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नए व्यापार का मुहूर्त



bishma pitamah


हर व्यक्ति कि नया व्यापार करने पर यही आशा रहती है कि उसका व्यापार खूब चले। परंतु सबको सफलता नहीं मिलती है कई बार बहुत से लोगो को व्यापार में घाटा और बहुत सी अड़चनों के कारण जल्दी ही अपना व्यापार बंद करना पड़ता है !ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह सामान्यता अशुभ मुहूर्त में कार्य आरम्भ करने के कारण होता है। इसलिए बेहतर यही है कि जब भी नया व्यापार करना हो तो उस समय मुहुर्त पर अच्छी तरह विचार कर लें । मुहुर्त जब शुभ हो तभी व्यापार करें अन्यथा शुभ मुहुर्त के आने की प्रतीक्षा करें।

vyapar tree
1. दुकान खालने के लिए जब आप मुहुर्त निकालें उस समय तिथि का भी विचार भी अवश्य करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दुकान खोलने के लिए सभी तिथि शुभ हैं परंतु रिक्ता तिथि यानी (चतुर्थ, नवम व चतुर्दशी) में में दुकान खोलने से बचना चाहिए।

2.नन्दा तिथियों एवं प्रतिपदा , षष्ठी और एकादशी तिथि के दिन नवीन योजना पर कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

3. नए व्यापार शुरू करने के लिए कृष्ण पक्ष (पूर्णिमा के अगले दिन से अमावस तक ) कि तिथि का त्याग करने में ही बुद्धिमानी है इसके लिए शुक्ल पक्ष (अमावस के अगले दिन से पूर्णिमा तक ) कि तिथियाँ ज्यादा शुभ होती है।

vyarap muhurt










4. नए व्यापार दुकान खोलने में मंगलवार को बिलकुल भी त्याग देना चाहिए । मंगलवार के अलावा आप किसी भी दिन दुकान खोल सकते हैं।

5. अमावस का दिन भी नए व्यापार कि शुरुआत के लिए शुभ नहीं है । 13 तारीख तथा यदि व्यक्ति के पिता कि मृत्यु हो चुकी है तो उनकी मृत्यु कि तिथि का भी त्याग कर देना चाहिए ।

6. भद्रा में भी नया काम बिलकुल भी नहीं करना चाहिए ।

7. हमेशा ध्यान दें कि कोई भी एग्रीमेंट कभी भी रविवार, मंगलवार या शनिवार को नहीं करना चाहिये।

8. असफलता से बचने के लिए जन्म राशि से चौथी, आठवीं और बारहवीं राशि पर जब चंद्र हो उस समय नया काम शुरू नहीं करना चाहिए।

9. शुक्ल पक्ष की 2nd दित्तीय, 3rd तृतीय, 5th पंचमी, 7th सप्तमी,10th दशमी, 12th दादशी, 13th त्रयोदशी तिथि व्यापार के लिए बहुत शुभ मानी गयी है। इन तिथियों को व्यापार शुरू करने से मनवाँछित सफलता मिलने के योग प्रबल रहते है ।

10. बुधवार के दिन उधार देना व मंगलवार को उधार लेना मुहूर्त की दृष्टि से कतई भी शुभ नहीं माना गया है।

11. युग तिथियां - सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग व कलियुग जिन तिथियों को ये युग आरम्भ हुए थे उन दिनों में भी कोई शुभ कार्य नहीं करने चाहियें। ये इस प्रकार से हैं :- सतयुग - कार्तिक शुक्लपक्ष की नवमी,

त्रेतायुग - बैशाख शुक्लपक्ष की तृतीया ,.

द्वापरयुग - माघ कृष्णपक्ष की अमावस्या,

कलियुग - श्रावण कृष्णपक्ष की त्रयोदशी |

किसी भी नए व्यापार में सफलता के लिए नीचे दिए गए उपायों को अपनाने से शीघ्र मनचाही सफलता प्राप्त होती है ।

12. नया व्यापार शुरू करने वाले व्यक्ति अपने व्यापार में सफलता के लिए 6 मुखी रुद्राक्ष चांदी के साथ धारण करें ।

13. नया व्यापार शुरू करने वाले व्यक्ति अपने व्यापार में सफलता के लिए गुरुवार को श्री विष्णु भगवान का व्रत रखें व किसी भी विष्णु मंदिर में मीठा प्रसाद चड़ाकर उसका वितरण करें।

14. नया व्यापार शुरू करने वाले व्यक्ति अपने व्यापार में सफलता के लिए पंच धातुओं की विभिन्न वस्तुऐं किसी भी जरूरतमंद को दान करें।

15.नया व्यापार शुरू करने वाले व्यक्ति अपने व्यापार में सफलता के लिए काले घोड़े की नाल दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली में पहनें।


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