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पितरों का श्राद्ध / तर्पण

Pitron Ka Shardh / Tarpan

पसीने की बदबू के उपाय

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पितरों का श्राद्ध / तर्पण

Pitron Ka Shardh / Tarpan

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पितरों का श्राद्ध / तर्पण


Pitron Ka Shardh / Tarpan


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पितृ पक्ष Pitra Paksh का हिन्दू धर्म तथा हिन्दू संस्कृति में बड़ा महत्व है। श्रद्धापूर्वक पित्तरों के लिये किया गया कर्म श्राद्ध कहलाता है, जो पित्तरों के नाम पर श्राद्ध Shradh तथा पिण्डदान Pinddaan नहीं करता है वह हिन्दू नहीं माना जा सकता है।
हिन्दूशास्त्रों के अनुसार मृत्यु होने पर जीवात्मा चन्द्रलोक की तरफ जाती है तथा ऊँची उठकर पितृलोक में पहुँचती है इन मृतात्मओं को शक्ति प्रदान करने के लिये पिण्डदान Pind Daan और श्राद्ध Shradh किया जाता है। श्राद्ध पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धा का प्रतीक हैं।
मरने के बाद स्थूल शरीर समाप्‍त होकर केवल सूक्ष्म शरीर ही रह जाता है। सूक्ष्म शरीर को भूख-प्यास, सर्दी-गर्मी आदि की आवश्यकता नहीं रहती। सूक्ष्म शरीर में चेतना और भावना की प्रधानता रहती है। ऐसे में पितरों को हमसे केवल आदर, श्रद्धा की ही आकांक्षा होती है। वे इसी से तृप्त हो जाते है। इसीलिए पितरों की प्रसन्नता के लिए श्राद्ध Shradh एवं तर्पण Tarpan किए जाते हैं। इन क्रियाओं का विधि-विधान बहुत ही सरल और कण खर्चे का है, सभी व्यक्ति इसे बहुत ही आसानी से संपन्न कर सकते है। पित्तरों के के नाम पर दान-पुण्य करके ब्राहम्णों को भोजन भी कराया जाता है। इसके पुण्यफल से ही पित्तर संतुष्ट रहते है।

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Kalash One Image पित्तरों के लिये श्राद्ध प्रत्येक वर्ष 2 बार किया जाता है। प्रथम मृत्यु की तिथि पर द्वितीय पित्तर पक्ष में। वर्ष में जिस माह की जिस तारीख में पित्तर की मृत्यु हुयी है उस तिथि को किया जाने वाला श्राद्ध “एकोदिष श्राद्ध” कहलाता है।

Kalash One Image समें उस पित्तर की संतुष्टि के लिये उस दिन एक पिण्ड का दान किया जाता है तथा एक ब्राहमण को भोजन कराया जाता है।

Kalash One Image द्वितीय अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की जिस तिथि को पित्तर की मृत्यु हुयी थी उस दिन किया जाने वाला श्राद्ध “पाण श्राद्ध” कहलाता है। कहते है अश्विन मास में हमारे पित्तर अपने पृथ्वी लोकवासी सगे-सम्बन्धियों के घर बिना बुलाये आते है और ‘काव्य’ ग्रहण करके तृप्त होते है तथा अपने वंशजों को आशीर्वाद प्रदान करते है।

Kalash One Image शास्त्रों के अनुसार जिन व्यक्तियों की अकाल-मृत्यु (दुर्घटना, हत्या, सर्पदंश, आत्महत्या आदि) हुई हो, उनका श्राद्ध केवल चतुर्दशी तिथि को ही किया जाता है।
Kalash One Image सुहागिन स्त्रियों का श्राद्ध केवल नवमी को ही किया जाना उचित है। नवमी तिथि माता के श्राद्ध के लिए सबसे उत्तम है।
Kalash One Image संन्यासी पितृगणों का श्राद्ध केवल द्वादशी को किया जाता है।
Kalash One Image पूर्णिमा को मृत्यु प्राप्त व्यक्ति का श्राद्ध केवल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा अथवा आश्विन में कृष्ण पक्ष की अमावस्या को ही किया जाना चाहिए ।
Kalash One Image नाना-नानी का श्राद्ध केवल आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को ही करना उचित माना गया है ।


Kalash One Image ब्रह्म पुराण के अनुसार, 'जो कुछ उचित काल, पात्र एवं स्थान के अनुसार शास्त्रों में बताई विधि द्वारा पितरों को के निमित श्रद्धापूर्वक ब्राह्मणों को दिया जाता है, वह श्राद्ध कहलाता है।

Kalash One Image याज्ञवल्क्यस्मृति के अनुसार हमारे आदि पितृ –वसु, रुद्र एवं आदित्य, जो कि श्राद्ध के देवता हैं, श्राद्ध से संतुष्ट होकर श्राद्धकर्ता के पितरो को संतुष्टि देते हैं।

Kalash One Image हर व्यक्ति के तीन पूर्वज पिता, दादा और परदादा क्रम से वसु, रुद्र और आदित्य पितृ के समान माने जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध के वक़्त वे ही अन्य सभी पूर्वजों के प्रतिनिधि होते हैं।

Kalash One Image मान्यता है कि वे श्राद्ध कराने वालों के शरीर में प्रवेश करके पूर्ण विधि के अनुसार कराये गये श्राद्ध-कर्म से तृप्त होकर , श्राद्धकर्ता और उसके वंशजो को सपरिवार सुख-समृद्धि, आरोग्य एवं दीर्घ आयु का आर्शीवाद देते हैं। वे श्राद्ध-कर्म में बोले गए मन्त्रों और आहुतियों को अन्य सभी पितरों तक ले जाते हैं।

Kalash One Image वैसे तो पितृपक्ष में किये जाने वाले श्राद्ध में नौ ब्राहमणें को भोजन कराना चाहिये लेकिन वर्तमान समय में यदि एक ब्राहमण को भी श्रृद्धापूर्वक आदर सहित भोजन कराया जाय तो वह भी पर्याप्त है। उस दिन उस ब्राहमण को ही पितृदेवता समझकर उनका स्वागत सत्कार करना चाहिये तथा उन्हे पूर्ण रूप से संतुष्ट करके ही स्वयं भोजन करना चाहिये। इस दिन ब्राहमणों को अतिरिक्त एक-एक ग्रास गाय, कौआ, कुत्ता तथा चीटियों के लिये भी निकालना चाहिये।

Kalash One Image श्राद्ध का अर्थ ही श्रद्धा भाव से किया गया कर्म है यदि श्राद्धकर्ता निर्धन हो, ब्राहमण को भोजन ना भी करा पाये तो पित्तरों के नाम से गाय को हरा चारा ही डाल दे तथा श्रद्धा से पित्तरों से विनम्र निवेदन कर ले कि मेरे पास आपके लिये आदर श्रद्धा एवं भक्ति के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है, आप मुझे क्षमा करके मुझ पर एवं मेरे परिवार पर कृपा करें तब भी पित्तर प्रसन्न हो जाते है।

Kalash One Image पितृ अत्यंत दयालु तथा कृपालु होते हैं, वह अपने पुत्र-पौत्रों से पिण्डदान तथा तर्पण की आकांक्षा रखते हैं। श्राद्ध तर्पण आदि द्वारा पितृ को बहुत प्रसन्नता एवं संतुष्टि मिलती है। शास्त्रों के अनुसार अमावस्या बरसी और पूरे श्राद्ध पक्ष Shradh Paksh में पितृगण वायुरूप में अपने वंशजों के घर के दरवाजे पर खड़े रहते हैं और अपने स्वजनों से तर्पण Tarpan, श्राद्ध Shradh की उम्मीद करते हैं। जब उनका पूर्ण श्रद्धा से श्राद्ध एवं तर्पण किया जाता है तो वे अपने वंशजो को प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते है ।

Kalash One Imageलेकिन यदि उनका तर्पण और श्राद्ध ना किया जाएं तो वे सूर्यास्त तक भूख-प्यास से व्याकुल होकर वहीं खड़े रहते हैं। सूर्यास्त हो जाने के पश्चात वे निराश होकर दुःखित मन से अपने-अपने लोकों को लौट जाते हैं। अतःइन दिनों इनका श्राद्ध, तर्पण, ब्राह्मण भोजन अवश्य करना चाहिए।

Kalash One Image जैसे पशुओं के भोजन को तृण और मनुष्यों का भोजन को अन्न कहते , वैसे ही देवता और पितरों का भोजन अन्न का 'सार तत्व' है। सार तत्व का अर्थ है गंध, रस और उष्मा। देवता और पितर दोनों ही गंध तथा रस तत्व से तृप्त होते हैं। लेकिन दोनों के लिए अलग अलग तरह के गंध और रस होते है।अत: जो भी वस्तुएं हम श्रद्धा से अपने पूर्वजों को अर्पित करते है वह उन तक सार तत्व के रूप में पहुँच जाती है।

कुर्वीत समये श्राद्धं कुले कश्चिन्न सीदति।
आयुः पुत्रान् यशः स्वर्गं कीर्तिं पुष्टिं बलं श्रियम्।।
पशून् सौख्यं धनं धान्यं प्राप्नुयात् पितृपूजनात्।
देवकार्यादपि सदा पितृकार्यं विशिष्यते।।
देवताभ्यः पितृणां हि पूर्वमाप्यायनं शुभम्।

Kalash One Image हमारे पितृ मृत्यु के बाद जिस लोक में रहते है वह पितृ लोक कहलाता हैं। यह चांद के पास है इस लिए इसे सोम लोक भी कहा जाता है ।
Kalash One Image पित्रों के एक दिन 30 मानव दिनों के समान होते हैं।
Kalash One Image एक महीने में एक बार मात्र अमावास्य पर जो उनके लिए दोपहर का खाने का समय है पितृ तर्पण Pitra Tarpan करने से,
Kalash One Image उनके निमित ब्राह्मण भोजन कराने से,
Kalash One Image उनके निमित दान देने से उनको महान संतोष की प्राप्ति होती है वह पूर्ण रूप से तृप्त हो जाते है।

Kalash One Image "समयानुसार श्राद्ध, तर्पण करने से कुल में कोई दुःखी नहीं रहता। पितरों की पूजा करके मनुष्य आयु, पुत्र, यश, स्वर्ग, कीर्ति, पुष्टि, बल, श्री, पशु, सुख और धन-धान्य प्राप्त करता है। देवकार्य से भी पितृकार्य का विशेष महत्त्व है। देवताओं से पहले पितरों को प्रसन्न करना अधिक कल्याणकारी है।"

Kalash One Image पितृपक्ष में तीन पीढ़ियों तक के पिता पक्ष के तथा तीन पीढ़ियों तक के माता पक्ष के पूर्वजों के लिए तर्पण किया जाता हैं।
तर्पण Tarpan करते समय एक पीतल के बर्तन में जल में गंगाजल, कच्चा दूध, तिल, जौ, तुलसी के पत्ते, दूब, शहद और सफेद फूल आदि डाल कर फिर एक लोटे से पहले देवताओं, ऋषियों, और सबसे बाद में पितरों का तर्पण Pitron Ka Tarpan करना चाहिए।

Kalash One Image इन पितृ-कर्मों को करने के दौरान अपने पूर्वजों के उपकारों का अवश्य ही स्मरण करें। उनके प्रति पूर्ण श्रद्धा कृतज्ञता तथा सम्मान की भावना रखें। उनके प्राप्ति हमारी इस प्रकार की भावनाएं जितनी ही प्रबल होंगी, पितरों को उतनी ही अधिक तृप्ति प्राप्त होगी ।

Kalash One Image जिस दिन अपने पूर्वजो का श्राद्ध करना हो उस दिन श्राद्ध के आरम्भ और श्राद्ध की समाप्ति पर निम्न मन्त्र का जाप अवश्य ही करें ।

ll देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च l

नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव भवन्त्युत ll


Kalash One Image अर्थात हे समस्त देवताओं, पितरों, महयोगियों, स्वधा एवं स्वाहा आप सबको हम नमस्कार करते है । आप सभी शाश्वत फल प्रदान करने वाले है ।

Kalash One Image इससे श्राद्ध करता को पितरों का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त होता है ।

Kalash One Image श्राद्ध में प्रतिदिन इस मन्त्र का उच्चारण अवश्य ही करें । इससे पितरों को परम संतुष्टि मिलती है और वह प्रसन्न होकर हमें अपना आशीर्वाद प्रदान करते है । ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधादेव्यै स्वाहा॥

श्राद्ध पक्ष में नित्य एक माला "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मन्त्र का जाप अवश्य ही करें ।

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पसीने की बदबू के उपाय

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