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काल भैरव की उत्पत्ति

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काल भैरव की उत्पत्ति

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Kalash One Image काल भैरव / काल भैरव की उत्पत्ति Kalash One Image
Kalash One ImageKaal Bhairav / kaal bhairav ki utpatti Kalash One Image


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Kalash One Image भैरव नाथ की उत्पत्तिKalash One Image
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भैरव नाथ का अवतरण मार्गशीर्ष मास की कृष्णपक्ष अष्टमी को एक दिव्य ज्योतिर्लिंग से हुआ है भैरव शिव के पांचवे रूद्र अवतार माने गए है,
जानिए काल भैरव नाथ की उत्पत्ति कैसे हुई, Kal Bhairav Nath Ki Utpatti Kaise huyi. ।

Kalash One Image शास्त्रों के अनुसार एक बार कुछ ऋषि मुनियों ने सभी देवताओं से पूछा की आपमें सबसे श्रेष्ठ और सबसे महानकौन है। सभी ने एक सुर में कहा कि इस ब्रह्माण्ड में सर्व शक्तिशाली और सबसे पूजनीय भगवान भोलेनाथ जी ही है। यह बात सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी को पसंद नहीं आयी उन्होंने भगवान शंकर जी और उनके गणों की वेशभूषा देख कर भगवान शिव को अपमानजनक वचन कह दिए । अपने इस अपमान पर शिव ने तो कोई ध्यान नहीं दिया ।

Kalash One Image ब्रह्मा जी अपने पांचवें मुख से शिव जी को लगातार भला-बुरा कहने लगे। उस पाँचवे शीश ने कहा कि जो शिव अपने शरीर पर भस्म लगाते है, बिना वस्त्र के रहते है और जिनके पास रहने का ठिकाना और कोई धन वैभव ही नहीं है वह कैसे श्रेष्ठ हो सकते है। इन अपमानजनक वचनो को सुनकर सभी देवी देवताओ और वेदों को बहुत दुःख हुआ।

Kalash One Image उसी समय भगवान शँकर और पार्वती के तेज से एक तेज पुँज प्रकट हुआ, जो जोर जोर से रुद्रन कर रहा था । उस बालक को देखकर ब्रह्मा जी को लगा कि यह मेरे शरीर से निकला तेज है , यह समझकर ब्रह्मा जी को अपने गर्व हो गया, ब्रह्मा जी ने उस बालक का नाम रूद्र रखा। उन्होंने कहा तुम मेरे द्वारा अवतरित हुए हो अत: तुम भरण पोषण करने वाले होगे और तुम्हे सृष्टि में भैरव के नाम से भी जाना जायेगा ।

Kalash One Image महाकाल से उग्र,प्रचंड रूप में बालक रूप में जो भैरव प्रकट हुए वह ब्रह्मा जी द्वारा भगवान शंकर को कटु वचन कहने के कारण क्रोध में आकर ब्रह्मा जी का संहार करने लगे यह देखकर स्वयं भगवान शिव और देवताओं ने उन्हें शांत करने की कोशिश की।

Kalash One Image कहते है कि ब्रह्मा जी के पांच मुख थे तथा ब्रह्मा जी पाँचवे मुख से पांचवे वेद की भी रचना करने जा रहे थे, लेकिन ब्रह्मा जी का अहँकार नष्ट करने के लिए भैरव नाथ ने उनका संहार तो नहीं किया लेकिन अपने नाख़ून के प्रहार से ब्रह्मा जी की का पांचवा मुख काट दिया।

Kalash One Image इस पर भैरव को ब्रह्मा हत्या का पाप भी लगा और उन्हें " काल भैरव " भी कहा गया। इस श्राप से बचने के लिए शिव ने भैरव से कहा। कि ब्रह्मा के कटे नर मुण्ड को हाथ मे लेकर भीख मागँ कर प्रयाश्चित करो , और जब तक इस पाप से मुक्त ना हो जाओ तब तक त्रिलोक में भ्रमण ही करते रहो एवं किसी भी स्थान पर स्थाई और शांति से मत बैठो।

Kalash One Image परन्तु ब्रह्महत्या के पाप के कारण लालवस्त्र धारण की हुई , तीखेदाँत, और जिह्वा से लहु टपकाते हुए भयँकरा बाला भैरव नाथ को पीछे से दोडाने लगी। तब भगवान शिव जी ने भैरव नाथ से कहा कि आप काशी ( वाराणसी ) चले जाएँ और वही पर काशी के कोतवाल वनकर रहे, -- ब्रह्म हत्या बाला काशी नगर मे नही जा पाएगी।

Kalash One Image भैरव जी ने वैसा ही किया और काशी में पहुँचकर ब्रह्मा जी का शीश स्वत: ही उनके हाथ से छूठ गया और वह ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्त हो गए ।
उसी दिन से काल भैरव काशी के कोतवाल हुए, तथा जिस स्थान पर ब्रह्म जी का कपाल गिरा वह स्थान " कपाल मोचन" कहलाया।

Kalash One Image मान्यता है कि भगवान शंकर ने इसी मार्गशीर्ष की अष्टमी को भैरव रूप ब्रह्मा जी के अहंकार को नष्ट किया था, इसलिए इस दिन को भैरव अष्टमी व्रत के रूप में मनाते है। भैरव अष्टमी 'काल' का स्मरण कराती है, इसलिए मृत्यु के भय के दूर करने के लिए लोग इस दिन कालभैरव की उपासना करते हैं।

Kalash One Image वाराणसी के काशी हिन्दु विश्व विद्यालय के सामने विश्व प्रसिद्ध काल भैरव का मन्दिर है। इस मंदिर में नारियल और लड्डुओं का प्रसाद चढाया जाता है।

Kalash One Image समान्यता हिन्दू धर्म में भैरव नाथ जी को गहरा काला रंग, विशाल, स्थूल शरीर, अंगारे बरसाते हुए त्रिनेत्र, काले चोगेनुमा वस्त्र, कंठ में रूद्राक्ष की माला, हाथों में लोहे का भयानक दण्ड दिखाते हुए उग्र देवता के रूप में ही चित्रित क्या गया है।

Kalash One Image भैरव नाथ समस्त रोगों, कष्टों और विपत्तियों के अधिदेवता हैं। अर्थात रोग, कष्ट, विपत्ति एवं मृत्यु के समस्त दूत उन्ही के सैनिक अर्थात उनके अधीन हैं। इसीलिए काल भैरव के भक्त को किसी भी प्रकार का दैहिक, दैवी और भौतिक ताप नहीं सताते है।

Kalash One Image मान्यता है कि कालभैरव के पूजन से निर्भयता आती है, काल का भय दूर होता है, काल भैरव के भक्तो से बहुत पिशाच भी दूर रहते है, मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, शत्रु परास्त होते है, किसी भी तरह की समस्या से मुक्ति शीघ्र मिलती है।

Kalash One Image कालान्तर में धीरे धीरे भैरव-उपासना की दो शाखाएं- बटुक भैरव तथा काल भैरव के रूप में प्रसिद्ध हुईं। जहां बटुक भैरव सौम्य स्वरूप में अपने भक्तों को अभय देने वाले हैं वहीं काल भैरव आपराधिक प्रवृत्तियों पर अंकुश करने वाले दंडनायक के रूप में जाने जाते है।

Kalash One Image पुराणों में अष्ट-भैरव का उल्लेख है जो असितांग-भैरव, रुद्र-भैरव, चंद्र-भैरव, क्रोध-भैरव, उन्मत्त-भैरव, कपाली-भैरव, भीषण-भैरव तथा संहार-भैरव के नाम से जाने जाते है।

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गोमती तटे भैरव मन्दिर के पुजारी
पंडित अमित मिश्रा जी


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