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बोधगया
Bodh Gaya


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बोधगया धाम
Bodh Gaya Dham






बिहार राज्य में स्थित गया भारत का प्रमुख पितृ तीर्थ है। पुराणों के अनुसार यह एक मुक्तिप्रद तीर्थस्थल है। यहाँ प्रत्येक वर्ष भाद्रपक्ष की चतुर्दशी से आश्विन पक्ष की अमावस्या तक 17 दिनों का पितृपक्ष मेला लगता है। पित्तर कामना करते है कि उनके वंश में कोई ऐसा पुत्र उत्पन्न हो जो गया जाकर वहाँ उनका श्राद्ध तथा पिण्डदान कर सके।

ऐसी मान्यता है कि इस पुण्यक्षेत्र में पिता का श्राद्ध करके पुत्र अपने पितृऋण से मुक्त हो जाते है। यहाँ पर श्राद्ध करने से पूर्वजों की भटकती आत्मा को शान्ति मिलती है वे प्रेत योनि से मुक्त हो जाते है तथा प्रसन्न होकर श्राद्ध करने वाले को धन-धान्य, सुख समृद्धि एवं यशस्वी होने का आशीर्वाद दते है।

गया में यात्री के श्राद्ध कर्म सात दिन के है परन्तु वर्तमान में एक दृष्टि गयाश्राद्ध ही ज्यादा चलन में है। इस एक दिन में गया श्राद्ध एवं पिण्डदान कराने वाले लोग फाल्गु नदी, विष्णु पद मन्दिर अक्षयवट में श्राद्ध, पिण्डदान कर गया पण्ड़ों द्वारा सुफल प्राप्त कर अनुष्ठान समाप्त करते है।

इस जगह पर किये जाने वाले श्राद्ध एवं पिण्डदान का महत्व इसी बात से पता चलता है कि यहाँ पर भगवान राम ने अपने पिता राजा दशरथ का, भीष्म जी ने अपने पिता राजा शान्तनु का, भगवान कृष्ण ने अपने पिता वासुदेव जी का तथा युधिष्ठिर ने अपने पिता राजा पाण्डु का श्राद्ध एवं पिण्डदान किया था।

फाल्गु तीर्थ, विष्णूपद मन्दिर, गदाधर भगवान, आदि गया, सूर्यकुण्ड, रामगया, सीताकुण्ड, उत्तर मानस, रामशिला, काकबलि, प्रेतशिला, ब्रह्मकुण्ड, अक्षयवट, मंगलागौरी, आकाशगंगा, ब्रह्मयोनि आदि यहाँ के पौराणिक, धार्मिक, अतिपूजनीय एवं महात्वपूर्ण तीर्थ है।

गया क्षेत्र का महत्व इसी बात से पता चलता है कि प्राचीन काल से लेकर आज तक प्रति वर्ष लाखों मनुष्य विश्व के कोने-कोने से यहा आकर अपने पूर्वजों का श्राद्ध एवं पिण्डदान करके अपना जीवन सफल बनाते है तथा इस पूरे समय में पूर्ण संयम, निष्ठा एवं आत्म अनुशासन का परिचय देते हुये सभी प्रकार के व्यसनों का पूरी तरह से परित्याग करके स्वयं भी पुण्य अर्जित करते है।






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