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सूर्य ग्रहण का महत्व

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सूर्य ग्रहण 2017
Surya grahan 2017


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सूर्य ग्रहण का महत्व
Surya grahan ka mahtv


hand logo सूर्य ग्रहण ( Surya grahan ) एक बहुत ही प्रमुख खगोलीय घटना, प्रकृ्ति का एक अद्भुत चमत्कार है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रहण ( Surya grahan ) तब होता है, जब सूर्य आंशिक अथवा पूर्ण रूप से चन्द्रमा द्वारा बाधित हो जाए। अर्थात जब चन्दमा पृथ्वी और सूर्य के बीच यानि घूमते-घूमते चन्द्रमा, सूरज व पृथ्वी तीनो एक ही सीध में होते हैं और इस कारण चन्द्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है इसे सूर्यग्रहण कहा जाता हैं। सूर्यग्रहण अमावस्या के दिन में ही होता है।

hand logo वैदिक काल से ही हमारे ऋषि मुनियों को खगोलीय संरचना सूर्य ग्रहण, चन्द्र ग्रहण तथा उनकी पुनरावृत्ति का ज्ञान था । ऋग्वेद के अनुसार अत्रिमुनि के परिवार के पास यह ज्ञान उपलब्ध था। महर्षि अत्रिमुनि ग्रहण के ज्ञान को देने वाले प्रथम आचार्य थे।

वेदांग ज्योतिष से हमारे वैदिक पूर्वजों के इस महान ज्ञान का पता चलता है। प्राचीन काल से ही ग्रह नक्षत्रों की दुनिया की इस घटना का ज्ञान भारतीय मनीषियों के पास था उन्होंने सफलतापूर्वक इसकी गणना करनी शुरू कर दी थी। ग्रहण पर धार्मिक, वैदिक, वैचारिक, वैज्ञानिक विवेचन प्राचीन ज्योतिषीय ग्रन्थों से ही होता चला आया है।

hand logo खगोल शास्त्रीयों के अनुसार 18 वर्ष 18 दिन की समयावधि में 41 सूर्य ग्रहण ( Surya grahan ) और 29 चन्द्रग्रहण होते हैं। एक वर्ष में 5 सूर्यग्रहण ( Surya grahan ) तथा 2 चन्द्रग्रहण ( chandra grahan ) तक हो सकते हैं। किन्तु 4 से अधिक ग्रहण बहुत कम ही देखने को मिलते हैं।

hand logo एक दिलचस्प बात और है कि चन्द्र ग्रहण ( chandra grahan ) से कहीं अधिक सूर्यग्रहण ( surya grahan ) होते हैं। 3 चन्द्रग्रहण पर 4 सूर्यग्रहण का अनुपात आता है।

hand logo 21 अगस्त सोमवार को वर्ष 2017 का दूसरा सूर्यग्रहण है। ये सूर्यग्रहण ( surya grahan ) पूर्ण सूर्यग्रहण होगा, यह ग्रहण यूरोप, उत्तर/पूर्व एशिया, उत्तर/पश्चिम अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका में पश्चिम, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत, अटलांटिक, आर्कटिक की ज्यादातर हिस्सों में दिखेगा।
अमेरिकी महाद्वीप में 99 सालों बाद पूर्ण सूर्यग्रहण दिखाई देगा। अमेरिका में यह सूर्यग्रहण( surya grahan ) ऑरेगन के तट से सुबह 10.15 मिनट से दिखने लगेगा और दोपहर 2.50 बजे दक्षिण कैरोलीना के तट पर खत्म होगा, उत्तरी अमेरिका के सभी हिस्से में आंशिक सूर्यग्रहण ( surya grahan ) देखा जा सकेगा।

hand logo हालाँकि यह ग्रहण ( grahan ) भारत में दिखाई नहीं देगा। चूँकि यह सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए भारत में इसका सूतक भी मान्य नहीं है क्योंकि मान्यता है कि जिस जगह सूर्यग्रहण दिखता है वहीँ पर सूतक मान्य होता है।

hand logo लेकिन सूतक नहीं भी हो तो भी सूर्य ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर अवश्य ही पड़ेगा इसलिए सभी राशि के जातको को कुछ सावधानियाँ और ग्रहण के समय उपाय अवश्य ही करने चाहिए।

यह ग्रहण अफ्रीका महाद्वीप, हिन्द महासागर एंव आस्ट्रेलिया के पूर्वी तटवर्ती भू-भाग, अण्टाकार्टिका में दृश्य होगा।



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पं मुक्ति नारायण पाण्डेय
( कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )


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