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छठ पर्व 2019

Chhath Puja 2019

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om छठ पूजा कैसे करे om
om chath pooja kaise karen om




सुख-समृद्धि,श्रेष्ठ सन्तान तथा मनोकामनाओं की पूर्ति का छठ पर्व भगवान सूर्य की आराधना का पर्व है। छठ का अर्थ है षष्टी , अतः षष्टी तिथि के दिन सूर्य षष्ठी का व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया है। छठ में प्रात:काल उगते सूर्य की पहली किरण और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य देकर दोनों का नमन करते है । छठ के ब्रत में लोग बिना अन्न जल के पूरे 36 घंटों तक उपवास रखते है।
छठ पर्व चार दिवसीय उत्सव है इस पर्व में पवित्रता और तपस्या का बहुत महत्व है, छठ पर्व की शुरुआत चतुर्थी तिथि को हो जाती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर किसी की कुंडली में कोई भी ग्रह दोष हो तो छठ पूजा में सूर्य देव का पूजन करने से उसका निवारण होता है। शास्त्रों के अनुसार सूर्य देव को अर्घ्य देने से यश और भाग्योदय की प्राप्ति होती है।
जानिए छठ पर्व, chhath parv,छठ पूजा कैसे करे, chath pooja kaise karen ।

छठ पूजा का शुभ मुहूर्त 2019

Kalash One Image 2 नवंबर दिन शनिवार
Kalash One Image छठ पूजा के दिन सूर्योदय – सुबह 6 बजकर 33 मिनट
Kalash One Image छठ पूजा के दिन सूर्यास्त – शाम 5 बजकर 35 मिनट
om वैसे तो भगवान सूर्य की उपासना का यह पवित्र पर्व मुख्यता बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में ही मनाया जाता था लेकिन धीरे धीरे यह पर्व ना केवल पूरे भारत वरन विश्वभर मे जहाँ जहाँ पर पूर्वांचल के इन राज्यो के लोग है मनाया जाने लगा है।

om भारत की राजधानी दिल्ली एवं आर्थिक राजधानी मुम्बई सहित पंजाब, हरियाणा,महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराँचल आदि राज्यो में भी इसका बहुत बड़े पैमाने पर आयोजन होने लगा है और यहाँ पर भी बड़ी संख्या में लोग पूर्ण श्रद्धा से छठ पर्व मनाते है ।

om मान्यताओं के अनुसार बिना डाला या सूप पर अर्घ्य दिए छठ पूजा का पूरा फल नहीं मिलता है। सांयकाल गंगा जल के साथ अर्घ्य दिया जाता है, जबकि प्रात: गाय के दूध से अर्घ्य दिया जाता है।

om छठ पूजा chhath parv का पर्व चार दिनों का अत्यंत कठिन महापर्व होता है जो कार्तिक शुक्ल की चतुर्थी तिथि से प्रारम्भ हो जाता है और यह कार्तिक शुक्ल की सप्तमी को पूर्ण होता है। छठ त्यौहार में बाजारों में लोग इसके लिए फल, गन्ना, डाली और सूप आदि की खरीददारी करते हैं।

om छठ पूजा chhath parv के प्रथम दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को ‘नहाय-खाय’ के रूप में मनाते है । छठ पर्व के प्रथम दिन श्रद्धालु अपने घर कि साफ़ सफाई करके अपने घर को पूरी तरह से शुद्ध करते है। इसमें छठी माता को जल एवं फूल अर्पित करते हुए आमंत्रण दिया जाता है।
इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु घी में बनाई लौकी की सब्जी, चने की दाल एवं चावल खाते हैं।

om नहाए-खाए के दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी को खरना किया जाता है। इसमें शाम को सूर्यास्त से पूर्व भगवान सूर्य देव को जल में पुष्प डाल का अर्घ्य दिया जाता है। खरना पूजन के साथ ही घर में देवी षष्ठी का आगमन माना जाता है।
पंचमी को दिन भर उपवास रखने वाले श्रद्दालु शाम के समय गुड़ से बनी खीर, रोटी और फल का प्रसाद ग्रहण करते है, फिर अगले दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने तक जल भी ग्रहण नहीं करते है ।
खरना का प्रसाद आस पास के सभी लोगो, परिचितों में बांटा जाता है, खरना के दिन ब्रती नमक और चीनी का उपयोग नहीं करते है।

om इसके अगले दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को छठ का प्रसाद बनाया जाता है। प्रसाद में चावल के लड्डू बनाये जाते है। शाम के समय एक बाँस की टोकरी में भगवान सूर्य को अर्घ्य देने वाले सूप को सजाकर लोग इसे लेकर पैदल ही घाट पर जाते है और सामूहिक रूप से सूर्य को अर्घ्य देते है।
सूर्य भगवान् को जल और दूध से अर्घ्य दिया जाता है एवं छठी मैया की प्रसाद से भरे हुए सूप से पूजा आराधना की जाती है।

om इस दिन संध्या को जल में कमर तक जाकर डूबते हुए सूर्य और दूसरे दिन उगते हुए सूर्य को अर्ध्य देकर उनसे अपने और अपने परिवार के लिए आशीर्वाद मांगते है।

om छठ पूजा chhath parv के चौथे यानि कार्तिक शुक्ल की सप्तमी को सभी लोग घाट पर फिर से उसी जगह पर इकठ्ठा होकर जहाँ पर उन्होंने संध्या को सूर्य देव को अर्घ दिया था प्रात: उगते हुए सूर्य कि पूजा करते हुए उन्हें अर्ध्य देते है, और उनसे गुणवान, दीर्घायु पुत्र, परिवार में सुख-समृद्धि की कामना करते हुए, उनसे आशीर्वाद माँगते हुए सभी लोग कच्चे दूध का शरबत पीकर अपना व्रत पूर्ण करते है।

om मान्यता है कि यदि जो भी जातक इन दिनों में प्रांत: सूर्य देव को अर्घ्य देते है भगवान सूर्य उनकी सभी मनोकामनाएँ अवश्य ही पूर्ण करते है ।

om अर्घ्य देते समय इन बातो का अवश्य ही ध्यान रखे :-

hand-logo दूध से अर्घ्य तांबे के पात्र में नहीं देना चाहिए।

hand-logo दूध से अर्घ्य पीतल के पात्र से देना ही श्रेयकर रहता है।

hand-logo जल से अर्घ्य पीतल और तांबे के पात्रों से ही प्रदान करना चाहिए।

hand-logo स्टील, काँच और प्लास्टिक के पात्रों से अर्घ्य नहीं देना चाहिए।




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ज्योतिषाचार्य अखिलेश्वर पाण्डेय
भृगु संहिता, कुण्डली विशेषज्ञ

वैदिक, तंत्र पूजा एवं अनुष्ठान के ज्ञाता


Published By : Memory Museum
Updated On : 2019-10-28 08:38:00 PM

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