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यह साइट इस दुनिया के समस्त पित्तरों को समर्पित है। आप अपने समस्त श्रद्धेय दिवंगत प्रियजनों / पूर्वजों का यहाँ पर प्रोफाइल बना कर, उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देकर उनके नाम को अमर कर दीजिये।

प्रस्तावना

हमारे समाज में तमाम बड़े लोग खासकर घर के मुखियां अपना जीवन बीमा कराते है उसके पीछे मात्र बचत या टैक्स से छूट की भावना ही नही होती है वरन् यदि अकस्मात उनके साथ कुछ दुर्घटना हो जाय तो उनके दिमाग मे परिवार की आर्थिक सुरक्षा ही सर्वोंपरि होती है क्या उन बड़े बुजर्गों के प्रति हमारा कोई भी कर्त्तव्य नहीं है।

प्रत्येक माँ बाप बड़े बुजुर्ग चाहते है कि उनका बच्चा वंश का नाम रौशन करे, जीवन में बहुत तरक्की करें, उसके लिये वह अपना सम्पूर्ण जीवन अर्पण कर देते है, बच्चों के भले के लिये जीवन भर प्रयास करते है अपनी खुशियों के साथ समझौता करते है तो क्या उन बड़े बुजर्गों पूर्वजों का नाम सदा संजोकर रखने का हमारा कर्त्तव्य नहीं है क्या हम नहीं चाहेंगे कि हमसे उम्मीद रखने वालों का नाम इतिहास के पन्नों पर सदैव के लिये दर्ज हो जाय तथा आने वाली पीढ़ियाँ अपने प्रियजनों अपने पूर्वजों से प्रेरणा लेती रहे। क्या जीते जी हमारे अति प्रिय किसी भी परिजन, मित्र, रिश्तेदार या प्रेरणास्रोत का उसकी मृत्यु के बाद उसके प्रति हमारा कोई भी कर्त्तव्य नहीं है क्या उसकी मृत्यु के बाद हम उन्हें बिल्कुल भुला देंगे क्या उनका नाम सदैव के लिये मिट जाने देंगे नही ।

मैमोरी म्यूजियम डाट नैट हम सभी मनुष्यों के लिये एक शपथ है कि हमारे पूर्वज, हमारे प्रियजन की यादें, उनकी प्रेरणाएं उनकी इच्छाएं कभी भी नष्ट नही होगी। हम इस साइट के माध्यम से हमेशा उसे याद रखेंगे। हम इनकी हर सम्भव जानकारी इस साइट पर डालेंगे जिससे दुनिया भर के लोग उनसे उनके बाद भी परिचित हो सके एवं उनका नाम कभी भी समाप्त ना हो पाये।

हम लोगों ने आज तक इंटरनैट में शादी, चैटिंग, नौकरी, व्यापार, शेयर, खेल, शिक्षा, योग, साहित्य, ज्योतिष, विज्ञान, समाचार आदि अनेक विषयों की लाखों करोड़ों साइट देखी होगी, उनसे जुड़े होंगे उस पर अपना प्रोफाइल बनाया होगा, समय बिताया होगा, परन्तु मैमोरी म्यूजियम डाट नैट शायद विश्व की पहली ऐसी साइट है जो मृत्यु के बाद भी लोगों को आपस में जोड़े रखने तथा कर्तव्यों का पालन करने के लिये बनाई गयी है।

इस साइट से जुड़ने पर आपके प्रियजनों के प्रति तमाम कर्तव्यों  में हम आपकी पूरी तरह से मदद करते है। हमारे प्रियजन जो हमसे सृष्टि के नियम के कारण बिछड़ गये है हम उन्हें दोबारा वापस तो नहीं ला सकते है लेकिन उनके प्रति श्रद्धा, आदर, कृतज्ञता का भाव रखकर एवं उनका स्मरण करके हम सभी मनुष्यों को आत्मसंतुष्टि की अवश्य ही प्राप्ति होगी।



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