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दीर्घ आयु के उपाय



दिन में उत्तर दिशा की ओर मुंह करके मल-मूत्र का त्याग करने और रात में दक्षिणामुख होकर करने से आयु का नाश नहीं होता।
दातून, मंजन किए बिना देवताओं की पूजा कदापि भी नहीं करनी चाहिए। नदी तालाब में नंगा होकर अथवा रात के समय नहाने से यथा संभव बचना चाहिए। नास्तिक मनुष्यों कि संगत से दूर रहने में ही भलाई है । नहाने के बाद गन्दे ,गीले वस्त्र कभी भी नहीं पहनना चाहिए। रजस्वला स्त्री के साथ कभी भी सम्बन्ध स्थापित नहीं करना चाहियें। उपरोक्त बातों का ध्यान रखने वाला मनुष्य 100 वर्षों तक आयु का सुख भोगता है।

क्रोधहीन, सत्य बोलने वाले, प्राणियों से हिंसा न करने वाला, सभी को एक समान रूप से देखने वाला तथा छल कपट से दूर रहने वाले मनुष्य की आयु 100 वर्षों की होती है।
प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर फिर नित्यकर्म - स्नान आदि करने के बाद प्रात:काल की संध्या व शाम के समय भी विधिपूर्वक संध्या करने वाले मनुष्य भी दीर्घ आयु को प्राप्त होते है।

कभी भी दूसरों के पहने हुए वस्त्र व जूते नहीं पहनने चाहिए। दूसरों की निंदा व चुगली बिलुक भी नहीं करनी चाहिए। किसी से भी क्रूरता का व्यवहार नही करना चाहिए। असहाय, अपंग व कुरूप की कदापि हंसी नहीं उड़ानी चाहिए।
ब्राह्मण, गाय, राजा, स्त्री, दुर्बल, वृद्ध, गर्भिणी और बोझ लिए हुए मनुष्य यदि सामने आ जाएं तो उन्हें मार्ग देने के लिए स्वयं पीछे हट जाना चाहिए। इन बातों का ध्यान रखने वाले मनुष्य को अल्पायु नहीं होती है ।

अधिक उम्र चाहने वाले मनुष्य को पीपल, बड़ और गूलर के फल का तथा सन के साग का सेवन कभी भी नहीं करना चाहिए।
हाथ में नमक लेकर नहीं चाटना चाहिए इससे बुद्धि, धन और आयु का नाश होता है।
रात को चावल, दही, मूली और सत्तू नहीं खाना चाहिए। सुबह और शाम के समय ही सावधानी के साथ भोजन करना चाहिए, बीच में कुछ भी अनावश्यक खाना उचित नहीं है।
शत्रु के श्राद्ध में कभी भूलकर भी अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए।उपरोक्त निर्देशों का पालन करने वाला सौ वर्ष की आयु प्राप्त करता है।

बूढ़े-बुजुर्गो , परिवार के सदस्य और गरीब मित्र को अपने घर में अवश्य ही आश्रय देना चाहिए। परेवा, तोता और मैना आदि पक्षियों को घर में रहना बहुत ही मंगलकारी होता है। लेकिन यदि उल्लू, गिद्ध और जंगली कपोत घर में आ जाए तो तुरंत उसकी शांति करवानी चाहिए क्योंकि ये अमंगलकारी माने गए हैं।




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