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Kalash One Imageganesh ji ka vivah, गणेश जी का विवाह, Kalash One Image


 ganesh ji ki shadi, गणेश जी की शादी,


 Ganesh ji ki shadi, गणेश जी की शादी, 


  हिन्दू धर्म में प्रत्येक शुभ कार्य करने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। गणेश जी सभी गणो के देवता माने जाते है इसीलिए इन्हे गणपति के नाम से भी जाना जाता हैगणेश जी का वाहन एक मूषक अर्थात चूहा है। 

 समय के साथ सभी देवताओं का विवाह होता गया लेकिन गणेश जी का विवाह ganesh ji ka vivah, नहीं हो रहा था, कोई भी अच्छी, सुशील, सुन्दर कन्या गणेश जी से विवाह के लिए तैयार नहीं होती थी।  इसके दो कारण प्रमुख थे पहला कारण यह था कि उनका सिर सामान्य मनुष्य का ना होकर हाथी वाला था और दूसरा कारण उनका एक दन्त था।  


 पहले गणेश जी के दो दाँत थे जिससे उनका हाथी वाला सिर होने के बावजूद भी वह सुन्दर लगते थेलेकिन परशुराम जी के साथ युद्ध होने करने के कारण उनका एक दांत टूट गया थातभी से वे एकदंत कहलाए जाने लगे। चूँकि इन कारणों से   गणेश जी की शादी,  ganesh ji ki shadi,नहीं हो रही थी इसी कारणवश गणेश जी काफी नाराज रहने लगे । 


   गणेश जी का विवाह, ganesh ji ka vivah,  का प्रसंग बहुत ही रोचक है . क्या आप जानते है की   गणेश जी का विवाह कैसे हुआ, ganesh ji ka vivah kaise hua   नहीं तो हम आपको बताते है की  गणेश जी की शादी, ganesh ji ki shadi,  में कैसी अड़चने आ रही थी और कैसे हुआ गणपति जी का विवाह, ganpati ji ka vivah   


 Ganpati ji ka vivah,  गणपति जी का विवाह


 जब भी गणेश जी किसी भी देवता के विवाह में जाते थे तो वहाँ पर विवाह का माहौल देखकर उनके मन को बहुत ठेस पहुँचती ।  धीरे धीरे वह इतने परेशान होने लगे कि उन्होंने यह फैसला किया अगर उनका विवाह नहीं हो रहा तो वे किसी और का विवाह कैसे होने दें ।  तब उन्होंने अन्य देवताओं के विवाह में बाधाएं डालने का निश्चय किया ।


  गणेश जी के इस काम में उनकी सहायता उनका वाहन मूषक करता था।  उन्होंने अपने चूहे को को आदेश दिया कि जिस किसी भी देवता की बारात जिस भी रास्ते से गुजरे उस रास्ते को और विवाह मंडप की भूमि को अंदर से बिलकुल खोखला कर के ऐसा विघ्न डालो जिससे विवाह हो ही नहीं पाए ।वह मूषक गणेश जी के आदेश का पालन कर विवाह के मंडप को नष्ट कर देता था जिससे विवाह के कार्य में रूकावट आती थी। 

 गणेश और चूहे की मिली भगत की इस कारस्तानी से सभी देवता परेशान हो गए और सब मिलकर शंकर जी के पास जाकर अपनी समस्या सुनाने लगे।  परन्तु इस समस्या का हल तो भोलेनाथ के पास भी नहीं था।  शंकर जी ने देवताओं से कहा कि इस समस्या को तो ब्रह्मा जी ही सुलझा सकते है। 


 इसके बाद सब देवता  ब्रह्मा जी के पास गए, उस समय ब्रह्माजी योग में लीन थे।  कुछ ही देर बाद देवताओं के समाधान के लिए योग से दो कन्याएं ऋद्धि और सिद्धि प्रकट हुई।  ये दोनों ब्रह्माजी की मानस पुत्री थीं।  

  ब्रह्माजी अपनी दोनों पुत्रियों को लेकर गणपति जी के पास पहुंचे और बोले की आप इन् दोनों को शिक्षा प्रदान करें ।  गणेशजी उन्हें शिक्षा देने के लिए तैयार हो गए। अब जब भी मूषक गणेश जी के पास किसी के विवाह की सूचना लेकर आता तो ऋद्धि और सिद्धि कोई न कोई प्रसंग छेड़ कर उनका ध्यान भटकाने लगती।  इस तरह से सभी विवाह बिना किसी बाधा के पूर्ण होने लगे। 


 परन्तु एक दिन जब चूहे ने गणेश जी को सारी बात समझाई की अब सभी  विवाह बिना किसी रूकावट के क्यों सम्पूर्ण हो रहे है तो गणेश जी को सारी बात समझ आ गयी।  इससे पहले कि गणपति जी को क्रोध आता, ब्रह्मा जी उनके सामने अपनी दोनों पुत्रियों ऋद्धि सिद्धि को लेकर प्रकट हुए और उन्होंने गणेश जी से कहा कि मुझे इनके लिए कोई उत्तम वर नहीं मिल रहा है।  इसलिए आप कृपया इनसे विवाह कर लें। 


 इस प्रकार गणेश जी का विवाह बड़ी धूमधाम से ऋद्धि (बुद्धि- विवेक की देवी) और सिद्धि (सफलता की देवी) से गणेशजी का विवाह ganesh ji ka vivah हो गया। गणपति जी को  बाद में दो पुत्रों की प्राप्ति हुई जिनका नाम था शुभ और लाभ। 


 Ganesh ji ki shadi, गणेश जी की शादीके बाद से फिर देवताओं के विवाह में विघ्न आने बंद हो गए। 

   तभी से प्रत्येक विवाह के निमंत्रण में गणेश जी नाम अवश्य ही होता है जिससे उनकी कृपा से विवाह में विघ्न ना आयें। 





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Published By : MemoryMuseum
Updated On : 2018-09-23 19:10:43




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