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Kalash One ImageGanesh ji ka sir, गणेश जी का सर, Kalash One Image


Ganesh ji ka sir, गणेश जी का सर,


  Ganesh ji ka sir kaha par hai, 

 गणेश जी का सर कहां पर है, 


 भगवान गणेश जी देवताओं में प्रथम पूज्यविघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता कहे गए है।  किसी भी मंदिर, तस्वीर आदि में उनका सिर सामान्य नहीं वरन हाथी का ही है। 


 जैसा कि आप सभी जानते है कि बालक गणेश का जन्म के समय में ही सर कट गया था और माँ पार्वती के शोक और क्रोध के कारण एक हाथी के बच्चे का सर काटकर गणेश जी को पुन: जीवित किया गया था तभी से उन्हें गजानन कहा जाने लगा। 


 लेकिन क्या आप जानते है कि उनका सर आखिर गया कहाँ ? इस सम्बन्ध में भी पुराणों में दो अलग अलग कथाएं है। 


 Ganesh ji ka sir, 

 गणेश जी का सिर






 ब्रह्मवैवर्त पुराण में लिखी एक कथा के अनुसार वह सिर आकाश में स्थित चंद्रमंडल में पंहुच गया और आज भी असली मुख चंद्रमंडल में विद्यमान है। इसी कारण हर संकट चतुर्थी पर चंद्र देव के दर्शन किये जाते हैं और उनको अर्घ्य देकर समस्त संकटों को दूर करने की मंगल कामना करते हुए भगवान श्री गणेश की पूजा की जाती है । 


 वहीं शिव पुराण में वर्णित दूसरी कथा के अनुसार आपको जानकर यह हैरानी होगी कि गणपति जी का असली सिर एक गुफा में है।  जी हाँ मान्‍यता है कि गणेश जी का जो मस्‍तक शरीर से अलग हो गया था उसे भगवान शिव ने पार्वती जी के कहने पर एक गुफा में रख दिया था उस गुफा को पाताल भुवनेश्‍वर के नाम से जाना जाता है। 


 यह गुफा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में गंगोलीहाट से 14 किलोमीटर दूर में स्थित है। 

मान्‍यता है कि इस गुफा की खोज कलयुग में आदिशंकराचार्य जी ने की थी तथा इस गुफा में विराजित गणेशजी की मूर्ति को आदि गणेश कहा जाता है। 

 
  यह भी मान्‍यता है कि भगवान श‍िव स्वयं इस गुफा में रखे गणेश के कटे हुए सिर की रक्षा करते हैं। 

 इस गुफा के अन्दर चारों युगों को दर्शाते हुए चार पत्थर स्थापित हैं। एक पत्थर जिसे कलियुग का प्रतीक माना गया है, वह स्वत: चमत्कारी तरीके से धीरे-धीरे ऊपर उठ रहा है। मान्यता है कि कलियुग का प्रतीक यह पत्थर जिस दिन ऊपर दीवार से टकरा जायेगा उसी दिन कलियुग समाप्त हो जाएगा।

 इस रहस्मयी पाताल भुवनेश्वर में गुफा में भगवान गणेश जी के कटे हुए शिलारूपी मूर्ति के ठीक ऊपर 108 पंखुड़ियों वाला शवाष्टक दल ब्रह्मकमल सुशोभित दिखाई पड़ता है। भगवान गणेश जी के शिलारूपी मस्तक के ऊपर इस ब्रह्मकमल से पानी क दिव्य बूंदे टपकती रहती है। इसमें गणपति जी के मुख में मुख्य बूंद गिरती हुई नज़र आती है। माना जाता है कि इस ब्रह्मकमल को भगवान शिव ने ही यहां पर इस स्थान में स्थापित किया था।

 यहीं पर शिलाओं के रूप में पवित्र केदारनाथबद्रीनाथ और अमरनाथ के भी दर्शन होते हैं। बद्रीनाथ में बद्री पंचायत की सम्पूर्ण शिलारूप मूर्तियां हैंजिनमें यम-कुबेरवरुणलक्ष्मीगणेश तथा गरूड़ जी के दर्शन होते हैं। गुफा में एक चट्टान पर तक्षक नाग की आकृति भी दिखाई पड़ती है। 

 बद्री पंचायत के ऊपर बाबा बर्फानी, बाबा अमरनाथ की गुफा स्वत: स्थापित है यहाँ पर पत्थर की बड़ी-बड़ी जटाएं भी फैली हुई नज़र आती हैं।

 इसी गुफा में भक्तो को कालभैरव जी की जीभ के दर्शन भी होते हैं। 



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Published By : MemoryMuseum
Updated On : 2018-09-22 16:49:27




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