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मक्का मदीना
Makka Madina


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मक्का
Makka






मक्का जिसे अरबी में "मक्का अल मुकर्रमह" भी कहा जाता है विश्व भर के मुसलमानों का एक अति पाक स्थान है जो सउदी अरब में स्थित है। मक्का शहर एतिहासिक हेज़ाज क्षेत्र में स्थित हैं तथा सउदी अरब के मक्काह प्रान्त की राजधानी है यह शहर जेद्धा से 73 कि0मी0 की दूरी पर है। इस्लाम में पाक मक्का शहर हज यात्रा के लिये जाना जाता है जहाँ पर पूरे विश्व से हर साल लगभग 30 लाख लोग हज करने आते है हर मुस्लिम की यह ख्वाहिश होती है कि वह जीवन में एक बार हज जरूर करके आये। मक्का को इसलिये भी बहुत पवित्र मानते है क्योंकि इस्लाम धर्म के संस्थापक पैगम्बर हज़रत मोहम्मद साहब का यही पर 571 ई0 में जन्म हुआ था। माना जाता है कि मक्का की स्थापना इस्माइल वंश ने की थी। पैगम्बर हज़रत मोहम्मद साहब ने यहीं पर तत्कालीन सामाजिक एवं धार्मिक कुरीतियों का विरोध किया था जिसके कारण यहाँ के शासक इनके खिलाफ हो गये थे जिससे मोहम्मद साहब को मक्का छो़डकर मदीना जाना पड़ा। प्राचीन समय में मक्का एक प्रमुख व्यापारिक एवं सामरिक केन्द्र था तथा यहाँ से पूरे विश्व में इस्लाम का प्रचार एवं प्रसार हुआ था। 966 से 1924 तक मक्का एक स्वतन्त्र राज्य था तथा यहाँ पर स्थानीय शासन था, 1924 में यह नगर सउदी अरब राष्ट्र के अन्तर्गत आ गया था।

मक्का में हज यात्रा के समय गैर मुस्लिमों का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित है। यहाँ पर पाक "काबा" को पैगम्बर अब्राहम और उनके बेटे पैगम्बर इस्माइल द्वारा बनवाया गया था इसे काले कपड़ों से ढका गया है तथा हज यात्री इसकी 7 बार परिक्रमा करते है।

"अर-हरम-मस्जिद" मक्का की एक अत्यन्त पाक मस्जिद है जिसे काबा के पास में बनाया गया है, इसे दुनिया की सबसे पाक और विशाल मस्जिद का दर्जा हासिल है इस मस्जिद में एक साथ कई लाख लोग नमाज अदा कर सकते है।

यहाँ पर काबा से 4 मील दूर मदीना के रास्ते में "अल तनीम" (मस्जिद-ए-आइशा) एक विशाल मस्जिद है यहाँ पर भी बड़ी संख्या में लोग जरूर आते है।

मक्का से 25 कि0मी0 की दूरी पर "अराफात" स्थित है, जहाँ पर हज यात्री 9वें दिन जाते है। अराफात पूरब, उत्तर तथा दक्षिण की तरफ से खूबसूरत पहाड़ों से घिरा है, इनमें "अल रहमत" पहाड़ सबसे खूबसूरत और प्रमुख माना जाता है। कहते हैं इस पहाड़ से अल्लाह अपने बन्दों पर रहमतों को निछावर करता है तथा हर हज यात्री का अराफात जाना बहुत ही जरूरी माना जाता है तभी उसकी हज यात्रा पूरी होती है।

मक्का से पूर्व में अल-हरम-मस्जिद से 5 कि0मी0 की दूरी पर 2 पहाड़ों के बीच घाटी में "मीना" स्थित है कहते है यहाँ पर शैतान कैद है तथा सभी हज यात्री शैतान को पत्थर मारने की रस्म निभाने अनिवार्य रूप से यहाँ पर आते है तथा यहाँ पर रूककर जानवरों की बलि भी जरूर चड़ाते है।

मक्का के पास में ही "जन्नत-उल-मौला" भी अति पाक एवं दर्शनीय स्थल है जहाँ पर पैगम्बर मोहम्मद साहब के सभी कब्रिस्तान में दफन है।

यहाँ पर "जबल-अल-गुरू" एक प्रसिद्ध गुफा है। कहते है जब मक्का के तत्कालीन शासकों ने मोहम्मद साहब और उनके परिजनों को मारने के लिये अपने सैनिक भेजे थे तो मोहम्मद साहब ने इसी गुफा में शरण ली थी, माना जाता है इस गुफा के मुहाने पर मकड़ियों ने अपना जाला बना दिया था जिससे सैनिक वहीं से वापस लौट गये थें और सबके प्राण बच गये थे।

इन्ही सब कारणों से बहुत ही खुशनसीब है वह लोग जो अल्लाह की मेहरबानी से मक्का में हज करके अपना जीवन सफल कर पाते है।






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