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चिरथल्ला कुट्टम सेंट मैरी फैरोना चर्च


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चिरथल्ला कुट्टम सेंट मैरी फैरोना चर्च






भारत के केरल राज्य में एलापुजा जिले में चिरथल्ला नामक स्थान में एक ऐतिहासिक चर्च स्थित है जो ‘‘चिरथल्ला मुट्टम सेंट मैरी फैरोना चर्च’’ के नाम से जाना जाता है। यह चर्च प्रभु यीशु की माँ मदर मैरी के सम्मान में बनाया गया है। प्राचीन समय में यह शहर केरल के मुख्य व्यापारिक केन्द्रों में से एक था कहते है कि इस शहर को ज्यूस लोगों ने बसाया था, मान्यता है कि सबसे पहले संत थॉमस केरल में ही ईसाई धर्म का प्रसार-प्रचार करने आए थे तथा उन्होंने केरल में सात चर्चो की स्थापना की थी। उसके बाद जैसे-जैसे ईसाई धर्म में विश्वास करने वाले लोगों की संख्या बढ़ी लोगों ने आस-पास के क्षेत्रों में भी चर्च बना लिये। चिरथल्ला में बनाया गया मुट्टम चर्च उन्ही में से एक है। यह चर्च एक हजार तेईस ईसवीं में बनाया गया था तथा यह पुर्तगाली शैली में बना हुआ है। चर्च के अन्दर स्थापित मदर मैरी और अमलोलभव माता की मूर्ति को फ्रांस से मंगाकर उसकी स्थापना की गयी थी। इस मूर्ति में मदर मैरी के पवित्र एवं ममतामयी अद्भुत स्वरूप के दर्शन होते है।

सेंट मैरी मुट्टम् चर्च विष्व में मदर मैरी के उन चुनिंदा चर्चों में से एक है जहाँ हर धर्म के लोग मदर मैरी की पूजा अर्चना करने आते है। मान्यता है कि चर्च में स्थापित अमलोलभव माता अपने भक्तों की हर इच्छा, हर मनोकामना अवश्य पूरा करती है तथा उनके हर कष्टों को दूर करती है। यहाँ पर हर धर्म के लोग अपने किसी भी नये काम की शुरूआत करने से पहले चर्च आकर मदर मैरी का आशीर्वाद लेते है। लोगों का मानना है कि मदर मैरी उनकी हर इच्छा को प्रभु यीशु तक पहुँचाती है। मदर मैरी को मानवता की देवी माना जाता है, लोगों का मानना है कि वे हमारी भी माँ है और वे प्रभु यीशुु और मनुष्य के बीच की कड़ी है। लोगों का यह भी मानना है कि जैसे माँ अपने बच्चों का ध्यान रखती है वैसे ही मदर मैरी हम सबका ख्याल रखती है। मदर मैरी को वर्जिन मैरी कहा जाता है। इनका जन्म 8 दिसम्बर को मनाया जाता है। इसलिये मुट्टम् चर्च में 8 दिसम्बर के बाद आने वाले पहले रविवार को मदर मैरी का जन्मोत्सव बड़े ही श्रद्धा एवं उल्लास से मनाया जाता है। इसके अतिरिक्त दूसरा प्रमुख फीस्ट 8 जनवरी के दिन मनाया जाता है। इस दिन मदर मैरी और प्रभु जीज़स क्राइस्ट की मूर्तियों का जुलूस निकाला जाता है जिसमें बड़ी संख्या में केवल ईसाई ही नहीं वरन् हर धर्म के श्रद्धालु यहाँ दूर-दूर से आते है और माँ से अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रेयर करते है।


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