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मनुष्य की आयु घटाने व बढ़ाने वाले कर्म


अपवित्र अवस्था में सूर्य, चंद्रमा और नक्षत्र की ओर देखने वाला, बड़े बुजुर्गो के आने पर खड़े होकर उनको प्रणाम नहीं करने वाला, उनका आदर सत्कार न करने वाला , घर में टूटे फूटे बर्तनों का उपयोग करने वाला, मात्र एक ही वस्त्र पहनकर भोजन करने वाला, नंगे बदन तथा अपवित्र अवस्था में ही सोने वाला मनुष्य भी अल्पायु होता है।
सिर पर तेल लगाने के बाद उसी हाथ से बचा हुआ तेल शरीर के दूसरे अंगों पर नहीं लगाना चाहिए।
जूठे मुंह, जूठे हाथों से पढ़ने -पढ़ाने से भी आयु का नाश होता है।
बोए हुए खेत में, आबादी के पास तथा पानी में मल-मूत्र करने वाला, सामने परोसे हुए अन्न की निंदा करने वाला, भोजन से पूर्व हाथ मुँह न धोने वाला और भोजन करते समय बात करने वाले मनुष्य की आयु भी कम होती है।
लंबी आयु चाहने वाले मनुष्यों को जूठन भी घर से दूर ही फेंकना चाहिए।

शास्त्रों के अनुसार पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके ही हजामत बनवाना चाहिए। हजामत बनवाकर बिना नहाए रहने से भी आयु का नाश होता है।
व्यक्ति को किसी से ईष्र्या नहीं करना चाहिए। ईष्र्या करने से भी आयु का अवश्य ही नाश होता है।
बिना बुलाए कहीं भी नहीं जाना चाहिए किंतु पूजा/यज्ञ देखने के लिए बिना निमंत्रण के भी चला जाना चाहिए है। जहां व्यक्ति का आदर न होता हो, अपमान हो वहां जाने से भी आयु का नाश होता है।
निषिद्ध समय में कभी अध्ययन नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से भी ज्ञान व आयु का नाश हो जाता है।

शास्त्रों के अनुसार गुरु के साथ कभी भी जिद नहीं करनी चाहिए। यदि गुरु नाराज़ हों तो भी उन्हें हर तरह से सम्मान देकर उन्हें मनाकर प्रसन्न करने की चेष्ठा अवश्य ही करनी चाहिए। गुरु जैसा भी बर्ताव करते हों तो भी उनके प्रति सदैव अच्छा ही बर्ताव करना चाहिए। क्योंकि गुरु की निंदा से मनुष्यों की आयु कम हो जाती है| इसी तरह महात्माओं की निंदा करने से भी मनुष्य की आयु कम होती है।

जो मनुष्य अपने पर्वों/त्योहारों के दिन ब्रह्मचर्य का पालन नहीं करता है , किसी भी व्यक्ति के साथ एक ही बर्तन में भोजन करता है, जो ऐसा अन्न खाता है तथा जिसमें से सार निकाल लिया गया हो, भोजन के बाद बाल संवारता है उसकी भी उम्र अधिक नहीं होती है।

जो मनुष्य यदि शाम के समय सोता है, पढ़ता है या भोजन करता है। रात के समय श्राद्ध करता है, नहाता है व दही या सत्तू खाता है, रात के समय खूब डंटकर भोजन करता है, ऐसा मनुष्य भी अधिक उम्र तक जीवित नहीं रहता है।

शास्त्रों के अनुसार जो कन्या किसी अंग से हीन हो अथवा अधिक अंग वाली हो, जिसका गोत्र अपने ही समान हो या जो नाना के कुल में ही उत्पन्न हुई हो, उसके साथ विवाह नहीं करना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, जो नीच कुल में पैदा हुई हो, जिसके कुल का पता न हो जिसके शरीर का रंग पीला हो तथा जो कुष्ठ रोग वाली हो, उसके साथ विवाह करने से मनुष्य की आयु अवश्य ही कम होती है।

जो मनुष्य अपवित्र मनुष्यों को देखता स्पर्श करता या उनके साथ रहता है, जो बहुत कामी होता है जो वासना में अंधा होकर कुमारी कन्या, चरित्रहीन स्त्री या वेश्या से सम्बन्ध बनाता है, जो पत्नी के साथ दिन में कभी भी तथा रजस्वला अवस्था में समागम करता है, उसे भी अवश्य ही अल्प आयु प्राप्त होती है।

जो मनुष्य भोजन करने के बाद हाथ-मुंह धोए बिना अपवित्र रहता है, और ऐसी अवस्था में ही अग्नि, गाय तथा ब्राह्मण का स्पर्श करता है ऐसे व्यक्ति को यमदूत शीघ्र ही ले जाते हैं।

* पलंग पर सदैव सीधा ही सोना चाहिए कभी भी तिरछा नहीं सोना चाहिए।
* नास्तिक मनुष्यों के साथ कभी भी संगत नही करनी चाहिए।
* आसन को कभी भी पैर से खींचकर नहीं बैठना चाहिए।
* स्नान किए बिना मनुष्य को चंदन नहीं लगाना चाहिए।
* बार-बार अपने मस्तक पर पानी नहीं डालना चाहिए।
* जो भी मनुष्य जाने अनजाने ये काम करता है, उसकी आयु भी अवश्य ही कम होती हैं।



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