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शरद पूर्णिमा के उपाय / शरद पूर्णिमा के टोटके

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Kalash One Image शरद पूर्णिमा के उपाय / शरद पूर्णिमा के टोटके Kalash One Image


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हिन्दु धर्म शास्त्रो मे शरद पूर्णिमा को बहुत ही पुण्यदायक पर्व माना गया है। हम सभी जीवन भर धन लक्ष्मी की पीछे भागते है सुख समृद्धि और ऐश्वर्य की चाह रखते है, इसके लिए अपने परिश्रम के साथ नित्य पूजा अर्चना, दान-पुण्य, ब्रत इत्यादि भी करते है कि माँ लक्ष्मी की कृपा अवश्य ही बनी रहे। और शरद पूर्णिमा तो वह तिथि है जिस दिन माँ लक्ष्मी का अवतरण हुआ था अतः इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा आराधना, उनको प्रसन्न करने के लिये किये गए उपायों का अत्यंत श्रेष्ठ फल मिलता है ।
शास्त्रो में कई ऐसे उपाय बताये गए है जिन्हें शरद पूर्णिमा के दिन करने से घोर से घोर आर्थिक संकट भी दूर हो जाते है जीवन में सुख समृद्धि और ऐश्वर्य की वर्षा होने लगती है।

Kalash One Image शरद पूर्णिमा के दिन माता अष्ट लक्ष्मी की तस्वीर लेकर उसपर केसर का तिलक करके, 8 कमल चढ़ाकर महालक्ष्मी अष्टकम पढे । इस उपाय से कुंडली में चाहे जैसा भी योग हो माँ लक्ष्मी अपने भक्त को जीवन में अतुल ऐश्वर्य प्रदान करती है।

Kalash One Image शरद पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान को आँवले, सिंघाड़े, नारियल, पीले पुष्प, लौंग, इलाइची, केसर और मिष्ठान अर्पित करते हुए उनकी कथा कहे। इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा कहने से माँ लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती है जातक को जीवन भर भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। जातक के घर कारोबार में धन, सुख-समृद्धि की कोई भी कमी नहीं रहती है।

Kalash One Image भगवान विष्णु को आँवला अत्यंत प्रिय है । शरद पूर्णिमा को आंवला की पूजा से माँ लक्ष्मी का घर में अवश्य ही आती है। शरद पूर्णिमा के दिन आँवले को रात में चन्द्रमा की चाँदनी में रखे। मान्यता है की इस दिन चन्द्रमा की किरणों में रखे आंवले में औषधीय शक्ति आ जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक है ।

Kalash One Image शरद पूर्णिमा के दिन माँ लक्ष्मी अवतरित हुई थी। इस दिन लक्ष्मी सहस्त्रनाम, ,सिद्धिलक्ष्मी कवच, श्रीसूक्त, लक्ष्मी सूक्त, महालक्ष्मी कवच, कनकधारा के पाठ में जो भी कर सके उसे अधिक से अधिक अवश्य ही करें । इससे आने वाली पीढ़ियों पर भी माँ लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

Kalash One Image इस दिन तांबे के बरतन में देशी घी भरकर किसी ब्राह्मण को दान करने और साथ में दक्षिणा भी देने से बहुत पुण्य की प्राप्ति होती है और धन लाभ की प्रबल सम्भावना बनती है। इस दिन ब्राह्मण को खीर, कपड़े आदि का दान भी करना बहुत शुभ रहता है ।

Kalash One Image इस दिन संध्या के समय 100 या इससे अधिक घी के दीपक जलाकर घर के पूजा स्थान, छत, गार्डन, तुलसी के पौधे, चारदिवारी आदि के पास रखने से, अर्थात इन दीपमालाओं से घर को सजाने से भी माँ लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होती है।

Kalash One Image माँ लक्ष्मी को खीर अत्यंत प्रिय है । शास्त्रो में गाय के दूध में महालक्ष्मी का वास माना गया है, अत: इस दिन यथा संभव गाय के दूध में खीर बनाये और खीर में केसर, छुआड़े और मेवे भी अपनी सामर्थ्यानुसार अवश्य ही डालें ।

Kalash One Image मान्यता है कि खीर को चांदी के पात्र में बनाना चाहिए। चांदी में प्रतिरोधकता अधिक होती है इसलिए इससे विषाणु दूर रहते हैं। शरद पूर्णिमा के दिन प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम 30 मिनट तक चंद्रमा की रौशनी का स्नान अवश्य ही करना चाहिए। इसके लिए रात्रि 10 से 12 बजे तक का समय सबसे उपयुक्त रहता है।

Kalash One Image दमा रोगियों के लिए शरद पूर्णिमा की रात वरदान बनकर आती है। शरद पूर्णिमा की रात्रि खीर को चांदनी रात में रखकर प्रात: 4 बजे माँ लक्ष्मी को उसका भोग लगाकर उसका सेवन रोगी को कराएं है। दमे का मरीज चंद्रमा की चाँदनी में रात्रि जागरण करें और इस रात्रि में 2-3 किमी पैदल भी अवश्य ही चले, इससे दमे में अत्यधिक सुधार होता है।

Kalash One Image शोध से पता चला है कि शरद पूर्णिमा के दिन औषधियों की स्पंदन क्षमता बहुत अधिक होती है। लंकापति रावण शरद पूर्णिमा की रात चन्द्रमा की किरणों को दर्पण के माध्यम से अपनी नाभि पर ग्रहण करता था इससे उसे यौवन शक्ति की प्राप्त होती थी। माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में 10 से मध्यरात्रि 12 बजे के बीच कम वस्त्रों में चन्द्रमा की चाँदनी में स्नान करने वाले व्यक्ति को ऊर्जा प्राप्त होती है, उसका यौवन बढ़ता है। अत: प्रत्येक व्यक्ति को इस इन 10 से 12 बजे घर के अंदर नहीं वरन चन्द्रमा की रौशनी में ही रहना चाहिए ।

Kalash One Image मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा अपनी पूर्ण सोलह कलाओं के साथ अवतरित होता है, इस दिन चन्द्रमा की किरणों में अमृत का वास माना गया है, चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा खीर में समाहित हो जाती हैं जिसका सेवन करने से सभी प्रकार की बीमारियां आदि दूर हो जाती हैं। आयुर्वेद में भी चाँदनी के औषधीय महत्व का वर्णन मिलता है, खीर को रात्रि में चांदनी में रखकर अगले दिन इसका सेवन करने से असाध्य रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है, यौवन बना रहता है।

Kalash One Image पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान देवी माँ लक्ष्मी प्रकट हुई। उनके रूप, सौन्दर्य को देखकर उन्हे पाने के लिए देव-दानव आपस में संघर्ष करने लगे। इस संघर्ष के दौरान देवी लक्ष्मी ने बिल्व वृक्ष के नीचे आराम किया था अतः नवरात्र के दौरान महाष्टमी व महानवमी के दिन एवं शरद पूर्णिमा के दिन बिल्वपत्र के पेड़ की पूजा की जाती है और जल चढ़ाया जाता है।

Kalash One Image शरद पूर्णिमा के दिन मंदिर में जाकर माँ लक्ष्मी को इत्र और सुगन्धित अगरबत्ती अर्पण करनी चाहिए । इत्र की शीशी खोलकर माता के वस्त्र पर वह इत्र छिड़क दें , उस अगरबत्ती के पैकेट से भी कुछ अगरबत्ती निकल कर जला दें फिर धन, सुख समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी माँ लक्ष्मी से अपने घर में स्थाई रूप से निवास करने की प्रार्थना करें। इससे माँ अपने भक्त के सभी संकट दूर करती है।




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