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स्वर्ण मंदिर
Swarna Mandir


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स्वर्ण मंदिर
Swarna Mandir






भारत में सिक्खों के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में आनन्दपुर साहिब गुरुद्वारा का बहुत प्रमुख स्थान है। यह गुरुद्वारा पंजाब राज्य के उत्तर हरमिन्दर साहब यह स्वंर्ण मन्दिर पंजाब राज के अमृतसर में स्थित सिक्खों का अति पवित्र एवं प्रमुख गुरुद्वारा है। इस पवित्र स्वंर्ण मन्दिर के चारो ओर अमृतसर शहर बसा है।

हरमिन्दर साहब की नीव सिक्खों के पांचवे गुरु श्री अर्जुन देव जी ने लाहौर के एक सूफी संत से दिसम्बर 1588 में रखवायी थी।

पवित्र स्वंर्ण मन्दिर का निर्माण दिसम्बर 1588 से प्रारम्भ हुआ था तथा यह अगस्त् 1604 ई0 में पूर्ण हुआ था। यहीं पर सन् 1604 ई0 में गुरु ग्रंथ साहब का पहला प्रकाश किया गया था। हरमिन्दर साहब की इमारत पूर्ण होने पर वहाँ दैनिक सत्तसंग की मर्यादा कायम की गयी थी। इस गुरुद्वारे का बाहरी हिस्सा सेाने का होने के कारण ही इसे स्वंर्ण मन्दिर के नाम से जाना जाता है। इस पवित्र गुरुद्वारे को दरबार साहब के नाम से भी जानते है।

स्वंर्ण मन्दिर पवित्र अमृत सरोवर/झील के अन्दर बने द्वीप पर बना है इस मन्दिर में जाने के लिए किनारे से एक पुल जुड़ा है। इस सरोवर में स्नान करके, हाथ पैर धोकर लोग सीढ़ियों से मन्दिर तक जाते हैं। पूरा स्वंर्ण मन्दिर सफेद संगमरमर का बना है, इसकी दीवारों पर सोने की बहुत खूबसूरत नक्काशी की गयी है तथा पूरे मन्दिर पर सोने की परत चढ़ायी गयी है। मन्दिर से 100 मीटर की दूरी पर पवित्र स्वंर्ण जड़ित आकाल तख्त है जिसे सिक्खों का सबसे प्रमुख तख्त का दर्जा प्राप्त है। स्वंर्ण मन्दिर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए 24 घंटे खुला रहता है। पूरे गुरुद्वारे में फ्लड लाईट की अति उत्तम् व्यवस्था है जिससे रात के समय अति मनोहरी दृष्य दिखयी पड़ता है।

स्वंर्ण मन्दिर को कई बार हमलावरों ने नष्ट किया लेकिन हर बार श्रद्धालुओं ने इसे पुनः बना दिया। इसका वर्तमान स्वरुप महाराजा रणजीत सिंह जी ने प्रदान किया था उन्ही ने इसे सोने की परत से अलंकृत करवाया था।

वैसे तो यहाँ पर पूरे वर्ष ही श्रद्धालु आते हैं लेकिन लोहड़ी, वैसाखी, गुरुनानक पर्व, शहीदी दिवस, संक्रान्ती एवं प्रकाशोत्सव में यहाँ पर भारी भीड़ आती है, यहाँ पर श्रद्धालु सच्चे मन से अरदास करके अपनी इच्छाओं की पूर्ती प्राप्त करते हैं। यहाँ पर भक्त गण प्रसाद एवं लंगर जरुर ग्रहण करते हैं, कड़ाहा प्रसाद एवं लंगर 24 घंटे उपलब्ध रहता है।

स्वंर्ण मन्दिर के निकट ही अनेक प्राचीन, ऐतिहासिक एवं पवित्र गुरुद्वारे हैं जिसमें गुरुद्वारा बाबा अतल, गुरुद्वारा माता कौलन, गुरुद्वारा सारागढ़ी साहब, यारा साहब गुरुद्वारा, लाची बार बैर बाबा बुढ्ढा जी प्रमुख हैं।


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