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माता लक्ष्मी का दूसरा नाम कमला है । यह कमल के आसन पर हाथ में कमल को धारण किये हुए विराजमान है। लक्ष्मी जी दीपावली के दिन समुद्र मंथन से प्रकट हुई थी । माता लक्ष्मी भगवान विष्णु की हर्दय प्रिया है , दीपावली के दिन इनका पूजन , धन समृद्धि एवं सौभाग्य की प्राप्ति के लिए किया जाता है ।

इस दिन घर एवं व्यापारिक प्रतिष्टान के मुख्य द्वार के दोनों ओर दीवार पर शुभ - लाभ , स्वास्तिक , ॐ , आदि सौभाग्य चिन्हों को सिंदूर से अंकित करें तत्पश्चात उस पर पुष्प रोली चड़ाकर प्रार्थना करनी चाहिए ।

दिवाली पूजन का पूजन भर के पूजा कक्ष में अथवा तिजोरी रखने वाले कक्ष में करना उत्तम होता है ।

माँ लक्ष्मी विष्णु प्रिया है । दीपावली के पूजन के समय लक्ष्मी गणेश के साथ विष्णु जी की स्थापना करना अनिवार्य है । ध्यान रहे लक्ष्मी जी की दाहिने ओर विष्णु जी और बाएं ओर गणेश जी को रखना चाहिए ।

दिवाली पूजन के समय घर की महिलाएं माँ लक्ष्मी की किसी पुरानी तस्वीर पर अपने हाथ से सम्पूर्ण सुहाग की सामग्री अर्पित करें । अगले दिन स्नान के बाद पूजा करके उस सामग्री को माँ लक्ष्मी का प्रसाद मानकर खुद प्रयोग करें तथा माँ लक्ष्मी से अपने घर में स्थायी रूप से रहने की प्रार्थना करें , केवल इतना मात्र करने से ही उस घर में माँ की कृपा हमेशा बनी रहती है ।

यह कोशिश करें की पूजन में माँ लक्ष्मी को घर में बनी खीर का भोग लगायें बाजार की मिठाई का नहीं ।

शाम को दीवाली के पूजन से पहले आप किसी भी गरीब सुहागिन स्त्री को अपनी पत्नी के द्वारा सुहाग सामग्री अवश्य दिलवाएं , सामग्री में इत्र अवश्य हो ।

सांयकाल लक्ष्मी पूजन के मुहर्त के समय गृहस्वामी को अपने पूरे परिवार के साथ स्नान आदि करके पीले वस्त्र धारण करके पूजा के कमरे में प्रवेश करना चाहिए , प्रवेश करते समय माँ लक्ष्मी , भगवान गणेश , कुबेर जी , इंद्र जी , माता सरस्वती का ध्यान करना चाहिए । प्रवेश करने से पूर्व तीन बार ताली बजानी चाहिए ।

लक्ष्मी गणेश का चित्र / मूर्ति , कुबेर जी का चित्र , स्फुटिक श्री यंत्र और जिन भी यंत्रों की पूजा करनी हो उन्हें जल से पवित्र करके लाल वस्त्र से आच्छादित चैकी पर स्थापित करें ।

पूजन सामग्री को निम्नलिखित तरीके से रखना अति उत्तम होता है ।

बायीं ओर: --- जल से भरा पात्र , घंटी , धूप , तेल का दीपक आदि ।

दायीं ओर: --- घी का दीपक , जल से भरा हुआ दक्षिणवर्ती शंख ।

सामने : --- चन्दन, मौली , रोली , पुष्प (अगर कमल का फूल भी हो तो ओर भी उत्तम है ) नैवेद्ध, खील बताशे , मिष्टान ।

चौकी पर थोड़े से चावल का ढेर बनाकर उस पर एक सुपारी को मोली से लपेटकर रख दें फिर भगवान गणेश जी का आह्वान करना चाहिए ।

दक्षिण वर्ती शंख को अक्षत डालकर उसपर स्थापित करना चाहिए,फिर दूर्वा,तुलसी एवं पुष्प की पंखुड़ी दल कर उसे जल से भर देना चाहिए ।

किसी कटोरी में पान के पत्ते के ऊपर नैवेद्ध ( प्रसाद ) रखें उस पर लौंग का जोड़ा अथवा इलायची रखकर तब वह सामग्री माँ लक्ष्मी को अर्पित करनी चाहिए ।

पूजन के समय माँ लक्ष्मी के सामने अपनी तिजोरी से कुछ सोने चाँदी के सिक्के अथवा कोई भी आभूषण निकाल कर तब पूजन करना चाहिए ।

दीपावली के दिन देवों के राजा इंद्र की भी पूजा अवश्य ही करनी चाहिए ।

दीवाली के दिन बही खाता और तुला आदि की भी पूजा करनी चाहिए ।

दीपावली को दीपमालिका का पूजन करके दीपदान करना चाहिए । सबसे पहले एक थाली में ग्यारह मिटटी के कोरे दीपक धोकर रख लें , फिर उस में बत्ती डालकर उस में तेल भर दें पूजा चैकी के बायीं ओर उस थाली में कुछ मुष्प ओर अक्षत डालकर उसे रख दें , पूजा के समय उन्हें भी प्रज्ज्वलित करके रोली से उनका पूजन करें , खील बताशे आदि उन पर अर्पण करें । पूजा के बाद इन दीपकों को घर के मुख द्वार के दोनों ओर , तुलसी जी के समीप , रसोई , पूजास्थल , पेयजल रखने के स्थान पर , घर के आँगन अथवा चैक , घर की छत आदि पर रखकर दीपदान करें , और भी अधिक दीपक लगाने पर उन्हें इन्ही दीपक से जलाएं ।

कुछ खास बातें ।

पूजा में ताजे एवं सुगन्धित पुष्प ही चडाने चाहिए , पुष्प चडाते समय पुष्प का मुंह ऊपर की ओर होना चाहिए ।

शंख में जल आचमनी अथवा किसी चम्मच से भरना चाहिए शंख को जल में नहीं डुबोना चाहिए शंख के जल में थोडा सा चन्दन ओर फूल डाल देना चाहिए ,शंख को पृथ्वी पर नहीं रखना चाहिये. शंख से भरे जल में केसर, कर्पूर, चन्दन इत्र आदि डालना चाहिए ।

ताम्बें के पात्र में दूध , दही अथवा पंचार्मत नहीं रखना चाहिए ।

यदि कम सामग्री उपलब्ध हो तो हाथ में पुष्प रखते हुए उस वास्तु का नाम लेकर उसे श्रद्धा पूर्वक प्रभु को अर्पित करना चाहिए ।

दीवाली पर लक्ष्मी पूजन में देवी लक्ष्मी की आरती कपूर और नौ बत्ती के दीपक से करने पर माता लक्ष्मी अवश्य ही कृपा करती है । ( आप नौ मुँह वाला बना बनाया दीपक भी बाजार से लेकर उसमे बत्ती लगाकर आरती कर सकते है ।)

दीवाली पर माता लक्ष्मी के पूजन मे आरती के समय चाँदी की कटोरी मे कपूर जलाने से सभी प्रकार के संकटों से अवश्य ही मुक्ति मिलती है ।

दीपावली के दिन पति-पत्नी सुबह किसी भी विष्णु मंदिर में एक साथ जाकर वहां माता लक्ष्मी को वस्त्र चढ़ाएं, इससे कभी भी घर में धन की कमी नहीं रहेगी।

दीपावली के दिन इमली के पेड़ की टहनी काटकर उसे धोकर अपने घर कि अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान में रखें इससे धन में वृद्धि होगी और धन टिकेगा।

दीपावली वाले दिन पीपल के पेड़ की छाया में खड़े होकर चीनी, दूध और घी मिलाकर उसे पीपल की जड़ में डालें , घर हमेशा धन धान्य से भरा रहेगा।

यदि किसी व्यक्ति के जीवन में कोई आर्थिक संकट हो, तो दीवाली के दिन एक मिट्टी के बर्तन में शहद भर कर उसे ढँककर किसी सुनसान स्थान में गाड़ दें उसके सारे संकट समाप्त हो जायेंगे।

दीपावली के दिन माता लक्ष्मी को शुद्ध घी में बने हलवे का भोग लगाये और उसका प्रसाद वितरित करें ,उसके बाद यथा सम्भव हर शुक्रवार को यह करें तो माता लक्ष्मी कभी भी आपका साथ नहीं छोड़ेगी ।

जीवन में हर प्रकार से उन्नति करने के लिए व्यक्ति को चाँदी में निर्मित एवं प्राण प्रतिष्ठित नवरत्न लाकेट दीपावली के दिन माँ लक्ष्मी कि पूजा के बाद धारण करना चाहिए । इससे जातक को माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश कि कृपा से सभी दिशाओं से सुख समृद्धि और सफलता कि प्राप्ति होती है । यह लाकेट आप धनतेरस से दीवाली किसी है भी दिन खरीद सकते है ।

अगर कोई व्यक्ति दीपावली के दिन किसी भी विष्णु मंदिर में ऊंचाई पर पीली त्रिकोण आकृति कि पताका इस प्रकार लगा दे कि वह लगातार लहराती रहे तो उसका भाग्य शीघ्र चमक जाता है । यह ध्यान रहे कि झंडा हमेशा लगा रहे अगर वह कट फट जाये या उसका रंग ख़राब हो जाये तो उसको तुरंत बदलवा दें।

दीपावली की रात में चांदी की ढक्कन वाली डिबिया में नाग केसर व शहद भर कर उसे पूजा स्थान में रखे तथा पूजा के उपरांत उसे अपनी तिजोरी में लाल कपड़े बिछा कर स्थापित कर दें। उसे अगली दिवाली तक ऐसे ही रहने दें। फिर रोज़ वहाँ पर धूप अगरबत्ती दिखाएँ और श्री सूक्त का पाठ करें। तो सारे साल धन लाभ होता है।

दीपावली कि रात्रि को माँ लक्ष्मी कि पूजा के समय ग्यारह सफ़ेद गुंजा को भी पूजा स्थल में रखे। दूसरे दिन सुबह स्नान के बाद श्रद्धा पूर्वक इन्हे अपनी तिजोरी/धन स्थान में किसी चाँदी कि डिबिया/ चाँदी कि कटोरी में अथवा लाल कपड़े में बांधकर स्थापित कर दें । ऐसा करने से घर में अटूट लक्ष्मी का निवास होता है ।