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grah aur rishtedar, ग्रह और रिश्तेदार

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grah aur rishtedar, ग्रह और रिश्तेदार


 ग्रहो और रिश्तेदारों में सम्बन्ध  


ज्योतिष शास्त्र जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस पृथ्वी पर जन्म लेने वाले सभी जातको पर उनके जन्म से अंतिम साँस तक उन पर ग्रहो और नक्षत्रो का प्रभाव रहता है।  ज्योतिष शास्त्र वह ज्ञान वह विज्ञानं है जिसके द्वारा किसी के भी जन्म के समय ग्रहो की स्थिति एवं  वर्तमान समय में ग्रहो, नक्षत्रो की स्थिति के अनुसार आने वाली घटनाओं के बारे में सूक्ष्मता से पता लगाकर उन ग्रहो को अनुकूल करके जीवन में श्रेष्ठ लाभ पाया जा सकता है।  
यदि किसी को अपने जन्म की तिथि, समय, स्थान आदि के बारे में सही से जानकारी नहीं है फिर भी हस्तरेखा, सामुद्रिक शास्त्र, प्रश्न ज्योतिष आदि ज्योतिष की अन्य बहुत सी शाखाओं से किसी भी जातक के बारे में सही से जानकारी प्राप्त की जा सकती है ।

इस पृथ्वी पर जन्म लेने वाले सभी जातको के जन्म से ही रिश्ते बन जाते है जो समय के साथ साथ और अधिक बढ़ते जाते है।  ज्योतिष शास्त्र में इन सभी रिश्तो को भी बहुत प्रमुख माना गया है और हर पारिवारिक रिश्ते को किसी न किसी ग्रह से जुडा गया हैं।

सभी धर्मो और शास्त्रों में घर को बहुत पवित्र बिलकुल मन्दिर के समान स्थान दिया गया हैं।  शास्त्रों में  माता, पिता, बडे बुजुर्गो को भगवान का प्रतीक माना गया हैं। इनको प्रसन्न करके, इनको पूर्ण सम्मान देकर इनके आशीर्वाद से ही मनुष्य को जीवन में श्रेष्ठ सफलता मिलती हैं।
लेकिन यदि जो जातक अपने माता-पिता, परिवार के अन्य सदस्यों का अपमान करता हैं, उन्हें प्रताड़ित करता है, उनका हक़ छीन लेता है वह निश्चय ही पाप का भागीदार होता हैं। वह जीवन में धन भले ही कमा ले लेकिन रोग, अपयश एवं पारिवारिक कलह उसको घेरे ही रहती है। 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारे हरेक रिश्ते का सम्बन्ध किसी न किसी ग्रह से होता हैं। जब हम् उस ग्रह से सम्बंधित उन रिश्तेदारों के साथ गलत व्यवहार करते है तो  उस रिश्ते से जुड़ा हमारा वह ग्रह कमजोर हो जाता हैं। उस ग्रह के शुभ फलो के स्थान पर हमें उस ग्रह के अशुभ फल मिलने लगते हैं।

जानिए किस ग्रह का सम्बन्ध हमारे किस रिश्ते से हैं और  रिश्ते के साथ बुरा व्यवहार करने पर हमें किस तरह से कष्टों की प्राप्ति होती है, ग्रहों और रिश्तेदारों में सम्बन्ध, graho aur rishtedaro se sambandh, 

 कौन सा ग्रह किस रिश्ते से सम्बन्ध रखता है | 




1. सूर्य ग्रह  :-सूर्य ग्रह का सम्बन्ध जातक के पिता से होता हैं। सूर्य को आत्माकारक ग्रह कहा जाता हैं। जब कोई जातक अपने पिता का दिल दुखाता है, उनको अपमानित करता है,  उनको अभाव में रखता है या कोई ऐसा कार्य करता हैं , जिससे उनकी आत्मा को ठेस् पहुँचती हैं।  तब उस जातक को सूर्य ग्रह के अशुभ फल मिलते है उसकी कुंडली का दशम भाव भी बिगड़ जाते हैं। अगर कोई जातक अपने पिता के देहान्त के पश्चात् उनका श्राद्ध नहीं करता हैं , तो वह पितृ ऋण का भागी भी होता हैं।
सूर्य के अशुभ फलो के फलो उसकी मान प्रतिष्ठा, सम्पति की हानि होती है।   
 
2. चन्द्रमा  ग्रह  :- सूर्य ग्रह का सम्बन्ध जातक के परिवार की महिलाओं विशेषकर उसकी माता से होता है। शास्त्रों में माँ को भगवान से भी ऊँचा स्थान दिया गया हैं। वह माँ ही होती है जो अपने संतान को पाल-पोस कर बड़ा करती है। इसीलिए यदि कोई अपनी माता, अपनी दादी, अपनी नानी,अपनी सास, आदि से ख़राब व्यवहार करता है उनका ध्यान नहीं देता है,  उनकी भावनाओं की कद्र नहीं करता है तो चन्द्रमा रुष्ट हो जाते हैं।

उस की कुंडली का चतुर्थ भाव दूषित हो जाता है, उसपर मातृऋण भी लग जाता हैं। जिससे जातक का परिवारिक जीवन कष्टमय हो जाता हैं। उसे मानसिक शांति नहीं मिलती है, उसका स्वास्थ्य भी ख़राब हो जाता है, उसे ह्रदय, फेफड़ो से सम्बंधित रोग हो जाते है । अत: भूल कर भी अपनी माता के ह्रदय को ठेस ना पहुंचाए। 

3.  मंगल  ग्रह  :- मंगल ग्रह का सम्बन्ध जातक के भाई से होता हैं। जब कोई जातक अपने भाई को अपमानित करता रहता है, उसे धोखा देता है,  उसकी जायदाद, उसका हक़ छीन लेता है तो उस जातक का मंगल ख़राब हो जाता हैं।  मंगल के अशुभ फल के कारण उसके शत्रु बढ़ जाते है, उसके मुकदमो आदि का सामना करना पड़ता है।  मंगल खराब होने से जातक को रक्त सम्बन्धी बीमारियाँ भी घेर लेती है हैं। अत: मंगल के शुभ फलो के लिए अपने भाई से  सदैव अच्छे सम्बन्ध बनाये रखे।  

4. बुध  ग्रह  :- बुध ग्रह का सम्बन्ध घर की बेटी,  बहन, बहू, बुआ  आदि से होता है।  इन लोगों की अवहेलना करने, इनका आदर ना करने से बुध ग्रह से शुभ फल मिलने बंद हो जाते हैं। बच्ची को जन्म लेने से पूर्व मार डालने, बच्ची को कन्या होने के कारण कोसने, किसी और की बच्ची पर बुरी नज़र डालने, उसे बेच देने से बुध ग्रह अशुभ फल देने लगते हैं। इसके अतिरिक्त बहन के साथ बुरा व्यवहार करने, बहन से विवाह के बाद रिश्ता तोड़ने, उसको घर के तीज त्योहारों, शुभ आयोजनों में सम्मान के साथ ना बुलाने, किसी किन्नर को अपमानित करने से भी जातक बुध ग्रह से पीड़ित हो जाता हैं। इस कारण से भग्नि ऋण लगता हैं। 

 बुध से पीड़ित होने पर आर्थिक समस्याएँ घेर लेती है, उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है, सूंघने की शक्ति कमजोर हो जाती है  मित्र शत्रु हो जाते है। बुध के अशुभ होने पर घर की बहन बेटी का जीवन भी कष्टमय रहता है। अत: अपनी बेटी,  बहन, बहू, बुआ आदि से सदैव अच्छे सम्बन्ध बनाये रखें। 

5. बृहस्पति ग्रह  :-  बृहस्पति ग्रह का सम्बन्ध जातक के शिक्षक, उसके दादा, उसके नाना, साधु , संतों आदि से होता है। इनको अपमानित करने, इनको कष्ट देने  से बृहस्पति ग्रह कुपित हो जाते हैं। बडे बुजूर्गों का तिरस्कार करने से भी बृहस्पति ग्रह के अशुभ फल मिलते हैं। इसके अतिरिक्त जो स्त्री अपने पति की अवहेलना करती है, पति का सम्मान नहीं करती हैं, पति को नीचा दिखाती हैं, ऐसी महिलाओं को भी गुरु बृहस्पति एवं कुंडली के नवम घर के अशुभ फल देते हैं।

 इससे जातक को अहंकार होने लगता है, वह मूर्खतापूर्ण कार्य करता है। उसे संतान सुख में कमी मिलती है, साँस, पेट की बीमारियाँ घेर लेती है अचानक अपमान की स्थिति का सामना भी करना पड़ता है।  



6. शुक्र ग्रह  :- शुक्र ग्रह का सम्बन्ध पत्नी से होता है।  जब कोई पुरुष अपनी पत्नी को अपमानित करता है उसे शारीरिक,  मानसिक पीडा देता हैं, दहेज के लिए प्रताड़ित करता है उसके घर वालो को बुरा कहता है,  तब व्यक्ति का शुक्र ख़राब हो जाता हैं। इसके अतिरिक्त अगर कोई जातक अपनी पत्नी से छल करके दूसरी स्त्री के साथ सम्बन्ध बनाता हैं, तब भी उसको शुक्र ग्रह के बुरे फल मिलते हैं। 

उस को स्त्री ऋण लग जाता हैं। उसको धन और वाहन सुख की कमी होती है, उसके धन का सदा अपव्यय ही होता है उसके कार्यो में अड़चने आती है । उसे मूत्राशय, गुप्त रोगो की शिकायत हो जाती है, उसके शरीर में कम्पन होने लगता हैं। अत: जातक को अपनी पत्नी और उसके घरवालों का सदा सम्मान करना चाहिए, शुक्र ग्रह के शुभ प्रभाव से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। 

7.  शनि  ग्रह  :- शनि ग्रह का जातक के चाचा-ताऊ, नौकरो, कर्मचारियों आदि से सम्बन्ध होता है।  कर्मचारियों, नौकरों, मजदूरों, का हक मारने, उनकी प्रताड़ना करने से शनि ग्रह खराब हो जाते हैं। चाचा-ताऊ को अपशव्द कहने, उनका सम्मान ना करने  पर भी शनि देव के अशुभ फल मिलते हैं। शनि देव के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में बहुत समस्याएं आती है।

 उसको राजद्वार /  मुकदमो का भय लग जाता है, उसके शत्रु बढ़ जाते है, अपयश की प्राप्ति होती है।  अत: शनि को प्रसन्न रखने के लिए जातक को अपने चाचा-ताऊ, नौकरो, कर्मचारियों से भी अच्छे सम्बन्ध रखने चाहिए। 

अत: इससे स्पष्ट है कि हमें अपने परिजनों, सगे-सम्बन्धियों का पूर्ण सम्मान करना चाहिए उन्हें कष्ट नहीं देना चाहिए। तभी हमारे सारे ग्रह हमारे अनुकूल होकर हमें शुभ फल प्रदान करेगें। अन्यथा कोई जातक जीवन भर पूजा-पाठ, धर्म कर्म करें चाहे जितना भी मेहनत करें उसे जीवन में अस्थिरताओं का सामना करना ही पड़ेगा।

वह लाख प्रयास करें, जितना भी सोचे की उसके किन पापो के कारण उसे संघर्ष करना पड़ रहा है जब तक वह अपने रिश्तो के प्रति ईमानदार नहीं होगा उनका पूर्ण सम्मान नहीं करेगा उसे जीवन में श्रेष्ठ फलो की प्राप्ति नहीं हो पायेगी। 



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Published By : MemoryMuseum
Updated On : 2018-09-08 15:18:21




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