Saturday, July 4, 2020
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गुरु ग्रह के उपाय | गुरु को अनुकूल कैसे करें

गुरु ग्रह के उपाय | गुरु को अनुकूल कैसे करें

गुरु ग्रह Guru Grah का शुभाशुभ प्रभाव एवं गुरु ग्रह के उपाय Guru Grah Ke Upay ——-

* गुरु ग्रह, guru grah अर्थात ब्रहस्पति ग्रह हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। पुराणों के अनुसार बृहस्पति देव समस्त देवी-देवताओं के गुरु हैं। वे महर्षि अंगिरा के पुत्र हैं। उनकी माता का नाम सुनीमा है। इनकी बहन का नाम ‘योग सिद्धा’ है। धनु और मीन राशि के स्वामी गुरु ग्रह guru grah के गुरु, मंगल, चंद्र मित्र ग्रह हैं, शुक्र और बुध शत्रु ग्रह और केतु और राहु सम ग्रह हैं।

* गुरु ग्रह, guru grah को धनु व मीन राशियों का स्वामी , गुरुता / गंभीरता एवं अध्ध्य्यन व आध्यात्मिकता का कारक भी माना जाता है। अशुभ गुरु, ashubh guru,जीवन में कई संकट पैदा करता है किंतु ucch ka guru, उच्च का गुरु, होने से बहुत से लाभ मिलते हैं।

* गुरु ग्रह, guru grah यदि मजबूत हो तथा शुभ भावों में बैठा हो तो ऐसे में जातक को भौतिक से ज्यादा आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।

* बृहस्पति ग्रह का शुभाशुभ प्रभाव एवं उसके उपाय ——-

* गुरु गृह के अशुभ प्रभाव

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यदि बृहस्पति नकारात्मक रूप से जातक की जन्म कुंडली में स्थित है, अर्थात अशुभ गुरु, ashubh guru, है तो अति-आशावाद, मूर्खता, आलोचनीयता, पेट फूलना और शरीर में वसा की समस्याएं, गुर्दे और आंतों की समस्याएं, मानहानि, मधुमेह, अहंकार की समस्याएं को शिकायत रह सकती है।

  • यदि सोना खो जाए या चोरी हो जाए तो समझ जाइये की आप की कुंडली में ashubh guru,अशुभ गुरु बैठे है ।
  • यदि बिना कारण शिक्षा रुक जाए। व्यक्ति के संबंध में व्यर्थ की अफवाहें उड़ाई जाए तो यह भी ashubh guru, अशुभ गुरु का ही फल है ।
  • गुरु के अशुभ फल, guru ke ashubh phal, के कारण आँखों में तकलीफ होना, मकान और मशीनों की खराबी, अनावश्यक दुश्मन पैदा होना,आदि मुश्किलों का सामना करना पड़ता है
  • ashubh guru, अशुभ गुरु के कारण धोखा होना, साँप के सपने दिखना आदि होता है ।
  • साँस या फेफड़े की बीमारी, गले में दर्द आदि भी गुरु के अशुभ फल, guru ke ashubh phal ही है । गुरु विशेषतया पुत्र संतान का भी प्रतिनिधि ग्रह है यदि कुंडली में ashubh guru,अशुभ गुरु बैठे है
  • तो जातक को संतान सुख प्राप्त होने में भी देरी होगी व महिलाओं की कुण्डली में यही गुरु पति का कारक होता है।
  • जिस भी स्त्री का गुरु कमजोर हो, उसके विवाह में विलंब होने के साथ उसका दाम्पत्य भी सुखी नहीं रहता है।

* गुरु गृह के शुभ प्रभाव

  • बृहस्पति जब कुंडली में उच्च अवस्था में बैठा हो,
  • तो वह ऐश्वर्य, सुख, संपन्नता देता है। ऐसे जातक को अपने दादाजी से खूब स्नेह मिलता है।
  • परिवार में बड़ों का सम्मान होता है और घर का माहौल आध्यात्मिक होने के साथ ही रीति-रिवाजों को निभाने वाला होता है।
  • ऐसे व्यक्ति के जीवन में पढ़ाई को लेकर कोई बाधा नहीं आती।
  • गुरू की कृपा से व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि, मान सम्मान, धन संपदा, प्रसिद्धि, शांति प्रसन्नता, स्वास्थ्य इत्यादि आता है।
  • गुरू कृपा के प्रभाव वाले व्यक्ति को लक्की कह सकते हैं।

* गुरु गृह को अनुकूल बनाने के उपाय

* यदि आपकी कुंडली में भी गुरु ग्रह, बृहस्पति देव पीड़ित /कमजोर होकर स्थित है तो करे निम्नलिखित उपाय और बनाये मजबूत—-

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गुरु यंत्र :– गुरु ग्रह के शुभ फलो हेतु गुरु यंत्र को धारण करना चाहिए। इस यंत्र को धारण करने से गुरु ग्रह के अशुभ प्रभाव दूर होते है। जातक को विद्या, विवेक, बुद्धि, सुख-समृद्धि, यश और योग्य जीवन साथी की प्राप्ति होती है, परिवार के सदस्यों के मध्य प्रेम रहता है एवं दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है। इस यंत्र को सोने, पीतल या काँसे के ताबीज में भरकर गुरुवार के दिन शुभ चौघड़ियों में पीले सूती या पीले रेशमी धागे में बांध कर गले या बाँह में धारण करना चाहिए। एवं गुरु यंत्र को नित्य या गुरुवार के दिन अवश्य ही देखकर पढ़ना चाहिए।

गुरु ग्रह का तांत्रिक मन्त्र :- “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:”।।

गुरु पौराणिक मन्त्र :- ” ॐ बृं बृहस्पतये नम:”।।

उपरोक्त दोनों मंत्रो में से किसी भी एक मन्त्र का विधिवत जाप कराने से बृहस्पति के अशुभ फल निश्चय ही दूर होते है। गुरु मन्त्र का कम से कम 19000 या अधिकतम 76000 जप पूर्णतया फलदाई होता है।

बृहस्पति ग्रह के दान :– (Guru Grah Ke Dan): यदि कुंडली में बृहस्पति ग्रह अशुभ फल दे रहे हो तो गुरुवार के दिन प्रात: सोना, काँसा, पीतल, घी, शक्कर, चने की दाल, हल्दी, पीले फूल, पुखराज एवं पाठ्य पस्तकें आदि किसी सात्विक ब्राह्मण को पूर्ण श्रद्धा से दक्षिणा सहित दान चाहिए, इससे गुरु ग्रह के अशुभ फल दूर होते है, शुभ फल मिलने लगते है।

  • बुजुर्गों का सम्मान करें और साधु संन्यासियों को भी सम्मान दें। गाय को केले खिलाएं।
  • पीपल के पेड़ की सेवा करना और मंदिर में चने की दाल का दान देने से गुरू मजबूत होता है।
  • पीली खाद्य वस्तु, पुष्प, सोना, कस्तूरी, पीले फूल-फल का दान, गुरु, कुल गुरु ब्राह्मण का आशीर्वाद, सेवा सदैव शुभ फल देने वाली होती है।
  • बृहस्पति वार का व्रत रखने, चने की दाल गाय को खिलाने, पीपल की (रविवार के अतिरिक्त) पूजा करने, से विशेष लाभ होता है।
  • पीले-पारदर्शक पेपर की पांच परतों को दोनों तरफ मोड़ करके पाऊच बना कर उसमें थोड़ा-सा केसर रख कर उस छोटे से कागज को बहते हुए जल में प्रवाहित करना लाभप्रद होता है।
  • किसी गरीब ब्राह्मण को पीले कपड़े, हल्दी, केसर, केले, पीले रंग की दाल आदि का दान करें।
  • भगवान दत्तात्रेय की पूजा करें या आप अपने स्तर पर किसी भी आध्यात्मिक गुरू का चुनाव कर सकते हैं एवं उनकी पूजा करें ।
  • गुरुवार के दिन केले के पेड़ का पूजन एवं बृहस्पतिवार का व्रत करें तथा कथा श्रवण करें।
  • हर गुरूवार को स्नान करने के पश्चात पीला वस्त्र पहनकर 108 बार गुरु के बीज मंत्र ॐ ह्रीं क्लीं हूँ बृहस्पतये नमः इस मंत्र का जाप करें।
  • ध्यान रखे पीपल के वृक्ष के पास कभी गंदगी न फैलाएं व जब भी कभी किसी मंदिर, धर्म स्थान के सामने से गुजरें तो सिर झुकाकर, हाथ जोड़कर जाएं।

Published By : Memory Museum
Updated On : 2020-01-01 10:35:00 PM

Amit Pandit ji
ज्योतिषाचार्य डॉ० अमित कुमार द्धिवेदी
कुण्डली, हस्त रेखा, वास्तु
एवं प्रश्न कुण्डली विशेषज्ञ

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