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लाभ पँचमी के उपाय

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भगवान गणपति देवताओं में सबसे पहले पूजनीय माने गए है । ऐसी मान्यता है कि लाभ पँचमी के दिन यदि नए कारोबारी वर्ष की शुरुआत, नए कार्य का प्रारम्भ भगवान गणपति जी की पूजा अर्चना के साथ की जाय तो निश्चय ही भगवान गजानन अपने भक्त के सभी कार्यो से विघ्नों को दूर करते है, जातक को वर्ष भर सभी दिशाओं से सफलता एवं लाभ की प्राप्ति होती है। इस दिन गणेश जी की आराधना से अक्षय पुण्य मिलता है किये गए उपाय शीघ्र ही फलदायी होते है ।

trishuk लाभ पँचमी के दिन गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए सर्वप्रथम उन्हें रोली ,लाल सिंदूर का तिलक लगाएं।

trishuk दूर्वा गणेश जी को अत्यंत प्रिय है शास्त्रों के अनुसार दूर्वा में अमृत मौजूद होता है। इस दिन "इदं दुर्वादलं ऊं गं गणपतये नमः" मंत्र बोलते हुए इन्हें 5/7 /11/21 दूर्वा यानी हरी घास गिन कर अर्पित करें। ध्यान रहे कि दुर्वा गणेश जी के मस्तक पर रखना चाहिए उनके चरणों में दुर्वा नहीं रखें। गणपति अथर्वशीर्ष के अनुसार जो व्यक्ति गणेश जी की पूजा नित्य दुर्वांकुर से करता है वह देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर के समान धनवान हो जाता है, अर्थात उस व्यक्ति के पास धन-धान्य की कभी कमी नहीं रहती है।

trishuk सौभाग्य पँचमी के अवसर पर घर में प्रथम आराध्य देव गणेश जी का आह्वान करते हुए घर परिवार में सुख समृद्धि के लिए उनकी विधिपूर्वक पूजा अर्चना की जाती है। लाभ पंचमी में गणेश मंदिरों में सजावट करके विशेष धार्मिक अनुष्ठान किये जाते हैं। इस दिन यदि आपके आस पास कोई गणेश मंदिर हो तो वहाँ पर दर्शन करने अवश्य ही जाएँ।

trishuk लाभ पंचमी के दिन समस्त कार्यो में सफलता के लिए गणेश जी को लड्डुओं / मोदक का भोग लगाएं। शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए सर्वोत्तम उपाय मोदक का भोग है । पद्म पुराण के सृष्टि खंड के अनुसार मोदक का निर्माण अमृत से हुआ है। मान्यता है कि जो व्यक्ति गणेश जी को इस दिन मोदक का भोग लगाते है गणपति उसका अवश्य जी मंगल करते हैं, उस जातक की समस्त मनोकामना शीघ्र ही पूरी होती है।

trishuk भगवान गणेश को घी काफी पसंद है। घी को पुष्टिवर्धक और रोगनाशक कहा जाता है। पंचामृत में एक अमृत घी भी होता है। गणपति अथर्वशीर्ष के अनुसार घी से गणेश की पूजा करने से जातक को ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति होती है। कहते है कि नित्य घी से गणेश की पूजा करने वाला व्यक्ति अपनी बुद्धि, ज्ञान और योग्यता के बल से संसार में श्रेष्ठ स्थान हासिल कर लेता है।

trishuk शमी गणेश जी को अत्यंत प्रिय है। इस दिन भगवान गणेश जी को शमी के पत्ते अवश्य ही अर्पितकरें। शमी ही एक मात्रा पौधा है जिसकी पूजा से भगवान शंकर, गणेश जी और शनि सभी प्रसन्न होते हैं। शास्त्रों के अनुसार जो जातक शमी के कुछ पत्ते नियमित रूप से गणेश जी को अर्पित करता है जीवन में कोई भी संकट उसके पास भी नहीं आता है उसके घर में धन - धान्य , सुख - समृद्धि की कोई भी कमी नहीं होती है।

trishuk लाभ पंचमी के दिन भगवान गणेश जी कृपा पाने के लिए उन्हें पवित्र अखंडित अक्षत अर्थात चावल अर्पित करें। अखंडित अर्थात जो टूटा हुआ नहीं हो। गणेश जी को सूखा अक्षत नहीं चढ़ाते है। उनको अक्षत चढ़ाने से पहले उसमें कुछ बुँदे गंगाजल / जल की डालकर उसे गीला करके चढ़ाएं।

trishuk तत्पश्चात घी का दीपक / धूप अगरबत्ती जलाकर "ॐ श्री महा गणपतये नमः" मन्त्र की 5 माला का जाप करें । इस तरह गणेश जी की आराधना करने से, उन्हें प्रसन्न करने से पूरे वर्ष लाभ के योग बनते है, कार्यो में श्रेष्ठ सफलता मनवाँछित लाभ प्राप्त होता है ।

trishuk लाभ पँचमी के शीघ्र फलदायी उपाय trishuk


trishuk लाभ पंचमी के दिन से भगवान गणपति को अपनी मनोकामना बोलते हुए लगातार 21 / 42 दिन तक जयवित्री चढ़ाएं , इससे भगवान विघ्नहर्ता की कृपा से निश्चय ही सोचे हुए कार्य पूर्ण होते है।

trishuk लाभ पंचमी के दिन से लगातार 11 बुधवार तक भगवान गणेश जी को घी और गुड़ का भोग लगाते हुए उसे गाय को खिला दें, इससे भाग्य तेज होता है, कार्यों के विघ्न दूर होते है।




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