Memory Alexa Hindi

तर्पण का महत्व

Tarpan Ka Mahtva

Tarpan Kaise karen
Tarpan Kaise karen
ड्रॉइंग रूम

तर्पण का महत्व


Tarpan Ka Mahtva


ड्रॉइंग रूम

हिन्दु धर्म शास्त्रों में- वसु, आदित्य और रुद्र इन तीन देवताओं को क्रमशः पितृ, पितामह और प्रपितामह का पोषण प्रतिनिधि माना है। हमारे विवाह में भी गात्रोच्चारण में पितृ, पितामह, प्रपितामह इन तीनों का ही उल्लेख होता है।

येन पितुः पितरो ये पितामहास्तेभ्यः पितृभ्योनमसा विधेम।

अर्थात्‌ पितृ, पितामह, प्रपितामाहों को हम श्राद्ध से तृप्त करते हैं।

त्रयाणामुदकं कार्य त्रिषु पिंडः प्रवर्तते।
चतुर्थः सम्प्रदातैषां पंचमो नापि विद्यते॥

अर्थात्‌ पिता, पितामह और प्रपितामह इन तीनों का श्राद्ध Shradh, तर्पण Tarpan, पिंडदान Pind Daan होता है। चौथा श्राद्धकर्ता स्वयं यजमान होता है, और यहाँ पर पाँचवें की कोई सम्भावना ही नहीं है।

Tags : पितृ, Pitra, पितृ पक्ष, Pitru paksha, श्राद्ध, Shradh, श्राद्ध पक्ष, Shradh Paksha, पितरों का श्राद्ध, Pitron Ka Shardh, तर्पण, Tarpan, तर्पण विधि, Tarpan Vidhi पितरों का तर्पण, Pitron ka Tarpan, तर्पण का महत्व Tarpan Ka Mahtva, हमारे पितृ, Hamare Pitra, पितृ पूजा, पितर देवता, Pitra Devta, पितृ विसर्जन, Pitra Visarjan, पितृ विसर्जन अमावस्या, Pitra Visarjan Amavasya 2017, पित्र दोष निवारण पूजा, Pitra Dosh Nivaran Puja, पितरों को कैसे प्रसन्न करें, Pitro Ko Kaise Prasan Kare, पितरों का आशीर्वाद कैसे प्राप्त करें, Pitron Ka Ashirwad Kaise Prapt Kare

hand logo तिल और पानी की जलांजली के माध्यम से हम अपने पित्रों को संतुष्ट करते हुए उनको और ऊंचे स्तर पर पहुंचा सकते हैं।
hand logo तर्पण Tarpan में हम उन्हें मंत्रों के साथ पानी और तिल की पेशकश करते हैं तर्पण Tarpan जो उन्हें बहुत पसंद है और वह शीघ्रता से प्रसन्न हो जाते है ।
महाभारत,आदि पर्व, 74.39 मे लिखा है

पुन्नाम्नॊ नरकादयस्मात्पितरम् त्रायते सुत:
तस्मात्पुत्र इति प्रॊक्त: स्वयमॆव स्वयम्भुवा

बेटा पिता को पुत नाम का नरक से बचाता है,इसलिए उसे स्वयंभु भगवान ने पुत्र नाम रखा था।

hand logo हमारे पूर्वजों की मौत के बाद हमें उनकी आगे की यात्रा के बारे में कुछ भी पता नहीं होता है, वे कहाँ, किस रूप में है, उन्होंने जन्म लिया है या नहीं, जन्म लिए है तो कहाँ किसी को कुछ भी पता नहीं होता है, लेकिन यह हमारा कर्तव्य है की हम उन्हें जीवित भी खुश रखें और उनकी मृत्यु के बाद भी। पितृ तर्पण Pitra Tarpan एक अद्भुत मौका है जिसमें देवताओं, वसु, रुद्र और आदित्य,चाहे हमारे पितृ किधर भी किसी भी रूप में हो, उनको सूक्ष्म माध्यम से हमारे जल और तिल को पित्रों के पास उत्तम रूप मे पहुंचा देते हैं।

hand logo चूँकि पितरों को भी पोषण की जरूरत है। इसलिए जब हम उनको तर्पण Tarpan देते हैं,वे संतुष्ट हो जाते हैं और हमें सुख, दौलत और सत संतति की आशीर्वाद देते हैं। और जब वे अच्छाई करते हैं,तब उसके हिसाब से उनको भी ऊंचाई मिल जाती है।

hand logo तर्पण Tarpan करने से पहले कुछ भी नहीं खाना चाहिए. उस दिन के रात में, किसी भी उपवास खाना खाना चाहिए|वैसे ही तिथि के पहले दिन की रात मे भी उपवास का खाना लेना है।
hand logo प्रतिदिन तर्पण के दिन की सुबह में गीले किए हुये और सूखे धोती / कपड़ा पहनना चाहिए. यदि संभव हो तो पिछली रात मे धोती को धो के एक स्थान पर लटकाए जिधर कोई नहीं छुए।

hand logo तर्पण करने से व्यक्ति के जन्म के आरंभ से तर्पण Tarpan के दिन तक जाने अनजाने किए गए पाप उसी समय नष्ट हो जाते हैं।
hand logo "समयानुसार श्राद्ध Shradh, तर्पण Tarpan करने से कुल में कोई दुःखी नहीं रहता। पितरों की पूजा Pitron Ki Puja करके मनुष्य आयु, पुत्र, यश, स्वर्ग, कीर्ति, पुष्टि, बल, श्री, पशु, सुख और धन-धान्य प्राप्त करता है। देवकार्य से भी पितृकार्य का विशेष महत्त्व है। देवताओं से पहले पितरों को प्रसन्न करना अधिक कल्याणकारी है।"

hand logo पितृपक्ष Pitra Paksh में तीन पीढ़ियों तक के पिता पक्ष के तथा तीन पीढ़ियों तक के माता पक्ष के पूर्वजों के लिए तर्पण Tarpan किया जाता हैं। तर्पण Tarpan करते समय एक पीतल के बर्तन में जल में गंगाजल, कच्चा दूध, तिल, जौ, तुलसी के पत्ते, दूब, शहद और सफेद फूल आदि डाल कर फिर एक लोटे से पहले देवताओं, ऋषियों, और सबसे बाद में पितरों का तर्पण Pitron ka Tarpan करना चाहिए।

hand logo कुश तथा काला तिल भगवान विष्णु के शरीर से उत्पन्न हुए हैं तथा चांदी भगवान शिव के नेत्रों से प्रकट हुई हैं। गाय का दूध और गंगाजल का प्रयोग श्राद्ध के कर्मफल को कई गुना तक बढ़ा देता है। तुलसी बहुत ही पवित्र मानी जाती है अत: इसके प्रयोग से पितृ अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

hand logo तर्पण Tarpan में कुशा (पवित्री) का प्रयोग अनिवार्य है। दो कुशा से बनाई हुई पवित्री (अंगूठी) दा‍हिने हाथ की अनामिका अंगुली तथा तीन कुशाओं से मिलाकर बनाई गई पवित्री बाईं अनामिका में धारण करें, यह आप खुद भी बना सकते या बाज़ार में किसी भी पूजा की दुकान में मिल जाता है।

hand logo पितरों के तर्पण Pitron Ke Tarpan में सोना-चांदी, कांसा या तांबे के पात्र का ही उपयोग करना चाहिए। लेकिन लौह के पात्र अशुद्ध माने गए हैं। अत: यथासंभव लोहे के बर्तनो का प्रयोग नहीं ही करना चाहिए ।

hand logo तर्पण Tarpan, श्राद्ध Shradh में तिल और कुशा सहित जल हाथ में लेकर देवताओं का तर्पण Devtaon Ka Tarpan करते समय पूर्व दिशा की तरफ मुँह करके देवताओं का नाम लेकर एक एक बार तपरान्तयामि बोलते हुए उन्हें मध्यमा ऊँगली से जल गिराते हुए जलांजलि दें ।

hand logo ऋषियों का तर्पण करते समय उत्तर दिशा की तरफ मुँह करके दो बार तपरान्तयामि, तपरान्तयामि बोलते हुए उन्हें मध्यमा ऊँगली के दोनों तरफ से जल गिराते हुए जलांजलि दें ।

hand logo इसके पश्चात दक्षिण दिशा की तरफ मुँह करके सबसे पहले भगवान यमराज फिर चित्रगुप्त का नाम लेते हुए और उसके बाद अपने सभी पितरों का नाम लेते हुए सबके नाम के बाद तीन बार तपरान्तयामि, तपरान्तयामि, तपरान्तयामि कहकर पितृ तीर्थ यानी अँगूठे के बगल की उँगली और अंगूठे के बीच से जलांजलि देते हुए जल को धरती में किसी बर्तन में छोड़ने से पितरों को तृप्ति मिलती है।


hand logoतर्पण करते समय पहले अपने ददिहाल के सभी पितरों उसके बाद अपने ननिहाल के सभी पितरों का नाम लेते हुए उनका तर्पण करें, फिर अपने वंश के भूले हुए, पितृ जिन तक आपका तर्पण पहुँचना चाहिए उन सभी पितरों को एक साथ जलांजलि देते हुए उनका तर्पण करें ।

hand logo अंत में पूर्व की ओर मुंह करके शुद्ध जल से सूर्य को अर्घ्य प्रदान करें।
hand logo ध्यान रहे तर्पण Tarpan का जल तर्पण के बाद किसी वृक्ष की जड़ में चड़ा देना चाहिए वह जल इधर उधर बहाना नहीं चाहिए ।

hand logo हमारे धार्मिक ग्रंथों के अनुसार तर्पण का जल सूर्योदय से आधे प्रहर तक अमृत, एक प्रहर तक शहद, डेढ़ प्रहर तक दूध और साढ़े तीन प्रहर तक जल रूप में हमारे पितरों को प्राप्त होता है। अत: हमें सुबह सवेरे ही तर्पण करना चाहिए ।

Loading...