथा शक्ति उन्हें दक्षिणा और उपहार भी अवश्य ही देना चाहिए।  अगर आप घर पर हवन कर रहे है तो उनके नन्हे नन्हे हाथों से हवन सामग्री अग्नि में अवश्य डलवाएं। 

 कन्या पूजन में एक दिन पहले ही कन्याओं को अपने घर में आने के लिए आमंत्रित करें।  इस दिन घर में आने वाली कन्याओं को सर्वप्रथम स्वच्छ स्थान पर बैठाकर सभी के पैरों को स्वच्छ पानी या दूध से भरे थाल में पैर रखवाकर उन्हें अपने हाथों से धोना चाहिए, उसके बाद कन्याओं के पैर धोने वाले जल या दूध को अपने माथे पर लगाना चाहिए। 

 फिर उन नन्ही नन्ही कन्याओं के पैरों पर अक्षत, फूल और कुंकुम लगाना चाहिए। इसके बाद कन्याओं को साफ आसान पर आदर बैठा कर उनके माथे पर रोली का तिलक करके उस पर अक्षत लगाएं एवं सभी कन्याओं के बाएं हाथ पर तथा बालक के दाहिने हाथ पर कलावा ( रक्षा सूत्र ) बाँधे। फिर उनमें से किसी कन्या से घर के सभी सदस्यों को भी तिलक करवाना चाहिए और पुरुषो को अपने दाहिने हाथ एवं घर की स्त्रियों को अपने बाएं हाथ में कलावा बँधवाना चाहिए। 

 कन्या पूजन के दिन जिस प्रशाद से मां दुर्गा को भोग लगाया हो उस प्रशाद को भोग के बाद सबसे पहले कन्याओं को ही खिलाना चाहिए। 

 नवदुर्गा के जिस दिन आप कन्याओं को भोजन कराएं तो भोजन में खीर / घी का हलवा / जलेबी / मिठाई, चने, ग्वारफली की सब्जी और पूरियाँ कन्याओं को खिलाएं, ध्यान रखे इस दिन पूरियों के आटे को पानी के स्थान पर दूध से गूंदेतथा खीर अथवा हलवे में यथाशक्ति मेवे भी अवश्य ही डाले। ऐसा करने से देवी माँ प्रसन्न होती है।  साथ ही उन्हें इलायची, पान, मिश्री का सेवन कराकर उन्हें दक्षिणा अवश्य ही दें। 

यदि संभव हो सके तो अंत में जाते समय उन्हें कोई न कोई बर्तन और एक एक चुनरी देकर घर से बेटी की तरह विदा करें , तथा कन्याएँ जब चलने लगे तो उनसे अपने सिर पर अक्षत भी अवश्य ही छुड़वाएं ।

और हाँ ..........उन्हें विदा करते समय उनके चरण छूकर उनका आशीर्वाद ग्रहण करना कतई न भूलें। इस बात का विशेष ध्यान रहे कि आपने अपने घर में कन्याओं के रूप में माँ दुर्गा के स्वरूप 9 देवियों को बुलाया है अत: इस दिन घर में सभी लोग प्रसन्न रहे, सारा ध्यान इन नन्ही देवियों की तरफ रहे और किसी भी दशा में घर के सदस्यों में आपस में कलह ना हो। 

 देवी पुराण के अनुसार जिस घर में नवरात्री के समय प्रसन्नता से माँ के स्वरूप इन कन्याओं का स्वागत सत्कार होता है उस घर के सदस्यों की सभी मनोकामनाएं निश्चय ही पूर्ण होती है लेकिन जिस घर में नवरात्री, कन्या पूजन के समय कलह होती है या जिस घर के लोग बुझे मन से कन्याओं को जिमाते है उनको पूरे वर्ष धन की कमी, रोग, कलह का सामना करना पड़ता है, कार्यो में  आते रहते है। 

इन उपरोक्त रीतियों के अनुसार माता की पूजा अर्चना करने से देवी मां प्रसन्न होकर हमें सुख, सौभाग्य,यश, कीर्ति, धन और अतुल वैभव का वरदान देती है।

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Published By : MemoryMuseum
Updated On : 2019-04-12 21:54:28




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