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फॅमिली ट्री

सत्कर्मों का महत्व

हमें अपने माता-पिता, गुरूजनों एवं सभी बड़ों के प्रति आदर, श्रद्धा, कृतज्ञता एवं अपने से छोटों के प्रति प्रेम एवं स्नेह का भाव रखना चाहिये। हमें अपने परिवार एवं पूर्वजों की कभी भी अनदेखी नहीं करनी चाहिये उनके प्रति अपने कर्त्तव्यों का पालन ही सच्चा धर्म है, इसी में सर्वाधिक पुण्य एवं आत्मसन्तोष है। पित्तरों के प्रति कृतज्ञता, आदर, श्रद्धा, सम्मान देने तथा उनका स्मरण करने से वह ना केवल प्रसन्न होकर हमें आशीर्वाद ही प्रदान करते हैं वरन् अपने वंशजों को सुखी एवं सक्षम बनाने हेतु सदैव तत्पर भी रहते है। यह कोई अन्धविश्वास नही है वरन् पूरे विश्व में प्रत्येक धर्म में हजारों उदाहरण एवं प्रमाण भी है जब पित्तरों ने अपने वंशजों की साक्षात में भी मदद की है।

पितृ दोष

वह दोष जो पित्तरों से सम्बन्धित होता है पितृदोष कहलाता है। यहाँ पितृ का अर्थ पिता नहीं वरन् पूर्वज होता है। ये वह पूर्वज होते है जो मुक्ति प्राप्त ना होने के कारण पितृलोक में रहते है तथा अपने प्रियजनों से उन्हे विशेष स्नेह रहता है। श्राद्ध या अन्य धार्मिक कर्मकाण्ड ना किये जाने के कारण या अन्य किसी कारणवश रूष्ट हो जाये तो उसे पितृ दोष कहते है।

यन्त्र

इस साईट पर दिए गये सभी यंत्रों को योग्य ब्राह्मणों द्वारा शाश्त्रानुसार पूर्ण विधि विधानुसार जप , यज्ञ द्वारा सिद्ध करके उन्हें प्राण प्रतिष्ठित किया गया है जिससे यह सभी यन्त्र आपको अवश्य ही अभीष्ट लाभ प्रदान करेंगे । दोस्तों यदि आप वास्तव में अपने जीवन में सुखद बदलाव लाना चाहते है ,यदि आप जीवन में अपने समस्त सपनो को पूरा करने के लिए लक्ष्य बनाकर ईमानदारी से कड़ा परिश्रम करने के लिए तैयार है ,यदि आप ईश्वर में अटूट आस्था रखते है ,यदि आपको यहाँ पर स्थापित सिद्ध यंत्रों में पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वास है ,तभी आप यहाँ से सर्वोत्तम लाभ प्राप्त कर सकते है ।

पितरों का श्राद्ध / तर्पण

पितृ पक्ष का हिन्दू धर्म तथा हिन्दू संस्कृति में बड़ा महत्व है। श्रद्धापूर्वक पित्तरों के लिये किया गया कर्म श्राद्ध कहलाता है, जो पित्तरों के नाम पर श्राद्ध तथा पिण्डदान नहीं करता है वह हिन्दू नहीं माना जा सकता है। हिन्दूशास्त्रों के अनुसार मृत्यु होने पर जीवात्मा चन्द्रलोक की तरफ जाती है तथा ऊँची उठकर पितृलोक में पहुँचती है इन मृतात्मओं को शक्ति प्रदान करने के लिये पिण्डदान और श्राद्ध किया जाता है। श्राद्ध पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धा का प्रतीक हैं। मरने के बाद स्थूल शरीर समाप्‍त होकर केवल सूक्ष्म शरीर ही रह जाता है। सूक्ष्म शरीर को भूख-प्यास, सर्दी-गर्मी आदि की आवश्यकता नहीं रहती।

पूर्वजों
  • मित्रों विश्व में पहली बार एक ऐसी वेबसाइट बनायी गयी है जहाँ पर आप अपने श्रद्वेय जो काल की नियति के कारण हमसे समय/असमय बिछड़ गये है उन पूर्वजों, दिवंगत रिश्तेदारों, मित्रों एवं अपने आदर्श पुरुषों का नाम सदा के लिये संजोकर उसे अमिट रख सकते है ।
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