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Kalash Fourth Image एकादशी के भाग्य चमकाने के उपाय Kalash Fourth Image
Kalash Fourth Image Ekadashi Ke Bhagy Chamkane Ke Upay Kalash Fourth Image


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Kalash Fourth Image एकादशी के उपाय Kalash Fourth Image
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Kalash Fourth Image जया एकादशी व्रत कथा Kalash Fourth Image


Kalash Fourth Image माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहते हैं। इस एकादशी के उपवास से मनुष्य भूत, प्रेत, पिशाच आदि की योनि से छूट जाता है, अतः इस एकादशी के उपवास को विधि अनुसार करना चाहिए।

Kalash Fourth Image एक बार देवताओं के राजा इंद्र नंदन वन में भ्रमण कर रहे थे। चारों तरफ किसी उत्सव का-सा माहौल था। गांधर्व गा रहे थे और गंधर्व कन्याएं नृत्य कर रही थीं। वहीं पुष्पवती नामक गंधर्व कन्या ने माल्यवान नामक गंधर्व को देखा और उस पर आसक्त होकर अपने हाव-भाव से उसे रिझाने का प्रयास करने लगी।

Kalash Fourth Image माल्यवान भी उस गंधर्व कन्या पर आसक्त होकर अपने गायन का सुर-ताल भूल गया। इससे संगीत की लय टूट गई और संगीत का सारा आनंद बिगड़ गया। सभा में उपस्थित देवगणों को यह बहुत बुरा लगा। यह देखकर देवेंद्र भी रूष्ट हो गए। संगीत एक पवित्र साधना है।

Kalash Fourth Image इस साधना को भ्रष्ट करना पाप है, अतः क्रोधवश इंद्र ने पुष्पवती तथा माल्यवान को शाप दे दिया- ‘संगीत की साधना को अपवित्र करने वाले माल्यवान और पुष्पवती! तुमने देवी सरस्वती का घोर अपमान किया है, अतः तुम्हें मृत्युलोक में जाना होगा। गुरुजनों की सभा में असंयम और लज्जाजनक प्रदर्शन करके तुमने गुरुजनों का भी अपमान किया है, इसलिए इंद्रलोक में तुम्हारा रहना अब वर्जित है, अब तुम अधम पिशाच असंयमी का-सा जीवन बिताओगे।’

Kalash Fourth Image देवेंद्र का शाप सुनकर वे अत्यंत दुखी हुए और हिमालय पर्वत पर पिशाच योनि में दुःखपूर्वक जीवनयापन करने लगे। उन्हें गंध, रस, स्पर्श आदि का तनिक भी बोध नहीं था। वहीं उन्हें असहनीय दुःख सहने पड़ रहे थे। रात-दिन में उन्हें एक क्षण के लिए भी नींद नहीं आती थी। उस स्थान का वातावरण अत्यंत शीतल था, जिसके कारण उनके रोएं खड़े हो जाते थे, हाथ-पैर सुन्न पड़ जाते थे, दांत बजने लगते थे।

Kalash Fourth Image एक दिन उस पिशाच ने अपनी स्त्री से कहा- ‘न मालूम हमने पिछले जन्म में कौन-से पाप किए हैं, जिसके कारण हमें इतनी दुःखदायी यह पिशाच योनि प्राप्त हुई है? पिशाच योनि से नरक के दुःख सहना कहीं ज्यादा उत्तम है।’ इसी प्रकार के अनेक विचारों को कहते हुए अपने दिन व्यतीत करने लगे।

Kalash Fourth Image भगवान की कृपा से एक बार माघ के शुक्ल पक्ष की जया एकादशी के दिन इन दोनों ने कुछ भी भोजन नहीं किया और न ही कोई पाप कर्म किया। उस दिन मात्र फल-फूल खाकर ही दिन व्यतीत किया और महान दुःख के साथ पीपल के वृक्ष के नीचे विश्राम करने लगे। उस दिन सूर्य भगवान अस्ताचल को जा रहे थे। वह रात इन दोनों ने एक-दूसरे से सटकर बड़ी कठिनता से काटी।

Kalash Fourth Image दूसरे दिन प्रातः काल होते ही प्रभु की कृपा से इनकी पिशाच योनि से मुक्ति हो गई और पुनः अपनी अत्यंत सुंदर अप्सरा और गंधर्व की देह धारण करके तथा सुंदर वस्त्रों तथा आभूषणों से अलंकृत होकर दोनों स्वर्ग लोक को चले गए। उस समय आकाश में देवगण तथा गंधर्व इनकी स्तुति करने लगे। इंद्रलोक में जाकर इन दोनों ने देवेंद्र को दण्डवत् किया।

Kalash Fourth Image देवेंद्र को भी उन्हें उनके रूप में देखकर महान विस्मय हुआ और उन्होंने पूछा- ‘तुम्हें पिशाच योनि से किस प्रकार मुक्ति मिली, उसका पूरा वृत्तांत मुझे बताओ।’

Kalash Fourth Image देवेंद्र की बात सुन माल्यवान ने कहा- ‘हे देवताओं के राजा इंद्र! श्रीहरि की कृपा तथा जया एकादशी के व्रत के पुण्य से हमें पिशाच योनि से मुक्ति मिली है।’

Kalash Fourth Image इंद्र ने कहा- ‘हे माल्यवान! एकादशी व्रत करने से तथा भगवान श्रीहरि की कृपा से तुम लोग पिशाच योनि को छोड़कर पवित्र हो गए हो, इसलिए हम लोगों के लिए भी वंदनीय हो गए हो, क्योंकि शिव तथा विष्णु-भक्त हम देवताओं के वंदना करने योग्य हैं, अतः आप दोनों धन्य हैं। अब आप प्रसन्नतापूर्वक देवलोक में निवास कर सकते हैं।’

Kalash Fourth Image ऐसे करें एकादशी की पूजा Kalash Fourth Image




Kalash Fourth Image एकादशी के दिन प्रात: स्नानादि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु का ध्यान करें फिर व्रत का संकल्प लेकर पूजन-क्रिया को प्रारंभ करें। इस दिन प्रभु को फल-फूल, तिल, दूध, पंचामृत आदि अर्पित करके उनका रोली-अक्षत से तिलक करके उन्हें पीले फूल चढ़ाएं।

Kalash Fourth Image एकादशी के दिन विष्णुजी के नाम का स्मरण करें एवं भजन-कीर्तन करें। इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ अवश्य ही करें।

Kalash Fourth Image एकादशी के दिन गरीबों और ब्राह्मण को भोज करा के दान-दक्षिणा देने का विशेष महत्व होता है। इस दिन यथा सम्भव सिर में तेल ना लगाएं और जमीन पर सोएं । मान्यता है कि जो भी कोई इस प्रकार विधि पूर्वक श्रद्धा से अजा एकादशी का व्रत रखता है उसकी सभी मनोकामनाएँ अवश्य ही पूर्ण होती हैं।


Kalash Fourth Image एकादशी के उपाय Kalash Fourth Image
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Kalash Fourth Image एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु के मंदिर में एक नारियल व थोड़े बादाम चढ़ाएं। इस उपाय से जीवन में आर्थिक लाभ की प्राप्ति होती है कार्यों में समस्त बाधाएं भी दूर हो जाती है ।

Kalash Fourth Image एकादशी के दिन प्रांत: भगवान विष्णु की पूजा करते समय कुछ पैसे विष्णु भगवान की मूर्ति या तस्वीर के सामने रख दें। फिर पूजन करने के बाद यह पैसे अपने पर्स में रख लें। अब हर एकादशी को पूजन के समय यह सिक्के भी पर्स से निकाल कर पूजा में रखा करें और पूजन के बाद फिर से अपनी जेब में रख लें । इस उपाय को करने से कभी भी पैसों की तंगी नहीं रहती है।

Kalash Fourth Image पीपल में भगवान विष्णु का ही वास माना गया है। यदि आप कर्ज से परेशान है तो एकादशी के दिन पीपल के वृक्ष पर मीठा जल चढ़ाएं और शाम के समय दीपक लगाएं। इस उपाय से शीघ्र ही कर्ज मुक्ति के योग प्रबल होते है , कार्यों में सफलता मिलती है , धन टिकता है ।

Kalash Fourth Image एकादशी के दिन सांय के समय तुलसी के पौधे के सामने गाय के घी का दीपक जलाकर और ऊँ वासुदेवाय नम: मंत्र बोलते हुुए तुलसी की 11 परिक्रमा करें । इस उपाय से घर के सदस्यों के मध्य प्रेम, सुख-शांति बनी रहती है उस परिवार पर किसी भी प्रकार का कोई संकट नहीं आता है।

Kalash Fourth Image एकादशी के दिन रात्रि में भगवान विष्णु के सामने नौ बत्तियों का दीपक जलाएं और एक दीपक ऐसा जलाएं जो रात भर जलता रहे। इससे माँ लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती है। उस जातक को जीवन में सभी सुख और ऐश्वर्य प्राप्त होते है।


Published By : Memory Museum
Updated On : 2019-02-15 06:28:00 PM



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