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गणेश उत्सव

गणेश उत्सव Ganesh Utsav हिन्दुओं का एक प्रमुख पर्व है जो कि भाद्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से 10 दिनों तक बड़े धूम- धाम से मनाया जाता है। इन दस दिनों में विघ्ननाशक भगवान गणेश की विशेष पूजा का विधान है।
बहुत ही भाग्यशाली होते है वह लोग जो गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi / गणेशउत्सव GaneshUtsav में पूर्ण श्रद्धा और अपने सामर्थ्य के अनुसार अपने घर / प्रतिष्ठान में भगवान गणपति की स्थापना करते है या इन दिनों नित्य प्रभु गजानन की पूजा अर्चना करते है ।

गणेश पुराण के अनुसार गणेश उत्सव Ganesh Utsav / गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi में भगवान गणपति जी की पूर्ण श्रद्धा से विधिपूर्वक पूजा करने से गणेश जी की अपने भक्तों के सारे कष्ट, अनेक सारे संकट हर लेते है उसकी समस्त मनोकामनाए पूर्ण करते है।

शास्त्रो के अनुसार भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मध्याह्न में भगवान गणेश जी का जन्म हुआ था । भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में होने के कारण ही गणेश पूजा के लिये मध्याह्न ( दोपहर ) के समय को सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है।

गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi के दिन, भगवान गणेश जी की स्थापना और गणेश जी की विधिवत पूजा, मध्याह्न के दौरान की जानी चाहिये, तभी श्रेष्ठ फलो की प्राप्ति होती है।

इस वर्ष 2018 में गणेश उत्सव Ganesh Utsav, गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi 13 सितंबर दिन गुरुवार के दिन मनाई जाएगी । गणेश पूजा का समय मध्याह्न 11:03 से 01:30 तक रहेगा ।

गणपति स्थापना / आराधना

गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi के दिन बहुत से लोग अपने अपने घरों में भगवान गणेश जी Ganesh ji की नई मूर्ति को स्थापित करते हैं एवं अंतिम दिन गणेश प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता है। गणेश चतुर्थी Ganesh Chturthi के दिन एक विशेष विधि से गणेश प्रतिमा को स्थापित किया जाता है।

घर में बैठे हुए गणेश जी Ganesh ji और कार्यस्थल पर खड़े गणपतिजी का चित्र लगाना ही हितकर होता है। लेकिन ये ध्यान रखें कि गणेशजी Ganesh ji के दोनों पैर जमीन का स्पर्श करते हुए हों, ताकि कार्य में स्थिरता आए।

गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करके शुद्ध लाल रंग के वस्त्र पहनना अति शुभ होता है। गणेश पूजा Ganesh Puja के लिये मध्याह्न ( दोपहर ) के समय को सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है।

श्री गणेश जी की प्रतिमा / फोटो ईशाण कोण में अथवा उत्तर दिशा में इस तरह स्थापित करें कि उनका श्री मुख पश्चिम दिशा की ओर रहे । गणेश जी की मूर्ति चित्र स्थापित करते समय नीचे लाल रंग का नया कपड़ा बिछाकर उस पर फूलो का आसान तैयार करें फिर उसके ऊपर गणपति जी की मूर्ति अथवा चित्र स्थापित करें । स्थापना / पूजा के दौरान “गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करना चाहिए।

स्थापना के पश्चात सर्वप्रथम भगवान श्री गणेश को पंचामृत से स्नान कराकर शुध्द जल से स्नान कराएं, तत्पश्चात रोली से तिलक करके भीगे अक्षत, दूर्वा, शमी पत्र, लाल फूल, घी, मोदक के लड्डू अर्पित करके उनकी पूजा आराधना करें ।

गणेशजी Ganesh ji की पूजा आराधना करते समय घी का दीपक जलाकर मूर्ति पर सिंदूर / रोली से तिलक करते हुए उनकी मूर्ति पर 11 /21 / 51 /101 दूर्वा चढ़ाएँ । इन दिनों भगवान गजानन को नित्य मोदक / गुड़ या बूंदी के लड्डुओं का भी भोग लगाएं। लेकिन ध्यान रखें कि उन्हें तुलसी कतई ना चढ़ाएँ ।

गणेश जी Ganesh ji की पूजा करते समय उन्हें पान के पत्ते और सुपारी भी चढ़ानी चाहिए और हल्दी, कुमकुम और दक्षिणा भी रखनी चाहिए। गणेश जी Ganesh ji को लाल फूल बहुत पसंद है अत: उनकी पूजा में लाल फूल चढ़ाना चाहिए । गणेश जी को सफ़ेद चन्दन और गेंदे का फूल भी नहीं चढ़ाना चाहिए ।

गणेश जी Ganesh ji को श्री फल या नारियल चढ़ाते हुए 21 लड्डुओं का भोग भी लगाना चाहिए, जिसे पूजा के बाद प्रशाद के रूप में बाँट दें, फिर कपूर जलाकर उनकी आरती करें।

सबसे अंत में सभी गलतियों की छमा याचना करते हुए भगवान को प्रणाम करना चाहिए। गणपति का पूजन शुद्ध आसन पर बैठकर अपना मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की तरफ करके करें।
गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi के 10 दिनों में प्रातः एवं संध्या के समय गणेश चालीसा, गणेश स्तुति, श्रीगणेश सहस्रनामावली, गणेश जी Ganesh ji की आरती, संकटनाशन गणेश स्तोत्र आदि का पाठ करें।

Published By : Memory Museum
Updated On : 2020-09-10 16:30:00 PM

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