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Kalash Fourth Image एकादशी के भाग्य चमकाने के उपाय Kalash Fourth Image
Kalash Fourth Image Ekadashi Ke Bhagy Chamkane Ke Upay Kalash Fourth Image


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Kalash Fourth Image एकादशी के उपाय Kalash Fourth Image
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Kalash Fourth Image हिन्दू शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद शुक्ल एकादशी को वामन एकादशी कहते है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है। इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी , पदमा एकादशी या जलझूलनी एकादशी भी कहते है। इसी दिन भगवान श्री कृष्ण जी के जन्म के बाद के संस्कारो की शुरुआत भी मानी गयी है।

Kalash Fourth Image इस दिन भगवान श्री विष्णु / श्री कृष्ण जी की प्रतिमा / फोटो को पालकी में रख कर किसी नदी या जलाशय में जाकर स्नान कराया जाता है, लोग भजन, कीर्तन मंत्रो का पाठ करते हुए साथ चलते है।

Kalash Fourth Image यह भी मान्यता है कि भगवान विष्णु इस दिन करवट बदलते है। इसी कारण इसे परिवर्तिनी एकादशी कहते है। यह मौसम में बदलाव का भी सूचक है।इस एकादशी के शुभ प्रभाव से समस्त पाप नष्ट होते हैं। इस एकादशी की कथा सुनने से वाजपेयी यज्ञ का अक्षय फल प्राप्त होता है।

इस वर्ष 2018 में एकादशी गुरुवार 20 सितम्बर को है।

Kalash Fourth Image वामन एकादशी ब्रत कथा Kalash Fourth Image


Kalash Fourth Image युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! भाद्रपद शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? इसकी विधि तथा इसका माहात्म्य कृपा करके कहिए। तब भगवान श्रीकृष्ण कहने लगे कि इस पुण्य, स्वर्ग और मोक्ष को देने वाली तथा सब पापों का नाश करने वाली, उत्तम वामन एकादशी का माहात्म्य मैं तुमसे कहता हूँ तुम ध्यानपूर्वक सुनो।

Kalash Fourth Image यह पद्मा/परिवर्तिनी एकादशी जयंती एकादशी भी कहलाती है। इसका यज्ञ करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। पापियों के पाप नाश करने के लिए इससे बढ़कर कोई उपाय नहीं। जो मनुष्य इस एकादशी के दिन मेरी (वामन रूप की) पूजा करता है, उससे तीनों लोक पूज्य होते हैं। अत: मोक्ष की इच्छा करने वाले मनुष्य इस व्रत को अवश्य करें।
जो कमलनयन भगवान का कमल से पूजन करते हैं, वे अवश्य भगवान के समीप जाते हैं। जिसने भाद्रपद शुक्ल एकादशी को व्रत और पूजन किया, उसने ब्रह्मा, विष्णु सहित तीनों लोकों का पूजन किया। अत: हरिवासर अर्थात एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। इस दिन भगवान करवट लेते हैं, इसलिए इसको परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं।

Kalash Fourth Image यह एकादशी जयंती एकादशी भी कहलाती है। इसका यज्ञ करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। पापियों के पाप नाश करने के लिए इससे बढ़कर कोई उपाय नहीं। जो मनुष्य इस एकादशी के दिन मेरी (वामन रूप की) पूजा करता है, उससे तीनों लोक पूज्य होते हैं।
भगवान के वचन सुनकर युधिष्ठिर बोले कि भगवान! मुझे अतिसंदेह हो रहा है कि आप किस प्रकार सोते और करवट लेते हैं तथा किस तरह राजा बलि बलि को बाँधा और वामन रूप रखकर क्या-क्या लीलाएँ कीं? चातुर्मास के व्रत की क्या ‍विधि है तथा आपके शयन करने पर मनुष्य का क्या कर्तव्य है। सो आप मुझसे विस्तार से बताइए।

Kalash Fourth Image श्रीकृष्ण कहने लगे कि हे राजन! अब आप सब पापों को नष्ट करने वाली कथा का श्रवण करें। त्रेतायुग में बलि नामक एक दैत्य था। वह मेरा परम भक्त था। विविध प्रकार के वेद सूक्तों से मेरा पूजन किया करता था और नित्य ही ब्राह्मणों का पूजन तथा यज्ञ के आयोजन करता था, लेकिन इंद्र से द्वेष के कारण उसने इंद्रलोक तथा सभी देवताओं को जीत लिया।
इस कारण सभी देवता एकत्र होकर सोच-विचारकर भगवान के पास गए। बृहस्पति सहित इंद्रादिक देवता प्रभु के निकट जाकर और नतमस्तक होकर वेद मंत्रों द्वारा भगवान का पूजन और स्तुति करने लगे। अत: मैंने वामन रूप धारण करके पाँचवाँ अवतार लिया और फिर अत्यंत तेजस्वी रूप से राजा बलि को जीत लिया।

Kalash Fourth Image इतनी वार्ता सुनकर राजा युधिष्ठिर बोले कि हे जनार्दन! आपने वामन रूप धारण करके उस महाबली दैत्य को किस प्रकार जीता? श्रीकृष्ण कहने लगे- मैंने (वामन रूपधारी ब्रह्मचारी) बलि से तीन पग भूमि की याचना करते हुए कहा- ये मुझको तीन लोक के समान है और हे राजन यह तुमको अवश्य ही देनी होगी।
राजा बलि ने इसे तुच्छ याचना समझकर तीन पग भूमि का संकल्प मुझको दे दिया और मैंने अपने त्रिविक्रम रूप को बढ़ाकर यहाँ तक कि भूलोक में पद, भुवर्लोक में जंघा, स्वर्गलोक में कमर, मह:लोक में पेट, जनलोक में हृदय, यमलोक में कंठ की स्थापना कर सत्यलोक में मुख, उसके ऊपर मस्तक स्थापित किया।

Kalash Fourth Image सूर्य, चंद्रमा आदि सब ग्रह गण, योग, नक्षत्र, इंद्रादिक देवता और शेष आदि सब नागगणों ने विविध प्रकार से वेद सूक्तों से प्रार्थना की। तब मैंने राजा बलि का हाथ पकड़कर कहा कि हे राजन! एक पद से पृथ्वी, दूसरे से स्वर्गलोक पूर्ण हो गए। अब तीसरा पग कहाँ रखूँ?
तब बलि ने अपना सिर झुका लिया और मैंने अपना पैर उसके मस्तक पर रख दिया जिससे मेरा वह भक्त पाताल को चला गया। फिर उसकी विनती और नम्रता को देखकर मैंने कहा कि हे बलि! मैं सदैव तुम्हारे निकट ही रहूँगा। विरोचन पुत्र बलि से कहने पर भाद्रपद शुक्ल एकादशी के दिन बलि के आश्रम पर मेरी मूर्ति स्थापित हुई।

Kalash Fourth Image इसी प्रकार दूसरी क्षीरसागर में शेषनाग के पष्ठ पर हुई! हे राजन! इस एकादशी को भगवान शयन करते हुए करवट लेते हैं, इसलिए तीनों लोकों के स्वामी भगवान विष्णु का उस दिन पूजन करना चाहिए। ताँबा, चाँदी, चावल और दही का दान करना उचित है। रात्रि को जागरण अवश्य करना चाहिए।
जो विधिपूर्वक इस एकादशी का व्रत करते हैं, वे सब पापों से मुक्त होकर स्वर्ग में जाकर चंद्रमा के समान प्रकाशित होते हैं और यश पाते हैं। जो पापनाशक इस कथा को पढ़ते या सुनते हैं, उनको हजार अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है। इति शुभम्



Kalash Fourth Image ऐसे करें एकादशी की पूजा Kalash Fourth Image


Kalash Fourth Image एकादशी के दिन प्रात: स्नानादि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु का ध्यान करें फिर व्रत का संकल्प लेकर पूजन-क्रिया को प्रारंभ करें। इस दिन प्रभु को फल-फूल, तिल, दूध, पंचामृत आदि अर्पित करके उनका रोली-अक्षत से तिलक करके उन्हें पीले फूल चढ़ाएं।

Kalash Fourth Image एकादशी के दिन विष्णुजी के नाम का स्मरण करें एवं भजन-कीर्तन करें। इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ अवश्य ही करें।

Kalash Fourth Image एकादशी के दिन गरीबों और ब्राह्मण को भोज करा के दान-दक्षिणा देने का विशेष महत्व होता है। इस दिन यथा सम्भव सिर में तेल ना लगाएं और जमीन पर सोएं । मान्यता है कि जो भी कोई इस प्रकार विधि पूर्वक श्रद्धा से अजा एकादशी का व्रत रखता है उसकी सभी मनोकामनाएँ अवश्य ही पूर्ण होती हैं।


Kalash Fourth Image एकादशी के उपाय Kalash Fourth Image
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Kalash Fourth Image एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु के मंदिर में एक नारियल व थोड़े बादाम चढ़ाएं। इस उपाय से जीवन में आर्थिक लाभ की प्राप्ति होती है कार्यों में समस्त बाधाएं भी दूर हो जाती है ।

Kalash Fourth Image एकादशी के दिन प्रांत: भगवान विष्णु की पूजा करते समय कुछ पैसे विष्णु भगवान की मूर्ति या तस्वीर के सामने रख दें। फिर पूजन करने के बाद यह पैसे अपने पर्स में रख लें। अब हर एकादशी को पूजन के समय यह सिक्के भी पर्स से निकाल कर पूजा में रखा करें और पूजन के बाद फिर से अपनी जेब में रख लें । इस उपाय को करने से कभी भी पैसों की तंगी नहीं रहती है।

Kalash Fourth Image पीपल में भगवान विष्णु का ही वास माना गया है। यदि आप कर्ज से परेशान है तो एकादशी के दिन पीपल के वृक्ष पर मीठा जल चढ़ाएं और शाम के समय दीपक लगाएं। इस उपाय से शीघ्र ही कर्ज मुक्ति के योग प्रबल होते है , कार्यों में सफलता मिलती है , धन टिकता है ।

Kalash Fourth Image एकादशी के दिन सांय के समय तुलसी के पौधे के सामने गाय के घी का दीपक जलाकर और ऊँ वासुदेवाय नम: मंत्र बोलते हुुए तुलसी की 11 परिक्रमा करें । इस उपाय से घर के सदस्यों के मध्य प्रेम, सुख-शांति बनी रहती है उस परिवार पर किसी भी प्रकार का कोई संकट नहीं आता है।

Kalash Fourth Image एकादशी के दिन रात्रि में भगवान विष्णु के सामने नौ बत्तियों का दीपक जलाएं और एक दीपक ऐसा जलाएं जो रात भर जलता रहे। इससे माँ लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती है। उस जातक को जीवन में सभी सुख और ऐश्वर्य प्राप्त होते है।


Published By : Memory Museum
Updated On : 2018-09-19 08:48:00 PM



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