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भगवान धन्वन्तरि

Bhagwan Dhanvantari

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भगवान धन्वन्तरि
Bhagwan Dhanvantari


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भगवान धन्वन्तरि की कृपा से रोगो को दूर करें
Bhagwan Dhanvantari ki kripa se rogo ko dur karen


इस संसार में हर मनुष्य को जीवन में किसी ना किसी रोग का अवश्य ही सामना करना पड़ता है , और बच्चो एवं बड़े बुजुर्गो तो आसानी से किसी ना किसी रोग की पकड़ में आ ही जाते है । दीपावली Dipavali से दो दिन पूर्व पड़ने वाले पर्व धनतेरस को वैध शिरोमणि भगवान धन्वन्तरि Bhagwan Dhanvantari का दिन माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार इस दिन जिस घर में इनकी विधिवत पूजा , आराधना होती है उस घर पर किसी भी प्रकार के रोग की छाया भी नहीं पड़ती है,
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Kalash One Image धन्वंतरी Dhanvantari को हिन्दू धर्म में देवताओं के वैद्य माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शरद पूर्णिमा को चंद्रमा, कार्तिक द्वादशी को कामधेनु गाय, त्रयोदशी को धन्वंतरी, चतुर्दशी को काली माता और अमावस्या को भगवती लक्ष्मी जी का सागर से प्रादुर्भाव हुआ था। इसीलिये दीपावली Dipavali के दो दिन पूर्व धनतेरस को भगवान धन्वंतरी Bhagwan Dhanvantari का जन्म धनतेरस के रूप में मनाया जाता है।

Kalash One Image इसी दिन इन्होंने आयुर्वेद का भी प्रादुर्भाव किया था। इन्हे भगवान विष्णु का रूप कहते हैं जिनकी चार भुजायें हैं। भगवान धन्वन्तरि Bhagwan Dhanvantari उपर की दोंनों भुजाओं में शंख और चक्र धारण किये हुये हैं। जबकि दो अन्य भुजाओं मे से एक में जलूका और औषध तथा दूसरे मे अमृत कलश लिये हुये हैं। इनका प्रिय धातु पीतल माना जाता है। इसीलिये धनतेरस Dhanteras को पीतल आदि के बर्तन खरीदने की परंपरा भी है। इन्होंने ही अमृतमय औषधियों की खोज की थी।

Kalash One Image चूँकि भगवान धन्वंतरि Bhagwan Dhanvantari आयुर्वेद के जनक माने गये है इसीलिए यह दिन आरोग्य और दीर्घायु प्राप्ति का दिन भी माना गया है ।

Kalash One Image इस दिन भगवान धन्वन्तरि Bhagwan Dhanvantari की अनिवार्य रूप से पूजा करनी चाहिए । धनतेरस Dhanteras के दिन घर परिवार के सभी सदस्यों के निरोगी जीवन के लिए, सभी सदस्यों की लम्बी आयु , चिर यौवन के लिए भगवान धन्वन्तरि Bhagwan Dhanvantari की मूर्ति / फोटो की स्थापना करनी चाहिए ।
शास्त्रों के अनुसार इस दिन प्रभु धन्वंतरि Dhanvantari के चित्र के सामने एक चाँदी / ताम्बे के पात्र में जल रखकर , धूप दीप जलाकर ,अगर संभव हो तो चांदी के पात्र में खीर / सफ़ेद मिष्ठान रखकर उन्हें भोग लगाएं । उन्हें फल, नैवैद्य, नारियल, पान, लौंग, सुपारी, वस्त्र (मौली) गंध, अबीर, गुलाल पुष्प, रोली, आदि चढ़ाएं । भगवान धन्वन्तरि Bhagwan Dhanvantari को शंखपुष्पी, तुलसी, ब्राह्मी आदि पवित्र औषधियां एवं दक्षिणा भी अर्पित करें।

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Kalash One Image फिर अपने घर परिवार से रोगो को दूर करने हेतु हाथ में अक्षत लेकर,
“ऊँ रं रूद्र रोगनाशाय धन्वन्तर्ये फट्।।” की कम से काम दो माला का जाप करें ।

तत्पश्चात ॐ धन्वंतरये नमः॥ मंत्र की एक माला का जाप भी अवश्य ही करें ।

Kalash One Image पूजा के बाद भगवान धन्वन्तरि Bhagwan Dhanvantari के सामने रखा जल घर के कोने कोने में , छत पर, सभी सदस्यों पर छिड़ककर शेष जल तुलसी के पौधे पर अर्पित कर दें ।

Kalash One Image इस प्रकार धनतेरस Dhanvantari के दिन भगवान धन्वन्तरि Bhagwan Dhanvantari की सच्चे मन से पूजा, अर्चना, प्रार्थना करने से मनुष्य को सभी रोगो में लाभ की प्राप्ति होती है, रोग उस परिवार से दूर ही रहते है ।

Published By : Memory Museum
Updated On : 2018-11-03 03:39:00 PM

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