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शरद पूर्णिमा

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जानिए, शरद पूर्णिमा पर आप कैसे पा सकते है माँ लक्ष्मी की असीम कृपा । 

शरद पूर्णिमा का महत्व


हिन्दु पंचांग के अनुसार हर मास की 15वीं तिथि है जिस दिन चंद्रमा आकाश में पूरा होता है पूर्णिमा कहलाती है। वैसे तो हर माह में ही पूर्णिमा आती है लेकिन शरद पूर्णिमा का महत्व उन सभी से बहुत अधिक है। आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता हैं। हिंदू धर्म शास्त्रों में भी इस पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है।

Laxmi
कहा जाता है कि धन की देवी माता लक्ष्मी का जन्म शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था। इसलिए देश के कई हिस्सों में लोग शरद पूर्णिमा को पूर्ण श्रद्धा से माँ लक्ष्मी का पूजन करते है। इस दिन प्रात: स्नान करके माँ लक्ष्मी को कमल का फूल एवं मिष्ठान अर्पण करके उनकी पूजा आराधना अवश्य ही करनी चाहिए जिससे उनका आशीर्वाद जीवन भर बना रहे ।

द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ तब मां लक्ष्मी राधा रूप में अवतरित हुई । शरद पूर्णिमा की रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण ने बंसी बजाकर गोपियों को अपने पास बुलाया था और उनके साथ रास रचाया था इसीलिए शरद पूर्णिमा को 'रास पूर्णिमा' या 'कामुदी महोत्सव' भी कहा जाता है । अतः शरद पूर्णिमा की रात्रि का विशेष महत्व है ।

Sharad Purnima
हिन्दु शास्त्रों के अनुसार शरद पूर्णिमा की मध्य रात्रि के बाद मां लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर बैठकर धरती पर आती हैं। और यह देखती हैं कि उनका कौन भक्त रात में जागकर उनकी भक्ति कर रहा है। इसलिए शरद पूर्णिमा की रात को 'कोजागरा' भी कहा जाता है। कोजागरा का अर्थ है कौन जाग रहा है।कहते है कि जो जातक इस रात में जागकर मां लक्ष्मी की पूजा अर्चना करते हैं मां लक्ष्मी की उन पर अवश्य ही कृपा होती है। ज्योतिषीयों के अनुसार भी जो इस रात को जागकर माता लक्ष्मी की उपासना करता है उसको मनवाँछित लाभ की प्राप्ति होती है और यदि उसकी कुण्डली में धन योग नहीं भी हो तब भी माता उन्हें धन-धान्य से अवश्य ही संपन्न कर देती हैं। उसके जीवन से निर्धनता का नाश होता है, इसलिए धन की इच्छा रखने वाले हर व्यक्ति को इस दिन रात को जागकर अवश्य ही माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए ।

शरद पूर्णिमा की रात्रि में चन्द्रमा की चाँदनी का लाभ अवश्य ही उठाना चाहिए इससे वर्ष भर स्वस्थ बने रहते है, मन प्रसन्न रहता है।

मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कुमार कार्तिकेय का जन्म भी शरद पूर्णिमा के दिन ही हुआ था। इसलिए इसे कुमार पूर्णिमा भी कहा जाता है। पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में इस दिन कुमारी कन्याएं प्रातः स्नान करके पूर्ण विधि विधान से भगवान सूर्य और चन्द्रमा की पूजा करती हैं। जिससे उन्हें योग्य एवं मनचाहा पति प्राप्त हो।

हिन्दु धर्म शास्त्रों में मान्यता है कि माँ लक्ष्मी को खीर बहुत प्रिय है इसलिए हर पूर्णिमा को माता को खीर का भोग लगाने से कुंडली में धन का प्रबल योग बनता है। लेकिन शरद पूर्णिमा के दिन माँ लक्ष्मी को खीर का भोग लगाने का और भी विशेष महत्व है।

शरद पूर्णिमा को दूध और चावल की खीर बनायें और उसमें चीनी की जगह मिश्री को डालें । इस खीर में अपनी सामर्थ्य के अनुसार मेवा भी डाले, विशेषकर केसर तो अवश्य ही डालें । खीर बनाने के बाद इसमें कुछ देर के लिए चाँदी एवं सोने की कोई भी वस्तु डाल देनी चाहिए जिससे खीर में लौह, स्वर्ण एवं रजत के गुण भी आ जाते है जो शरीर के लिए अत्यंत लाभदायक है ।

खीर को रात्रि 8 बजे तक बना कर साफ महीन कपडे से ढककर चन्द्रमा की चाँदनी में रखें, फिर रात्रि में या सुबह माँ लक्ष्मी को भोग लगाकर फिर स्वयं इस प्रशाद को ग्रहण करें । अगर रात में माँ को भोग लगाते है थोड़ी सी ही स्वयं भी खाएं, क्योंकि रात में मेवे की खीर पचाना आसान नहीं होगा । इस तरह से बनी खीर के सेवन से माँ लक्ष्मी की कृपा और निरोगिता प्राप्त होती है । घर परिवार के सदस्यों के बीच में प्रेम रहता है ।

माँ लक्ष्मी को खीर का भोग लगाकर फिर देवताओं के वैध अश्विनी कुमार से प्रार्थना करें की हे वैध राज हमारे शरीर की समस्त इन्द्रियों को पुष्ट करें, हमें सदैव स्वस्थ बनाये रखे , हमारा बल, वीर्य, तेज, ओज को बढ़ाइये। हमारे घर परिवार के सभी सदस्य आरोग्य और दीर्घ आयु को प्राप्त करें यह प्रार्थना करने के बाद खीर को ग्रहण करना चाहिए ।

ऐसा माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की किरणों में विशेष अमृतमयी गुण भी होता हैं, जिससे बहुत सी बीमारियों का नाश हो जाता हैं। इसी कारण शरद पूर्णिमा की रात को लोग गाय के दूध की खीर बनाकर माता लक्ष्मी को भोग लगाकर उसे अपने घरों की छतों पर रखते हैं जिससे वह खीर चंद्रमा की किरणों के संपर्क में आ जाये और उसके बाद अगले दिन सुबह उसका सेवन किया जाता है। इस खीर के सेवन से निरोगिता और दीर्घ आयु की प्राप्ति होती है। इस दिन बहुत से भक्त खीर का प्रसाद भी वितरण करते है।

इस समय चंद्रमा की उपासना भी करनी चाहिए।

इस दिन तांबे के बरतन में देशी घी भरकर किसी ब्राह्मण को दान करने और साथ में दक्षिणा भी देने से बहुत पुण्य की प्राप्ति होती है और धन लाभ की प्रबल सम्भावना बनती है। इस दिन ब्राह्मण को खीर, कपड़े आदि का दान भी करना बहुत शुभ रहता है ।

इस दिन श्रीसूक्त, लक्ष्मीसत्रोत का पाठ एवं हवन करना भी बेहद शुभ माना जाता है।

स्त्री को लक्ष्मी का रूप माना गया है अत: जो भी व्यक्ति इस दिन अपने घर की सभी स्त्रियों माँ, पत्नी, बहन, बेटी, भाभी, बुआ, मौसी, दादी आदि को प्रसन्न रखता है उनका आशीर्वाद लेता है, उनको यथाशक्ति उपहार देता है , माँ लक्ष्मी उस घर से कभी भी नहीं जाती है उस व्यक्ति को जीवन में किसी भी वस्तु का आभाव नहीं रहता है । इस दिन स्त्रियों का आशीर्वाद साक्षात माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद ही होता है, अत: उन्हें किसी भी दशा में नाराज़ नहीं करना चाहिए ।

शरद पूर्णिमा के दिन रात्रि में चन्द्रमा को एक टक ( बिना पलके झपकाये ) देखना चाहिए । इससे नेत्रों के विकार दूर होते है आँखों की रौशनी बढ़ती है ।

शरद पूर्णिमा के दिन रात को चन्द्रमा की चाँदनी में एक सुई में धागा अवश्य पिरोने का प्रयास करें , उस समय चन्द्रमा के प्रकाश के अतिरिक्त कोई भी और प्रकाश नहीं होना चाहिए। माना जाता है इस प्रयोग को करने से, अर्थात सुई में धागा सफलता पूर्वक पिरोने से वर्ष भर ऑंखें स्वस्थ रहती है ।



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1.
खाने को घी नसीब नही हो रहा और आप कहते की ताँबे के बर्तन में घी भरकर पंडित्तो को दान करो मेरे विचार से ये गलत हे
bhuralal  

2.
अगर कोई व्यक्ति करना चाहे तो वह ताम्बे के छोटे से बर्तन में प्रतीक के रूप में भी 50 , 100 ग्राम घी का दान भी कर सकता है ।
admin memorymuseum.net  

3.
Satkarm
Ambadutt mishra   

4.
Guru ji
meri arteek samasya bahut najuk hai paisa kamata hu par aaj Tak baca nahi paya Ghar bhi nahi banwa pa raha hu Ghar par koi sai nahi hai kripya koi upai bataiye contact Nambar 8742929949
Dileep tiwari  

5.
शनिवार के दिन पीपल का पत्ता तोड़कर दूकान में जंहा आप बैठते है उसके नीचे रखने से व्यापार में बढ़ोत्तरी होती है
Dr. arun jadaun  

6.
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Dr. arun jadaun  

7.
pandit ji humari shadi 4 sal pahale huwi but achanak 11 janwari 15 ko hum dono h/wife alag huwe aur wife ne cort me case dali talak ke liye pata nahi hum donome pyar hote huwe kaise alag huwe ji aur cort me case chalu hai hum wife se behad pyar karte ji but mere sasural wale ne mere wife apne bus me kar ke mere khilaf ho gai ye ple. help taki hum ek ho jaye ple.
Vinay daulatrao yenurkar  

8.
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9.
Prabhu ki kripa kaise mile
surendra  

10.
Meri naukari nhi lga rhi h es ka upay batao
Deepak kumar  

11.
we have one property which is not getting sold out. My cousins are also troubling us.Parents are very old and they are pressuresing them. What we should do so that the propery get sold at good amount asap.
worship  

12.
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13.
guru jee mera weekly news paper tha mane mitra ke maswara se usa danik kar liya jabki mari gunjaise nahee thi kya karu upaye batya.may mobile no 9425682362 ha.
satish mishra seoni m.p.  

14.
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15.
mein ghar nahi bana pa raha hoo
ashwani sharma  

16.
mere brother,sister and mere wife ka relation good nahi hai kya karoo.Pl batao
ashwani sharma  

17.
धन सबकी किस्मत में है। सबके लिये विष्णु-लक्ष्मी जी, संपत्ति से भरी तिजोरी भेजते हैं। बस उस तिजोरी की चाबी उनके पास होती है। धनी बनने के लिए इसी तिजोरी की चाबी को खोजना है। चाबी कैसे मिलेगी यह बड़ा सवाल है। तो इसके लिए करने होंगे लक्ष्मी जी के उपाय। वैसे भी महालक्ष्मी व्रत 29 August से शुरू होंगे। लक्ष्मी जी आपके घर में, उत्तर दिशा से आयेंगी। तो धन संपत्ति पाने के लिये, लक्ष्मी जी को उत्तर दिशा से पुकारें। 15 दिन लक्ष्मी की आराधना से जन्म-जन्म की कंगाली दूर होगी। my email is pulkit5225@rediffmail.com

If you want to do MAHALAXMI VRAT then email me. Mahalaxmi vrat 16 days every year fast for 16 years fast will be observed and you will get everything which you really deserved then no need to depend on any other Vrat or Upvas, just contact me for full Mahalaxmi Vrat details in brief. Mahalaxmi Vrat will start from August 29, 2017 Tuesday to September 12, 2017 Tuesday till midnight (total 15 days). my email is pulkit5225@rediffmail.com
Amit Shah  


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