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रक्षाबंधन
Raksha Bandhan



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रक्षाबंधन का महत्व
Raksha Bandhan ka mahtv



रक्षाबंधन ( Raksha Bandhan ) के पर्व का शास्त्रों में बहुत महत्व बताया गया है। धार्मिक ग्रंथो में बहुत जगह उल्लेख आया है कि देवता भी इस पर्व को हर्ष उल्लास के साथ मनाते है। मान्यता है कि सावन माह की पूर्णिमा के दिन शुभ मुहूर्त में बाँधा गया रक्षासूत्र का प्रभाव बहुत शक्तिशाली होता है, बहनो द्वारा अपनी भाइयों की कलाई में बाँधी गयी इस राखी के प्रभाव से भाइयों की हर संकटो से निश्चय ही रक्षा होती है , उन्हें देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। विभिन्न युगो, कालखंडो में भी इस पर्व के मनाये जाने के बारे में पता चलता है।
जानिए क्या है रक्षाबंधन का महत्व, ( Raksha Bandhan ka mahtv )

hand-logo एक अन्य प्रसंग मृत्यु के देवता भगवान यम और यमुना नदी का भी मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यमराज और यमुना जी भगवान सूर्य देव की संतान है। यमुना जी बहन के रूप में अपने भाई यम से स्नेह पाना चाहती थी। कहते है इसीलिए यमुना जी ने एक बार यमराज की कलाई पर धागा बांधा था। भगवान यम, यमुना की इस बात से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने यमुना की रक्षा का वचन देने के साथ ही यमुना को अमरता का वरदान भी दे दिया।
यमराज जी ने अपनी बहन यमुना को यह भी वचन दिया कि जो भी बहन सावन की पूर्णिमा के दिन अपने भाई को शुभ मुहूर्त में राखी / रक्षा सूत्र बांधेगी, और भाई अपनी बहन की मदद के लिए वचन देगा, उसका कल्याण होगा, वह उसे लंबी आयु का वरदान देंगे, उससे अकाल मृत्यु दूर रहेगी।
इसी लिए मान्यता है कि जो भी बहन रक्षाबंधन के दिन अपने भाई को प्रेम पूर्वक राखी बाँधती है उसकी सभी आपदाओं से रक्षा होती है।

hand-logo विष्णु पुराण के एक और प्रसंग में कहा गया है कि श्रावण की पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु ने हयग्रीव के रूप में अवतार लेकर समस्त वेदों को ब्रह्मा जी के लिये फिर से प्राप्त किया था। शास्त्रों में हयग्रीव को विद्या और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है।

hand-logo रक्षाबंधन ( Rakshabandhan ) के बारे में हिन्दुओं के प्रमुख ग्रन्थ महाभारत में भी उल्लेख है। महाभारत के युद्द से पहले कौरवो की बड़ी सेना देखकर जब धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं कौरवो की विशाल सेना पर कैसे विजय प्राप्त कर सकता हूँ, सभी संकटों को कैसे पार कर सकता हूँ तब भगवान कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को उनकी तथा उनकी सेना की रक्षा, युद्द में विजय के लिये रक्षाबन्धन का पर्व मनाने की सलाह दी ।

hand-logo भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि राखी के इस रेशमी धागे , इस रक्षा सूत्र में वह शक्ति है जिससे आपकी सेना विजयी होती तथा आपलोगो की सभी आपत्तियों से रक्षा होगी,। महाभारत में द्रौपदी द्वारा भगवान कृष्ण को राखी बाँधने के भी कई उल्लेख मिलते हैं।

hand-logo महाभारत में ही रक्षाबन्धन से सम्बन्धित कृष्ण और द्रौपदी की एक कथा के अनुसार जब भगवान श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी में चोट आ गई और खून बहने लगा । यह देखकर द्रौपदी ने उसी समय बिना समय गँवाये अपनी साड़ी को फाड़कर श्रीकृष्ण जी की उँगली पर पट्टी बाँध दी। वह श्रावण मास की पूर्णिमा का ही दिन था। द्रोपदी के इसी स्नेह को देखकर वासुदेव ने द्रोपदी को उसकी रक्षा का वचन दिया।

hand-logo और यह सर्व विदित है कि श्रीकृष्ण जी ने द्रोपदी के इस उपकार का बदला बाद में भरी सभा में दुःशासन द्वारा द्रोपदी के चीरहरण के समय उनकी साड़ी को बढ़ाकर चुकाया। और महाभारत के युध्द में भी पांडवो का ही साथ दिया मान्यता है। की एक दूसरे की रक्षा और सहयोग की भावना यहीं से रक्षाबन्धन के पर्व में प्रारम्भ हुई थी ।

hand-logo कालांतर में यूनान के मकदूनिया के शासक बादशाह फिलिप का बेटा सिकंदर यूनान से विश्व विजय के लिए चला और भारत आ पहुँचा । वहाँ पर चेनाब नदी के क्षेत्रो में राजा पुरु का शासन था जो बहुत ही महान योद्धा था।
एक प्रसंगानुसार सिकन्दर की पत्नी ने राजा पुरु की वीरता और विशाल सेना के बारे में सुनकर अपने पति की रक्षा के लिए राजा पुरू को राखी बाँधकर उन्हें अपना मुँहबोला भाई बनाया और उनसे युद्ध के समय सिकन्दर को न मारने का वचन ले लिया। इतिहासकार कहते है कि युद्ध के दौरान बहन को दिये हुए वचन के सम्मान, और अपने हाथ में बँधी राखी के कारण वीर राजा पुरु ने सिकन्दर को जीवन-दान दे दिया था ।

hand-logo मध्यकाल में रक्षाबंधन ( Rakshabandhan ) का पर्व उत्तर भारत में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाने लगा। इस रेशमी धागे / रक्षासूत्र के प्रति धारणा इतनी बलवती थी कि कहते है कि जब भी राजपूत लड़ाई पर जाते थे तब महिलाएँ हाथ में रेशमी धागा बाँधकर उनके माथे पर कुमकुम का तिलक लगाती थी। उन्हें विश्वास था कि यह धागा / रक्षासूत्र उनके वीरो को विजय दिलवाकर उन्हें सकुशल वापस ले आयेगा।

hand-logo मध्यकाल में ही राखी के साथ एक बहुत प्रसिद्ध कहानी जुड़ी है। बताया जाता है कि राजस्थान में मेवाड़ पर बहादुरशाह ने हमला कर दिया उस समय वहाँ पर रानी कर्मावती को जब यह खबर मिली तो वह बहादुरशाह की ताकत के कारण उसके हमले से परेशान हो गयी। तब रानी ने मुगल बादशाह हुमायूँ को राखी भेज कर उनसे मदद माँगी और उनसे अपने राज्य की रक्षा की याचना की।
बादशाह हुमायूँ ने मुसलमान होने के बाद भी राखी की लाज निभाई और मेवाड़ में पहुँच कर मेवाड़ की ओर से बहादुरशाह के विरूद्ध लड़ते हुए रानी कर्मावती व उसके राज्य की रक्षा की।

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